Gita Jayanti 2025: गीता सिर्फ ज्ञान नहीं, एक संपूर्ण जीवन-शैली है

Gita Jayanti 2025: गीता सिर्फ एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की संपूर्ण कला है. यह हमें मानसिक संतुलन, सही निर्णय, कर्म, भक्ति और आत्मिक शांति का मार्ग दिखाती है. आधुनिक जीवन की चुनौतियों के बीच गीता का शाश्वत संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक और मार्गदर्शक है.

Gita Jayanti 2025: श्रीमद्भगवद्गीता को अक्सर महाभारत के युद्ध से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसका संदेश इससे कहीं व्यापक है. गीता बताती है कि असली युद्ध हर इंसान के भीतर चल रहा है—अच्छाई और बुराई, विवेक और इंद्रिय-प्रेरित मन के बीच होने वाला निरंतर संघर्ष.

योगानन्दजी की अनोखी व्याख्या

मशहूर पुस्तक ‘ईश्वर-अर्जुन संवाद : श्रीमद्भगवद्गीता’ में इसी विषय को अद्भुत विस्तार से समझाया गया है. यह ग्रंथ महान योगी परमहंस योगानन्द द्वारा लिखा गया है—वही योगानन्द, जिनकी आध्यात्मिक क्लासिक ‘योगी कथामृत’ दुनिया भर में प्रसिद्ध है. दो विशाल खंडों में प्रस्तुत इस पुस्तक में गीता के पहले ही श्लोक की लगभग 40 पन्नों की विस्तृत व्याख्या है, जो पाठक को आध्यात्मिक स्तर पर झकझोर देती है.

“गीता हर साधक के मार्ग को रोशन करती है”

योगानन्दजी लिखते हैं—“ईश्वर की ओर वापसी के मार्ग पर व्यक्ति कहीं भी खड़ा हो, गीता उसके पथ को रोशन कर देती है.” उनके शिष्य बताते हैं कि जब वे इस पुस्तक की रचना कर रहे थे, तब उनका कमरा मानो आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता था—“वह वातावरण ईश्वर से सीधे जुड़ने जैसा था.”

“परमात्मा का गीत”—हर स्तर पर लागू

गीता का अर्थ ही है “परमात्मा का गीत”—मनुष्य (अर्जुन) और परमात्मा (कृष्ण) के बीच वह दिव्य वार्तालाप, जिसमें आत्मा को सत्य का ज्ञान मिलता है. यह केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि एक ऐसी शिक्षा है जो शरीर, मन और आत्मा—तीनों को मार्ग दिखाती है. इसलिए गीता को जीवन की शैली के रूप में अपनाना ही उसका वास्तविक संदेश है.

ईश्वर समर्पण और दुखों से मुक्ति

गीता में कृष्ण कहते हैं—“मुझे पूर्ण निष्ठा से अपना लो, मैं तुम्हें दुखों के सागर से पार कर दूँगा.” (गीता 12:7), यह संदेश बताता है कि ईश्वर को पाने का मार्ग समर्पण, भक्ति और अपने कष्टों को त्यागने में है.

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क्रियायोग: प्राणशक्ति पर नियंत्रण की कला

चौथे अध्याय के 29वें श्लोक में कृष्ण एक उच्च आध्यात्मिक साधना—क्रियायोग—का उल्लेख करते हैं. इसमें साधक अपनी अंदर-बाहर की श्वास (प्राण और अपान) को एक-दूसरे में “हवन” करता है. नियमित अभ्यास से सांस की प्रक्रिया शांत होती जाती है और योगी प्राणशक्ति पर सचेत नियंत्रण प्राप्त कर लेता है. यही उसे गहरे आनंद और ईश्वर-साक्षात्कार की ओर ले जाता है. इच्छुक साधक प्राणायाम की इस सूक्ष्म एवं प्रभावकारी क्रियायोग की वैज्ञानिक प्रविधि को सीखने के लिए योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इण्डिया से संपर्क कर एक गृह अध्ययन पाठ्यक्रम में प्रवेश पा सकते हैं. इस विषय में अधिक जानकारी के लिए आप yssofindia.org देख सकते हैं.

इस वर्ष गीता-दिवस के उपलक्ष्य में ब्रह्माण्ड के संपूर्ण ज्ञान को समेटने वाली गीता को अपनी चेतना में समाहित कर आइए प्रीतिदिन इसका अध्ययन-मनन करने के संकल्प के साथ श्रीकृष्ण के आश्वासन ‘जो भक्त अनन्य भाव से केवल मेरी शरण में रहते हैं और मेरा ध्यान करते हैं, उनके योग (आध्यात्मिक संरक्षण) और क्षेम (भौतिक संरक्षण) को मैं वहन करता हूँ (भगवद्गीता-9:22), को अंगीकार करें.

लेखिका
डॉ (श्रीमती) मंजु लता गुप्ता

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लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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