Guru Tegh Bahadur Prakash Parv: सिखों के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी का प्रकाश पर्व हर वर्ष बैसाख माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है. वर्ष 2026 में उनकी 404वीं जयंती 07 अप्रैल, मंगलवार को मनाई जा रही है. वहीं, अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार उनका जन्म 21 अप्रैल 1621 को हुआ था, इसलिए इस दिन भी विशेष रूप से उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है. यह पर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना और त्याग की प्रेरणा का प्रतीक है.
श्रद्धा और सेवा के विशेष आयोजन
गुरु तेग बहादुर जी का जन्मदिन प्रकाश पर्व के रूप में बड़े सम्मान के साथ मनाया जाता है. इस अवसर पर गुरुद्वारों में अखंड पाठ साहिब, भजन-कीर्तन, आरती और गुरु का लंगर आयोजित होता है. लंगर सेवा में सभी वर्गों के लोग समान भाव से भाग लेते हैं, जो समरसता और सेवा भावना का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है. यह पर्व समाज को एकजुटता और मानवता का संदेश देता है.
भारतीय दर्शन में गुरु जी का योगदान
भारतीय अध्यात्म और दार्शनिक चिंतन में गुरु तेग बहादुर जी का विशेष स्थान है. उनकी वाणी ने सनातन संस्कृति को नई दिशा दी. वे ब्रज भाषा (हिंदी) के महान कवि थे, जिनकी वाणी ने ब्रज बोली को एक समृद्ध भाषा का रूप दिया. उनकी रचनाएं आज भी मानव जीवन को सही मार्ग दिखाने का कार्य करती हैं और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती हैं.
अद्वितीय बलिदान और साहस की गाथा
गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान भारतीय इतिहास में अद्वितीय है. उन्होंने जबरन धर्मांतरण के खिलाफ अपनी जान न्यौछावर कर दी. उनका यह त्याग केवल एक धार्मिक संघर्ष नहीं था, बल्कि मानवाधिकारों की रक्षा का महान उदाहरण था. उन्होंने मुगल सत्ता के सामने साहस और दृढ़ता का परिचय देते हुए एक नई मिसाल कायम की. उनका यह बलिदान “हिंद की चादर” के रूप में प्रसिद्ध हुआ.
निडरता और आध्यात्मिक संदेश
गुरु जी ने अपनी वाणी में भय को सभी अवगुणों का मूल बताया. उन्होंने सिखाया कि भयमुक्त जीवन ही सच्चे धर्म का आधार है. उनकी शिक्षाएं आज भी समाज को आत्मबल और साहस प्रदान करती हैं. त्याग, सेवा और समरसता जैसे मूल्यों को उन्होंने वैश्विक स्तर पर स्थापित किया.
नशा मुक्त समाज की प्रेरणा
गुरु तेग बहादुर जी की यात्राओं का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ा. जिन स्थानों से वे गुजरे, वहां लोगों ने तंबाकू की खेती छोड़ दी और नशामुक्त जीवन अपनाया. यह उनके व्यक्तित्व और वाणी की शक्ति का प्रमाण है. आज के समय में भी उनका जीवन हमें नशा मुक्त समाज बनाने की प्रेरणा देता है.
ये भी पढ़ें: धर्म और मानवता के रक्षक, गुरु तेग बहादुर जयंती पर यहां से भेजे बधाई संदेश
आध्यात्मिकता और शौर्य का संगम
गुरु जी केवल संत ही नहीं, बल्कि वीर योद्धा भी थे. उन्होंने करतारपुर के युद्ध में अपने साहस का परिचय दिया. साथ ही, वे शास्त्रीय संगीत के ज्ञाता थे और उनकी वाणी गुरु ग्रंथ साहिब में रागों के रूप में संकलित है. उनकी वाणी में भक्ति, शक्ति और वैराग्य का अद्भुत संगम देखने को मिलता है.
