होलिका दहन पर इन लकड़ियों को जलाना माना गया है अशुभ

Holika Dahan 2026: होलिका दहन में कुछ पवित्र पेड़ों की लकड़ी जलाना वर्जित माना गया है. धार्मिक मान्यता अनुसार ऐसा करने से दोष लग सकता है और पूजा का पूरा शुभ फल नहीं मिलता.

Holika Dahan 2026: होलिका दहन हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है. यह परंपरा प्रह्लाद की अटूट भक्ति और होलिका के अंत की याद दिलाती है. वर्ष 2026 में यह पर्व 03 मार्च को मनाया जाएगा. इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा करते हैं और अग्नि में सामग्री अर्पित कर सुख, शांति और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं.

होलिका दहन पर पूजा की परंपरा

होलिका दहन में लकड़ियों से अग्नि प्रज्वलित की जाती है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर प्रकार की लकड़ी का उपयोग उचित नहीं माना गया है. सही लकड़ी का चयन करना जरूरी होता है, क्योंकि इसका संबंध आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ा हुआ है.

हरे और जीवित पेड़ों की लकड़ी का प्रयोग न करें

होलिका दहन में कभी भी हरे और जीवित पेड़ों की लकड़ी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. हरे पेड़ जीवन का प्रतीक होते हैं और उन्हें काटना अशुभ माना जाता है. धर्म के अनुसार, जीवित पेड़ को नुकसान पहुंचाना पाप के समान माना गया है. इसलिए हमेशा सूखी और गिरी हुई लकड़ियों का ही उपयोग करना चाहिए. इससे प्रकृति की रक्षा भी होती है और पूजा का पूरा फल भी मिलता है.

पेड़ के नाम कारण / महत्व
पीपलबहुत पवित्र पेड़ माना जाता है, इसे जलाना अशुभ समझा जाता है
शमीपूजा में इस्तेमाल होने वाला पेड़ है, इसे नहीं जलाना चाहिए
आमशुभ कामों में आम के पत्ते लगाए जाते हैं, इसलिए इसकी लकड़ी न जलाएं
आंवलाधार्मिक और औषधीय महत्व वाला पेड़ है
नीमसेहत के लिए फायदेमंद और पवित्र माना जाता है
केला पूजा-पाठ में काम आता है
अशोकखुशहाली का प्रतीक माना जाता है
बेलभगवान शिव को प्रिय है, इसलिए इसे जलाने से बचें
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फल देने वाले पेड़ों की लकड़ी से बचें

धार्मिक मान्यता के अनुसार, आम, पीपल, बरगद और नीम जैसे फल और पूजनीय पेड़ों की लकड़ी होलिका दहन में नहीं जलानी चाहिए. ये पेड़ पवित्र माने जाते हैं और लोगों को जीवन देने वाले होते हैं. खासकर पीपल और बरगद में देवी-देवताओं का वास माना जाता है. इन पेड़ों की लकड़ी जलाने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और पूजा का शुभ फल कम हो सकता है.

गंदी या अशुद्ध लकड़ी का उपयोग न करें

होलिका दहन में गंदी, सड़ी-गली या कूड़े में पड़ी लकड़ियों का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए. ऐसी लकड़ियां अशुद्ध मानी जाती हैं और पूजा की पवित्रता को कम करती हैं. प्लास्टिक, रबर, कपड़ा या किसी भी तरह का कचरा भी अग्नि में नहीं डालना चाहिए. इससे वातावरण प्रदूषित होता है और धार्मिक नियमों का भी उल्लंघन होता है.

सूखी और पवित्र लकड़ी का ही करें उपयोग

होलिका दहन के लिए हमेशा सूखी, साफ और प्राकृतिक रूप से गिरी हुई लकड़ियों का ही उपयोग करना सबसे अच्छा माना जाता है. सूखी लकड़ी आसानी से जलती है और इसे शुद्ध माना जाता है. इससे पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होता. साथ ही, गोबर के उपले भी होलिका दहन में शुभ माने जाते हैं और इनका उपयोग करना अच्छा होता है.

प्रकृति और धर्म दोनों का रखें ध्यान

होलिका दहन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि यह हमें प्रकृति का सम्मान करना भी सिखाता है. सही लकड़ी का चयन करना हमारी जिम्मेदारी है. अगर हम धार्मिक नियमों का पालन करते हुए सूखी और पवित्र लकड़ियों का उपयोग करेंगे, तो पूजा का पूरा फल मिलेगा और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा. यही होलिका दहन का सही संदेश है.

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लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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