Mantras For Children: बचपन वह उम्र होती है जब मन बिल्कुल साफ होता है और जो भी सीखा जाए, वह गहरे तक बैठ जाता है. इसी वजह से कहा जाता है कि बच्चों को छोटी उम्र में ही अच्छे संस्कार, अच्छी बातें और शक्तिशाली मंत्र सिखा देने चाहिए. मंत्रों का जप सिर्फ धार्मिक कर्म नहीं होता, बल्कि यह मन को शांत करता है, ध्यान बढ़ाता है और भीतर सकारात्मक ऊर्जा जगाता है. जब बच्चा मीठी, लयबद्ध आवाज़ में मंत्र बोलता है, तो वह कंपन उसके मन और शरीर दोनों को प्रभावित करता है. आइए जानते हैं ऐसे 11 शक्तिशाली मंत्र, जो हर बच्चे को जरूर सीखने चाहिए.
“सरस्वती नमस्तुभ्यं…”
यह मंत्र ज्ञान की देवी सरस्वती को समर्पित है. पढ़ाई शुरू करने से पहले बच्चे यह मंत्र बोलें, इससे एकाग्रता बढ़ती है और मन शांत होता है.
“ॐ नमः शिवाय”
बहुत सरल और शक्तिशाली मंत्र. यह शिवजी का स्मरण कराता है और मन से डर, नकारात्मकता और तनाव को दूर करता है.
“ॐ गं गणपतये नमः”
गणेश जी को बाधाओं का नाशक कहा गया है. बच्चों को यह मंत्र रोज़ बोलना चाहिए ताकि आत्मविश्वास बढ़े और पढ़ाई में आने वाली रुकावटें कम हों.
“ॐ घ्रणि सूर्याय नमः”
यह सूर्य देव का मंत्र है. इससे ऊर्जा, आत्मबल और स्वास्थ्य अच्छा रहता है. सुबह इसे बोलना बहुत लाभकारी है.
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
यह मंत्र मन को शांति देता है, भावनाओं को संतुलित करता है और बच्चों में धैर्य विकसित करता है.
महामृत्युंजय मंत्र
“ॐ त्र्यम्बकं यजामहे…”
यह बेहद शक्तिशाली मंत्र है. इससे सुरक्षा की भावना बढ़ती है और मन का भय दूर होता है. बच्चे इसे धीरे-धीरे सीख सकते हैं.
गायत्री मंत्र
“ॐ भूर भुवः स्वः…”
गायत्री मंत्र को बुद्धि का प्रकाश कहा गया है. इसे सीखने से याददाश्त मजबूत होती है और मन ज्यादा शांत रहता है.
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“कराग्रे वसते लक्ष्मी…”
सुबह उठते ही यह श्लोक बोलना चाहिए. यह बच्चों में सकारात्मकता और दिन को अच्छे तरीके से शुरू करने की आदत डालता है.
“हरे राम हरे कृष्ण…”
बहुत सरल और मधुर मंत्र. यह मन की अशांति और घबराहट को दूर करता है. बच्चे इसे खेल-खेल में भी बोल लेते हैं.
“गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु…”
यह मंत्र बच्चों में गुरु और बड़ों के प्रति सम्मान की भावना पैदा करता है. संस्कारों के लिए बहुत उपयोगी है.
“या देवी सर्वभूतेषु…”
यह देवी मंत्र बच्चों को कृतज्ञता और दया का भाव सिखाता है. इससे मन में शक्ति और आत्मविश्वास बढ़ता है.
इन मंत्रों को नियमित बोलने से बच्चे मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनते हैं और उनका व्यक्तित्व बहुत सकारात्मक विकसित होता है.
