Pitru Paksha 2020 Start Date and Time : कब से शुरू होगा पितृपक्ष, यहां जानें पितरों का तर्पण और श्राद्ध करने की पूरी जानकारी…
pitru paksha 2020 start date and time, Tithi, Shradh Vidhi, shradh ka samay, shradh ke niyam, Pitra Dosh: पितृपक्ष की शुरुआत कल 1 सितंबर से हो रही है. कल श्राद्ध पूर्णिमा है. पितृ पक्ष का समय पूरी तरह से पितरों को समर्पित है. श्राद्ध में पितरों का तर्पण करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और पितरों का आशीर्वाद भी मिलता है. पितरों की आत्मा की शांति के लिए शास्त्रों में श्राद्ध का बहुत महत्व माना गया है. शास्त्रों में कहा गया है कि पितरों का तर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और वे प्रसन्न होकर सुखी जीवन का आशीर्वाद देते हैं. हर साल पितृपक्ष पर पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म किया जाता है. इन दिनों में पिंडदान, तर्पण, हवन और अन्न दान मुख्य होते हैं. ऐसी मान्यता है कि जो लोग पितृ पक्ष में पूर्वजों का तर्पण नहीं कराते, उन्हें पितृदोष लगता है. श्राद्ध के बाद ही पितृदोष से मुक्ति मिलती है. हालांकि इस साल मोक्षदायिनी ‘गया’ की धरती पर पिंडदान नहीं किया जा सकेगा. कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर बिहार सरकार ने ये फैसला लिया है. इस साल आप सभी तरह के कर्मकांड व दान आदि अपने घर पर कर सकते हैं. आइए जानते है पितरों का तर्पण करने की विधि और इससे जुड़ी पूरी जानकारी…
Pitru Paksha 2020 Start Date and Time : कब से शुरू होगा पितृपक्ष, यहां जानें पितरों का तर्पण और श्राद्ध करने की पूरी जानकारी…
Live Updates
4:10 AM. 2 Sept 2010:40 PM. 1 Sept
इस दिन से शरू होगा पितृपक्ष
इस साल पितृपक्ष 1 सितंबर से शुरू हो रहे हैं. अंतिम श्राद्ध यानी अमावस्या श्राद्ध 17 सितंबर को होगा.
4:10 AM. 2 Sept 2010:40 PM. 1 Sept
ऐसे मिलती है पितृदोष से मुक्ति
ऐसी मान्यता है कि जो लोग पितृ पक्ष में पूर्वजों का तर्पण नहीं कराते, उन्हें पितृदोष लगता है. श्राद्ध के बाद ही पितृदोष से मुक्ति मिलती है. श्राद्ध से पितरों को शांति मिलती हैं. वे प्रसन्न रहते हैं और उनका आशीर्वाद परिवार को प्राप्त होता है.
12:53 AM. 2 Sept 207:23 PM. 1 Sept
श्राद्ध करने से मिलने वाले लाभ
पितृपक्ष में पूर्वजों को याद करके पूजा-पाठ के अलावा दान-धर्म किया जाता है. इन दिनों ग्रहों की शांति के लिए दान-पुण्य और पूजा पाठ किए जाते हैं, ताकि हम पर पूर्वजों की कृपा बनी रहे. इन दिनों श्राद्ध कर्म से मनुष्य की आयु बढ़ती है और पितरगण वंश विस्तार का आशीर्वाद देते हैं. परिवार के धन-धान्य में बढ़ोतरी होती है. श्राद्ध में किए गए तर्पण से प्रसन्न होकर पूर्वज स्वास्थ्य, बल, श्रेय, धन-धान्य और सभी सुखों का आशीर्वाद देते हैं. श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करने वाले के परिवार में कोई क्लेश नहीं रहता है.
12:53 AM. 2 Sept 207:23 PM. 1 Sept
पिंड दान की विधि
श्राद्ध में पिंडदान, तर्पण और ब्राह्मण भोज कराया जाता है. इसमें चावल, गाय का दूध, घी, शक्कर और शहद को मिलाकर बने पिंडों को पितरों को अर्पित किया जाता है. जल में काले तिल, जौ, कुशा यानि हरी घास और सफेद फूल मिलाकर उससे विधिपूर्वक तर्पण किया जाता है. इसके बाद ब्राह्मण भोज कराया जाता है. कहा जाता है कि इन दिनों में आपके पूर्वज किसी भी रूप में आपके द्वार पर आ सकते हैं इसलिए घर आए किसी भी व्यक्ति का निरादर नहीं करना चाहिए.
12:53 AM. 2 Sept 207:23 PM. 1 Sept
पितरों का श्राद्ध कैसे करें?
पितरों का श्राद्ध उनकी मृत्यु तिथि पर ही किया जाना चाहिए. श्राद्ध को लेकर कुछ विशेष मान्यताएं भी बताई गईं हैं. जैसे पिता का श्राद्ध अष्टमी और माता का श्राद्ध नवमी के दिन ही किया जाता है. अगर के किसी सदस्य की अकाल मृत्यु हुई है तो उनका श्राद्ध चतुर्दशी के दिन किया जाता है. साधु और संन्यासियों का श्राद्ध द्वादशी के दिन किया जाना चाहिए. जिन पितरों की मृत्यु तिथि याद नहीं हो, उनका श्राद्ध अमावस्या के दिन किया जाना चाहिए.
11:26 PM. 1 Sept 205:56 PM. 1 Sept
ऐसा करने से होता है पितृदोष का सामना
जो भी अपने पितरों को तर्पण नहीं करता है उन्हें पितृदोष का सामना करना पड़ता है. ऐसे दोष की स्थिति में परिजनों को धन, सेहत और अन्य कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ता है.
मुख्य बातें
pitru paksha 2020 start date and time, Tithi, Shradh Vidhi, shradh ka samay, shradh ke niyam, Pitra Dosh: पितृपक्ष की शुरुआत कल 1 सितंबर से हो रही है. कल श्राद्ध पूर्णिमा है. पितृ पक्ष का समय पूरी तरह से पितरों को समर्पित है. श्राद्ध में पितरों का तर्पण करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और पितरों का आशीर्वाद भी मिलता है. पितरों की आत्मा की शांति के लिए शास्त्रों में श्राद्ध का बहुत महत्व माना गया है. शास्त्रों में कहा गया है कि पितरों का तर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और वे प्रसन्न होकर सुखी जीवन का आशीर्वाद देते हैं. हर साल पितृपक्ष पर पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म किया जाता है. इन दिनों में पिंडदान, तर्पण, हवन और अन्न दान मुख्य होते हैं. ऐसी मान्यता है कि जो लोग पितृ पक्ष में पूर्वजों का तर्पण नहीं कराते, उन्हें पितृदोष लगता है. श्राद्ध के बाद ही पितृदोष से मुक्ति मिलती है. हालांकि इस साल मोक्षदायिनी ‘गया’ की धरती पर पिंडदान नहीं किया जा सकेगा. कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर बिहार सरकार ने ये फैसला लिया है. इस साल आप सभी तरह के कर्मकांड व दान आदि अपने घर पर कर सकते हैं. आइए जानते है पितरों का तर्पण करने की विधि और इससे जुड़ी पूरी जानकारी…