Muharram 2026: इस्लामिक चंद्र कैलेंडर में मुहर्रम वर्ष का पहला महीना होता है और इसे सबसे पवित्र महीनों में गिना जाता है. वर्ष 2026 में मुहर्रम की शुरुआत 16 जून के आसपास होने की संभावना है. हालांकि, इसकी अंतिम और आधिकारिक घोषणा चांद दिखाई देने के बाद ही की जाएगी.
मुहर्रम का 10वां दिन, जिसे यौम-ए-आशूरा कहा जाता है, सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. वर्ष 2026 में आशूरा 25 या 26 जून को पड़ सकता है, हालांकि यह भी चंद्र दर्शन पर निर्भर करेगा.
यौम-ए-आशूरा का धार्मिक महत्व
“आशूरा” का अर्थ है “दसवां”, इसलिए यौम-ए-आशूरा मुहर्रम की 10वीं तारीख को मनाया जाता है. इस दिन मुस्लिम समुदाय, विशेष रूप से शिया मुसलमान, हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं.
इस्लामी इतिहास के अनुसार, पैगंबर हजरत मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष किया था. मुहर्रम की 10वीं तारीख को उन्हें उनके परिवार और साथियों सहित शहीद कर दिया गया. उनकी कुर्बानी आज भी सत्य, न्याय और मानवता के लिए सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक मानी जाती है.
क्यों नहीं मनाया जाता नए साल का जश्न?
मुहर्रम इस्लामी नववर्ष की शुरुआत जरूर है, लेकिन इसे उत्सव या जश्न का अवसर नहीं माना जाता. इस महीने को आत्मचिंतन, इबादत और आध्यात्मिक अनुशासन का समय माना गया है.
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, मुसलमान इस दौरान अल्लाह की इबादत, नमाज, कुरान का पाठ, रोजा और सदका (दान) जैसे नेक कार्यों पर विशेष ध्यान देते हैं. इस्लाम के चार पवित्र महीनों में शामिल मुहर्रम में विवाद, हिंसा और झगड़े से बचने की भी शिक्षा दी गई है.
ताजिया और मजलिस की परंपरा
मुहर्रम के दौरान कई स्थानों पर ताजिया जुलूस निकाले जाते हैं और मजलिसों का आयोजन होता है. इनमें कर्बला की घटना और इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद किया जाता है. यह परंपरा श्रद्धा, सम्मान और ऐतिहासिक स्मरण का प्रतीक मानी जाती है.
मुहर्रम केवल इस्लामी नए साल की शुरुआत नहीं, बल्कि त्याग, धैर्य, न्याय और आस्था के मूल्यों को याद करने का अवसर भी है. यह महीना मुसलमानों को आत्ममंथन और नेक कार्यों की ओर प्रेरित करता है.
