Jaliye Surya Mandir: जलीय सूर्य मंदिर झारखंड के गिरिडीह जिले में जमुआ-देवघर मार्ग पर मिर्जागंज-जगन्नाथडीह क्षेत्र में स्थित है. यह मंदिर अपने अनोखे जलीय स्वरूप के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. तालाब के बीच स्थित होने की वजह से यह स्थान श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
कमल के आकार में अद्भुत निर्माण
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसकी अनूठी वास्तुकला है. पूरा मंदिर एक बड़े तालाब के बीचों-बीच कमल के फूल के आकार में बनाया गया है, जो देखने में बेहद आकर्षक लगता है. पानी में इसका प्रतिबिंब एक दिव्य और शांत वातावरण बनाता है. मंदिर गोलाकार संरचना में बना है और इसके चारों ओर लगभग छह समान द्वार हैं. मान्यता है कि इसे रथ के पहियों की शैली में तैयार किया गया है, जो इसकी भव्यता को और बढ़ाता है.
धार्मिक महत्व और छठ पूजा
यह मंदिर भगवान सूर्य देव (भास्कर) को समर्पित है और विशेष रूप से छठ पूजा के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाए जाने वाले इस महापर्व के अवसर पर यहां लगभग 10 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. गर्भगृह में भगवान सूर्य की प्रतिमा स्थापित है, जहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.
निर्माण इतिहास और लोकप्रियता
इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1992 में शुरू हुआ था और 2002 में यह पूरी तरह तैयार हुआ. तब से लेकर आज तक यह मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. गिरिडीह ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां दर्शन करने आते हैं.
सुविधाएं और व्यवस्था
मंदिर परिसर के पास धर्मशाला की सुविधा उपलब्ध है, जहां शादी-विवाह और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. श्रद्धालुओं के बैठने की भी उचित व्यवस्था है. मंदिर सुबह 5 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहता है, जबकि रविवार को बंद रहता है.
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जलीय सूर्य मंदिर मिर्जागंज अपनी अनोखी बनावट, धार्मिक महत्व और प्राकृतिक सुंदरता के कारण एक ऐसा स्थल है, जहां आस्था और शांति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है.
