Guru Ravidas Jayanti 2026: माघ पूर्णिमा को क्यों मनाई जाती है रविदास जयंती? जानें संत शिरोमणि बनने की कहानी

Guru Ravidas Jayanti 2026: रविदास जयंती हर वर्ष माघ पूर्णिमा के दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है. संत रविदास ने अपने कर्म, विचार और भक्ति से समाज में फैली ऊंच-नीच और भेदभाव की सोच को चुनौती दी. आइए जानें इस साल किस दिन है रविदास जयंती.

Guru Ravidas Jayanti 2026: गुरु रविदास भक्ति आंदोलन का जाना-पहचाना नाम थे. हिंदू पंचांग के अनुसार रविदास जयंती माघ पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है, जो 2026 में फरवरी माह में पड़ रही है. इस साल रविवाद जयंती 1 फरवरी 2026 (रविवार) को मनाई जाएगी. यह दिन संत रविदास की समानता, भक्ति और सामाजिक न्याय की शिक्षाओं को याद करने के लिए समर्पित है.

जन्म वर्ष को लेकर संशय

गुरु रविदास (1377-1527 ई.) को रैदास, रोहिदास और रुहिदास जैसे विभिन्न नामों से जाना जाता है. वह भक्ति आंदोलन के एक प्रसिद्ध संत थे. उनके भक्ति गीतों और छंदों ने भक्ति आंदोलन पर बहुत प्रभाव डाला. इतिहासकारों के अनुसार, उनका जन्म 1377 ई. में भारत के उत्तर प्रदेश के वाराणसी के मंधुदेव में हुआ था. कुछ विद्वानों के अनुसार, गुरु रविदास का जन्म 1399 में हुआ था. इसलिए, गुरु रविदास की सही जन्म तिथि को लेकर विवाद है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, उनका जन्म माघ पूर्णिमा को हुआ था. इसलिए, हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार माघ पूर्णिमा को उनकी जयंती मनाई जाती है.

भक्ति आंदोलन के थे प्रसिद्ध संत

गुरु भक्ति आंदोलन के प्रसिद्ध संत थे. उनके भक्ति गीतों व छंदों ने भक्ति आंदोलन पर स्थाई प्रभाव डाला था. महान संत गुरु रविदास को और उनके योगदान को आज भी दुनिया याद करती है और उनके सम्मान में हर साल रविदास जयंती का पर्व मनाया जाता है.

कैसे बने संत शिरोमणि

पारिवारिक पृष्ठभूमि

संत रविदास का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था. वे पारंपरिक रूप से जूते-चप्पल बनाने का कार्य करते थे और बचपन से ही सरल जीवन जीते थे.

समाज से संघर्ष

उस दौर में जातिगत भेदभाव बहुत गहरा था. संत रविदास को सामाजिक उपेक्षा और भेदभाव का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हिंसा या द्वेष का रास्ता नहीं अपनाया.

कर्म और भक्ति

उन्होंने कर्म को ही सच्ची भक्ति बताया. मेहनत के साथ ईश्वर स्मरण और नैतिक जीवन को उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग बनाया.

शिष्यों का बढ़ना

उनके विचारों से कई लोग प्रभावित हुए. धीरे-धीरे उनके शिष्यों और अनुयायियों की संख्या बढ़ती गई और वे एक प्रभावशाली संत के रूप में पहचाने जाने लगे.

सामाजिक प्रभाव

समानता, मानव गरिमा और भक्ति के संदेश के कारण समाज में उनका विशेष स्थान बना. इन्हीं योगदानों के चलते वे “संत शिरोमणि” कहलाए.

रविदास जयंती क्यों मनाते हैं?

रविदास जयंती संत रविदास की जन्मतिथि के उपलक्ष्य में मनाई जाती है. यह दिन उनके द्वारा दिए गए समानता, भक्ति और सामाजिक न्याय के संदेशों को याद करने और अपनाने के लिए मनाया जाता है.

संत रविदास किस आंदोलन से जुड़े थे?

संत रविदास भक्ति आंदोलन से जुड़े थे. उन्होंने ईश्वर भक्ति के माध्यम से जाति-भेद, ऊँच-नीच और सामाजिक असमानता का विरोध किया.

संत रविदास के प्रमुख उपदेश थे

  • सभी मनुष्य समान हैं
  • सच्ची भक्ति कर्म और आचरण से होती है
  • जाति और जन्म से नहीं, कर्म से महानता मिलती है

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लेखक के बारे में

Published by: Shaurya Punj

शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.

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