Guru Purnima 2025: गुरु का शब्द नहीं, बल्कि मौन ही ईश्वर की भाषा है

Guru Purnima 2025: गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु की महिमा और उनके मौन ज्ञान को समर्पित है. गुरु का मौन केवल शांति नहीं, बल्कि ईश्वर की सच्ची वाणी होता है. इस दिन शिष्य अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं और आत्मिक विकास की दिशा में एक नया संकल्प लेते हैं.

लेखिका : नेहा प्रकाश

Guru Purnima 2025: गुरु वह अनन्त द्वार हैं जिसके माध्यम से ईश्वर हमारे जीवन में प्रवेश करते हैं. तथा यदि हम अपनी इच्छा और चेतना को गुरु के साथ समस्वर नहीं करते हैं तो सम्भवतः ईश्वर भी हमारी सहायता नहीं कर सकते. आजकल लोग ऐसा मानते हैं कि शिष्यत्व स्वेच्छापूर्वक गुरु को अपनी स्वतंत्र इच्छाशक्ति समर्पित करने के समान है. परन्तु गुरु की सार्वभौमिक करुणा के प्रति निष्ठा निश्चित रूप से दुर्बलता का प्रतीक नहीं है.

मानव जीवन और इच्छाशक्ति का प्रयोग

स्वामी श्रीयुक्तेश्वरजी ने कहा था, “इच्छा की स्वतन्त्रता पूर्वजन्म और जन्मोत्तर की आदतों या मानसिक भावनाओं के अनुसार कार्य करने में निहित नहीं है.” परन्तु, सामान्य मनुष्य अपना दैनिक जीवन वस्तुतः अपनी इच्छाशक्ति का रचनात्मक प्रयोग किए बिना ही व्यतीत करते हैं—संकट में, दुःख में और यहाँ तक कि आनन्द में भी. स्वतन्त्रता का वास्तविक अर्थ है अपने अहंकार से मुक्त जीवन जीना. यह तभी सम्भव है जब हम अनन्त ज्ञान, सर्वसमावेशी चेतना, सर्वव्यापी प्रेम पर ध्यान करते हैं; जिसे शिष्य एक सच्चे गुरु की शिक्षाओं के माध्यम से अनुभव कर सकते हैं. “गुरु” शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है : “गु” का अर्थ है अन्धकार, और “रु” का अर्थ है समाप्त करना या भंग करना. गुरु जन्म-जन्मान्तर तक हमारे हाथों को थामे रखते हैं जब तक कि हम माया की अन्धकारपूर्ण गलियों को पार कर अपने वास्तविक निवास अर्थात् आत्मज्ञान में स्थित होकर सुरक्षित नहीं हो जाते.

गहन आत्मिक लालसा और ईश्वर की प्रतिक्रिया

तो कोई व्यक्ति सच्चे गुरु को कैसे प्राप्त कर सकता है? ऐसा कहा जाता है कि गुरु को हम नहीं खोजते हैं, अपितु स्वयं गुरु ही हमें खोज लेते हैं. जब सर्वोच्च सत्य को प्राप्त करने की हमारी लालसा अत्यधिक तीव्र हो जाती है, तो ईश्वर हमें आत्म-साक्षात्कार की चुनौतीपूर्ण यात्रा पर प्रगति करने हेतु मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए एक ईश्वरीय माध्यम अर्थात् गुरु को भेजकर प्रत्युत्तर देते हैं. ऐसे गुरु ईश्वर के द्वारा निर्धारित होते हैं. वे ईश्वर के साथ एकाकार होते हैं और उन्हें धरती पर ईश्वर के एक प्रतिनिधि के रूप में उपदेश देने की ईश्वरीय स्वीकृति प्राप्त होती है. गुरु मौन ईश्वर की अभिव्यक्त वाणी हैं. माया के सागर को पार करने के लिए शिष्य गुरु-प्रदत्त साधना का अनुसरण करके ज्ञान की अपनी जीवनरक्षक नाव का निर्माण करता है.

श्री श्री परमहंस योगानन्द एक ऐसे ही सच्चे गुरु थे जो दिव्य गुरुओं की परम्परा से थे और जिन्होंने सम्पूर्ण विश्व में क्रियायोग मार्ग के ज्ञान का प्रसार करने की दिशा में कार्य किया. क्रियायोग आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करने के सर्वोच्च मार्गों में से एक है. अपने आध्यात्मिक गौरव ग्रन्थ, “योगी कथामृत” में, जिसने लाखों व्यक्तियों के जीवन को उन्नत किया है, योगानन्दजी लिखते हैं कि क्रियायोग एक मनोदैहिक प्रणाली है जिसके द्वारा मानव रक्त को कार्बन से मुक्त और ऑक्सीजन से संचारित किया जाता है. इस अतिरिक्त ऑक्सीजन के परमाणु प्राणधारा में परिणत हो जाते हैं जिसके द्वारा योगी ऊतकों के क्षय को नियन्त्रित और यहाँ तक कि रोक भी सकता है.

आध्यात्मिक प्रगति की ऐसी शक्तिशाली पद्धति को मानवजाति के साथ साझा करना आवश्यक था और इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए योगानन्दजी ने अपने गुरु स्वामी श्रीयुक्तेश्वरजी के आदेश से सन् 1917 में राँची में योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया (वाईएसएस) और सन् 1920 में लॉस एंजेलिस में सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फ़ेलोशिप (एसआरएफ) की स्थापना की.

सत्य के साधकों के लिए एसआरएफ और वाईएसएस से आत्म-साक्षात्कार गृह-अध्ययन पाठमाला के माध्यम से क्रियायोग की शिक्षाएं उपलब्ध हैं.

ऐसा माना जाता है कि यदि किसी श्रद्धावान् व्यक्ति की लालसा गहन और ईश्वर को जानने की तड़प अथक है, तो एक सच्चे गुरु स्वयं ही अपने शिष्य का मार्गदर्शन करने के लिए आते हैं. यह एक सच्चे गुरु का दिव्य वचन है. गुरु चाहे भौतिक शरीर में हों या न हों, वे सदैव उस शिष्य के निकट रहते हैं जो उनके साथ समस्वर होता है, क्योंकि एक सच्चे गुरु की चेतना शाश्वत होती है. सन्त कबीर के शब्दों में, “वह शिष्य अत्यन्त सौभाग्यशाली होता है जिसने एक सच्चे गुरु को खोज लिया है!”

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लेखक के बारे में

Author: Shaurya Punj

शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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