चैत्र अमावस्या के दिन करें ये उपाय, दूर होगा कालसर्प दोष

Chaitra Amavasya 2026: चैत्र मास में पड़ने वाली अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या या चैत्र अमावस्या कहा जाता है. यदि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है, तो इस तिथि पर उसके निवारण के लिए उपाय करना बेहद शुभ माना जाता है. आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा से कि इस दिन किन उपायों को करना चाहिए.

Chaitra Amavasya 2026: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का खास महत्व है. इस दिन पितरों का तर्पण, पवित्र नदियों में स्नान, दान और मंत्रोच्चारण सहित अन्य धार्मिक कार्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा भी की जाती है. मान्यता है कि इस दिन किए गए हर पुण्य कार्य और उपाय अन्य दिनों की तुलना में अधिक प्रभावशाली और लाभदायक होते हैं. यदि आप कालसर्प दोष से पीड़ित हैं, तो उसके निवारण के लिए यह दिन सर्वोत्तम माना जाता है.

कालसर्प दोष क्या है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब कुंडली में सभी सात मुख्य ग्रह (सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि) राहु और केतु के बीच आ जाते हैं, तब कालसर्प दोष का निर्माण होता है. माना जाता है कि इस स्थिति के कारण व्यक्ति को आर्थिक तंगी, संतान संबंधी कष्ट, मानसिक तनाव और कार्यों में बार-बार बाधाओं का सामना करना पड़ता है.

कालसर्प दोष निवारण के उपाय

चांदी के नाग-नागिन का दान

अमावस्या के दिन चांदी के बने नाग-नागिन के जोड़े की पूजा करें. पूजा के बाद इन्हें बहती नदी में प्रवाहित कर दें. मान्यता है कि ऐसा करने से राहु और केतु का नकारात्मक प्रभाव कम होता है.

भगवान शिव का रुद्राभिषेक

कालसर्प दोष से राहत के लिए भगवान शिव की आराधना करना बेहद फलदायक माना जाता है. इस दिन शिव मंदिर में जाकर ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जाप करें और दूध व गंगाजल से महादेव का अभिषेक करें. इसके अलावा, यदि संभव हो तो शिवलिंग पर चांदी के नाग अर्पित करें. कहा जाता है कि इससे कालसर्प दोष का प्रभाव कम होता है.

पीपल वृक्ष की पूजा

अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ में देवताओं और पितरों का वास माना जाता है. शाम के समय पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और पेड़ की सात बार परिक्रमा करें. यह उपाय न केवल कालसर्प दोष, बल्कि पितृ दोष से भी राहत दिलाने में मदद करता है.

मंत्रों का जाप

कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए मंत्रों का उच्चारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है. नियमित रूप से मंत्रों का जाप करना अधिक लाभदायक होता है.

  • राहु मंत्र: ॐ रां राहवे नमः
  • केतु मंत्र: ॐ कें केतवे नमः
  • सर्प मंत्र: ॐ नवकुलाय विद्यमहे विषदंताय धीमहि तन्नः सर्पः प्रचोदयात्

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लेखक के बारे में

Published by: Neha kumari

नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.

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