Hariyali Teej: श्रावण शुक्ल तृतीया के अवसर पर आज शनिवार को हरियाली तीज व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के पर्व के रूप में मनाया जाएगा. यह पर्व पारंपरिक उत्सव के रूप में जीवन में नए रंग भरता है और दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास व प्रगाढ़ता बढ़ाने का संदेश देता है. लोक-संस्कृति में ऐसे कई पर्व हैं, जो परिवार और जीवनसाथी की कुशलता से जुड़े हैं. हरियाली तीज भी स्त्रियों के जीवन में प्रेम-स्नेह और आपसी जुड़ाव का उत्सव है.
चार शुभ योगों के संयोग में हरियाली तीज
ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने बताया कि सावन शुक्ल तृतीया पर शनिवार को सुबह 6:30 बजे तक पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा. इसके बाद पूरे दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा. साथ ही चार शुभ योगों का संयोग बन रहा है. इस दिन शिव योग, सिद्ध योग, रवि योग और जयद योग का शुभ संयोग रहेगा. ये सभी योग शुभता प्रदान करने वाले माने जाते हैं.
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मान्यता है कि तीज के दिन व्रत और पूजन करने से सुख-समृद्धि व धन-धान्य की प्राप्ति होती है. महिलाएं हरे रंग के वस्त्र, हरी चूड़ियां, लहठी और सोलह श्रृंगार के साथ मेहंदी लगाकर भगवान गणेश, महादेव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करेंगी. व्रत और आराधना से अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि, वैभव और शांति की कामना की जाती है. मान्यता है कि इससे दांपत्य जीवन सुखमय रहता है. कई स्थानों पर इसे कजरी तीज से भी जोड़ा जाता है. मिथिलांचल में नवविवाहिताओं द्वारा किया जा रहा मधुश्रावणी व्रत भी इसी दिन संपन्न होगा.
पंचामृत से होगा शिव का अभिषेक
हरियाली तीज के दिन पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से गंगाजल और पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक किया जाएगा. इस दिन दुर्गा के 108 नामों का पाठ करना शुभ माना जाता है. परिवार की उन्नति और संतान प्राप्ति की कामना के लिए महादेव को बेलपत्र अर्पित करने तथा दुर्गा सप्तशती के 11वें अध्याय का पाठ करने की परंपरा है. कुंवारी युवतियां मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से हरियाली तीज का व्रत रखकर उमा-महेश्वर की पूजा-अर्चना करेंगी.
विभिन्न समाजों में परंपराओं का होगा निर्वहन
मैथिली समाज: मिथिला समाज में 13 दिनों से चल रहे मधुश्रावणी पर्व का समापन 15 अगस्त को होगा. मीरा झा ने बताया कि इस दिन नवविवाहिताएं टेमी दागने की रस्म निभाएंगी और सुहागिनों को सिंदूर का मंगल टीका लगाकर उनका आशीर्वाद लेंगी.
मारवाड़ी समाज: मारवाड़ी समाज में सिंधारा तीज मनाई जाएगी. महिलाएं मेहंदी लगाएंगी और विभिन्न प्रकार के पकवान बनाएंगी. बेटियों को सिंधारा भेजकर उन्हें मेहंदी लगाई जाएगी और उपहार दिए जाएंगे. विवाहित बेटियों को नई साड़ी, गहने तथा खाने-पीने की सामग्री भेंट की जाएगी.
माहेश्वरी समाज: माहेश्वरी समाज में महिलाएं भगवान गणेश की पूजा कर व्रत रखेंगी. बड़ों को कल्पना निकालकर मिठाई, वस्त्र और उपहार दिए जाएंगे. नवविवाहिताओं को ससुराल से सिंजारा मिलेगा. यह उत्सव सतूड़ी तीज तक चलेगा.
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अग्रवाल समाज: अग्रवाल समाज में हरियाली तीज बेटियों और बहुओं के प्रति स्नेह जताने का पर्व है. इस दिन घरों में झूले सजाए जाते हैं. नवविवाहिताओं को मायके और ससुराल से सिंधारा में कपड़े, श्रृंगार सामग्री, मिठाई और अन्य उपहार दिए जाते हैं.
महादेव के प्रिय पत्र-पुष्प अर्पित करने से पूरी होती है मनोकामना
- धतूरा: संतान प्राप्ति की कामना
- दूब: दीर्घायु की कामना
- बेलपत्र: मनोकामना पूर्ति
- गुड़हल: शत्रु बाधा से मुक्ति
- बेला: दांपत्य सुख
- पारिजात: ऐश्वर्य में वृद्धि
- गुलाब: सुख-समृद्धि की कामना
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