Budh Pradosh Vrat 2026: वैशाख कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत कल 15 अप्रैल दिन बुधवार को रखा जाएगा. यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है. जब यह व्रत बुधवार के दिन पड़ता है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है. इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. महावीर पंचांग के अनुसार, 15 अप्रैल को प्रदोष व्रत तथा मासिक शिवरात्रि व्रत किया जाएगा.
Budh Pradosh Vrat 2026: बुध प्रदोष व्रत की तिथि
- वैशाख कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि प्रारंभ रात 09 बजकर 05 मिनट पर
- वैशाख कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि समाप्त रात 08 बजकर 12 मिनट पर
- प्रदोष काल पूजा मुहूर्त के आधार पर प्रदोष व्रत 15 अप्रैल बुधवार को रखा जाएगा.
नक्षत्र: पूर्व भाद्रपद नक्षत्र दोपहर 01 बजकर 06 मिनट तक, उसके बाद उत्तर भाद्रपद नक्षत्र
योग: ब्रह्म योग सुबह 11 बजकर 22 मिनट तक, उसके बाद ऐंद्र योग प्रारंभ
चंद्रमा: कुम्भ राशि में प्रात: 07 बजकर 05 मिनट तक रहेंगे, इसके बाद मीन राशि में गोचर करेंगे.
प्रदोष व्रत पारण का समय
प्रदोष व्रत का पारण अगले दिन 16 अप्रैल दिन गुरुवार को चतुर्दशी तिथि में करना शुभ रहेगा. 16 अप्रैल को सूर्योदय के बाद भगवान शिव का स्मरण कर व्रत का पारण कर सकते हैं.
बुध प्रदोष व्रत पूजा शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार 15 अप्रैल को बुध प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त (सूर्यास्त से) शाम 06 बजकर 06 मिनट से रात के 8 बजकर 12 मिनट तक मान्य है.
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 03 बजकर 57 मिनट से 04 बजकर 41 मिनट तक रहेगा.
बुध प्रदोष व्रत पूजा विधि
- प्रदोष व्रत के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें.
- इसके बाद व्रत का संकल्प लें और भगवान शिव का ध्यान करें.
- पूरे दिन उपवास रखें और मन को शांत व सकारात्मक रखें.
- दिनभर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें.
- शाम के समय प्रदोष काल में पूजा की तैयारी करें.
- पूजा स्थान को साफ करके वहां शिवलिंग स्थापित करें.
- अगर आप चाहे तो शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग को जल से साफ करें.
- शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और फूल अर्पित करें.
- इसके बाद धूप-दीप जलाकर भगवान शिव की आरती करें.
- शिव चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें और प्रदोष व्रत कथा सुनें या पढ़ें.
- अंत में प्रसाद बांटें और गरीब या जरूरतमंदों को दान करें.
