इस दिन है फाल्गुन पूर्णिमा, नोट कर लें पूजा की सामग्री और विधि

Falgun Purnima 2026: 2 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा तिथि है. यह दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए सबसे शुभ माना जाता है. इस दिन विधि-विधान से की गई पूजा जन्म-जन्मांतर का पुण्य प्रदान करती है. यहां जानें पूजा में इस्तेमाल होने वाली जरूरी सामग्रियों और पूजा विधि के बारे में.

Falgun Purnima 2026: सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा की जाती है. मान्यता है कि पूर्णिमा तिथि के दिन किया गया गंगास्नान, दान, पूजा-पाठ और मंत्र जाप अन्य दिनों की तुलना में अधिक प्रभावशाली और पुण्यदायक होता है. हर महीने पूर्णिमा तिथि आती है, फाल्गुन महीने में पड़ने वाली पूर्णिमा को फाल्गुन पूर्णिमा कहा जाता है. हर साल इस दिन होलिका दहन किया जाता है, जो इस तिथि के महत्व को और अधिक बढ़ा देता है.

फाल्गुन पूर्णिमा 2026 तिथि और भद्रा काल

फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत 2 मार्च 2026 को किया जाएगा.

  • फाल्गुन पूर्णिमा तिथि शुरू — 02 मार्च 2026, सोमवार को सुबह 05:19 बजे
  • फाल्गुन पूर्णिमा तिथि समाप्त — 03 मार्च 2026, मंगलवार को सुबह 04:33 बजे
  • भद्रा काल प्रारंभ — 02 मार्च 2026, सोमवार को सुबह 05:18 बजे
  • भद्रा काल समाप्त — 02 मार्च 2026, सोमवार को शाम 04:56 बजे

फाल्गुन पूर्णिमा पूजा सामग्री

  • कलश: तांबे या पीतल का लोटा
  • पंचामृत: दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल
  • अक्षत: बिना टूटे हुए चावल
  • फल और फूल: पीले पुष्प और मौसमी फल (विशेषकर केला)
  • नैवेद्य: पंजीरी या गुड़-चना
  • अर्पित करने की सामग्री: रोली, कुमकुम, चंदन, धूप-दीप, कपूर और तुलसी के पत्ते

फाल्गुन पूर्णिमा पूजा विधि

संकल्प: पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें.

चौकी स्थापित करें: एक लकड़ी की चौकी लें और उस पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें.

अर्पित करें ये चीजें: अक्षत, चंदन, धूप-बत्ती, दूर्वा, फल-फूल, तुलसी और भोग अर्पित करें.

मंत्र जाप और व्रत कथा: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें. इसके बाद व्रत कथा का पाठ करें.

आरती करें: खड़े होकर कपूर जलाएं और भगवान की आरती करें.

चंद्र दर्शन: शाम को चंद्रमा निकलने पर अर्घ्य दें. जल में थोड़ा कच्चा दूध और अक्षत मिलाकर चंद्रमा को अर्पित करें.

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By Neha kumari

नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.

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