Chaitra Pradosh Vrat 2026: हर महीने शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव की कृपा पाने के लिए ‘प्रदोष व्रत’ रखा जाता है. साल 2026 में चैत्र माह का अंतिम प्रदोष व्रत 30 मार्च, सोमवार को है. सोमवार को होने के कारण इसे ‘सोम प्रदोष व्रत’ कहा जाएगा, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जाता है. आइए जानते हैं इस दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं.
चैत्र सोम प्रदोष व्रत 2026: शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस बार त्रयोदशी तिथि का संयोग सोमवार को बन रहा है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है.
- त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 30 मार्च 2026, सुबह 07:09 बजे से
- त्रयोदशी तिथि समाप्त: 31 मार्च 2026, सुबह 06:55 बजे तक
- प्रदोष काल (पूजा का समय): शाम 06:38 बजे से रात 08:57 बजे तक
सोम प्रदोष व्रत के दिन क्या करें?
- जल्दी उठें और स्नान करें: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें.
- संकल्प लें: हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प करें.
- शिवलिंग का अभिषेक: प्रदोष काल में भगवान शिव का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें.
- बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें: महादेव को प्रिय बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और भस्म अर्पित करें.
- दान करें: इस दिन सफेद वस्तुओं जैसे चावल, दूध, चीनी या सफेद कपड़े का दान करना शुभ माना जाता है.
- मंत्र जाप करें: ‘ॐ नमः शिवाय’ और महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर मानसिक या स्पष्ट जाप करें.
- सात्विक आहार लें: इस दिन केवल सात्विक भोजन का सेवन करें.
सोम प्रदोष व्रत के दिन क्या न करें?
- तामसिक भोजन से बचें: प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा या किसी भी नशीले पदार्थ का सेवन न करें.
- क्रोध और वाद-विवाद से दूर रहें: मन को शांत रखें, किसी को अपशब्द न कहें और घर में झगड़ा न करें.
- दिन में सोने से बचें: व्रत के दौरान दिन में सोना उचित नहीं माना जाता; समय शिव भक्ति और भजन-कीर्तन में बिताएं.
- अशुद्धता से बचें: पूजा के दौरान मन और शरीर की शुद्धता बनाए रखें. बिना स्नान किए शिवलिंग को स्पर्श न करें.
- नमक का सेवन: यदि आप पूर्ण उपवास कर रहे हैं, तो सामान्य नमक का प्रयोग न करें. आवश्यकता होने पर सेंधा नमक या फलाहार ले सकते हैं.
ज्योतिषीय महत्व
30 मार्च 2026 को पड़ने वाला सोम प्रदोष व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है, जिनकी कुंडली में चंद्र दोष है या जो मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं. चूंकि सोमवार चंद्रमा का दिन है और भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया है, इस दिन उनकी पूजा करने से मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.
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