Naag Panchami 2026: नाग पंचमी और सावन की तीसरी सोमवारी का विशेष संयोग सोमवार को बन रहा है. लंबे समय बाद बने इस संयोग को धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है. इस दिन भक्तों को एक ही दिन भगवान शिव और नागदेव की पूजा का अवसर मिलेगा. मान्यता है कि सावन सोमवार को शिव पूजा और नाग पंचमी पर नागदेव की आराधना करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है.
शाम तक रहेगी पंचमी तिथि, बनेंगे शुभ योग
पंचमी तिथि सोमवार की शाम 6:49 बजे तक रहेगी. पंडित कौशल कुमार मिश्र के अनुसार, सोमवार सुबह 6:45 बजे तक हस्त नक्षत्र रहेगा, इसके बाद चित्रा नक्षत्र का प्रभाव शुरू होगा. इस दौरान साध्य के साथ शुभ योग का संयोग भी बन रहा है, जिसे धार्मिक कार्यों के लिए शुभ माना जा रहा है. ऐसे में शिव और नागदेव की आराधना करना विशेष फलदायी माना जा सकता है.
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शिव के साथ नागदेव की पूजा का महत्व
नाग को भगवान शिव का आभूषण माना जाता है. यही वजह है कि नाग पंचमी पर नागदेव की पूजा के साथ भगवान शिव की आराधना का भी विशेष महत्व बताया गया है. राजधानी रांची के विभिन्न शिवालयों के अलावा पहाड़ी मंदिर में भी भक्तों की भीड़ उमड़ने की संभावना है. पहाड़ी मंदिर स्थित नाग देवता के मंदिर में भक्त दूध, लावा, फूल और अन्य प्रसाद अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे.
कई श्रद्धालु इस दिन नागदेव की धातु से बनी आकृति का दान भी करते हैं. वहीं, घर के मुख्य द्वार पर नाग की आकृति बनाकर पूजा करने की भी परंपरा है.
ऐसे करें नागदेव की पूजा
नाग पंचमी पर सुबह स्नान-ध्यान के बाद भगवान शिव और नागदेव का स्मरण करें. नागदेव की तस्वीर घर के मुख्य द्वार पर लगाकर या गोबर से नाग की आकृति बनाकर पूजा की जा सकती है. नागदेव को दूध, फूल, लावा और अक्षत अर्पित करें. इसके बाद परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें. धार्मिक मान्यता के अनुसार, नागदेव की पूजा से कुंडली से जुड़े दोषों की शांति और घर में सकारात्मकता की कामना की जाती है.
