Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी पर दुर्लभ गजकेसरी योग, विद्यार्थियों की चमकेगी किस्मत, इस दिन भूलकर भी न करें ये काम

Basant Panchami 2026: इस वर्ष बसंत पंचमी के पर्व बेहद खास होने वाला है. कई दुर्लभ संयोग भी हो रहे हैं. तो वैसे में आइए, ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु: जी से जानते हैं कि पुण्य फल की प्राप्ति के लिए क्या उपाय करने चाहिए और किन गलतियों से बचना चाहिए.

बसंत पंचमी 2026

Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी 23 जनवरी 2026 दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस बार बसंत पंचमी के दिन चंद्रमा से चतुर्थ भाव में गुरु ग्रह की स्थिति होने के कारण ‘गजकेसरी योग’ का निर्माण हो रहा है. सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में इस दुर्लभ संयोग को सुख-समृद्धि, सफलता और बौद्धिक उन्नति के लिए अत्यंत शुभ माना गया है. आइए, ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु: जी से जानते हैं कि पुण्य फल की प्राप्ति के लिए इस दिन कौन से विशेष उपाय करने चाहिए और किन गलतियों से बचना चाहिए.

सरस्वती पूजा 2026 शुभ मुहूर्त

बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी 2026 दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा.

बसंत पंचमी तिथि प्रारंभ: 22 जनवरी 2026 दिन गुरुवार की रात 01 बजकर 18 मिनट पर
बसंत पंचमी तिथि समाप्त: 23-24 जनवरी 2026 की रात 12 बजकर 08 मिनट पर
सरस्वती पूजा शुभ मुहूर्त: सुबह 07 बजकर 58 मिनट से सुबह 10 बजकर 40 मिनट तक

गजकेसरी योग कैसे बनता है?

जब कुंडली में चंद्रमा और बृहस्पति एक-दूसरे से केंद्र 1, 4, 7 या 10वें भाव में स्थित होते हैं तब गजकेसरी योग का निर्माण होता है. 23 जनवरी 2026 बसंत पंचमी के दिन चंद्रमा का गोचर मीन राशि में और गुरु मिथुन राशि में है. इस दौरान चंद्रमा से चतुर्थ भाव में गुरु की उपस्थिति के कारण ‘गजकेसरी योग’ बन रहा है. ज्योतिष शास्त्र में गुरु को ज्ञान और चन्द्रमा को मन का कारक माना जाता है. बसंत पंचमी के दिन इस योग के बनने से विद्यार्थियों का मन प्रसन्न रहेगा और उन्हें जीवन में अपार सफलता मिलने के योग बनेंगे.

बसंत पंचमी के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां

बसंत पंचमी के दिन काले या गहरे रंग के वस्त्र न पहनें

इस दिन काले, नीले या गहरे रंग का कपड़ा पहनना अशुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार काले रंग से नाकारात्मक उर्जा आता है. पीले रंग को माता सरस्वती का प्रिय है. पीले रंग ज्ञान का प्रतीक और सफेद रंग को शांति का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन पिला और सफेद कपड़ा पहनना अत्यंत शुभ होता है.

पेड़-पौधों को नुकसान न पहुंचाए

बसंत पंचमी के साथ ही बसंत ऋतु की शुरुआत होती है. जिससे प्राकृतिक सौंदर्य में निखार आ जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भूलकर भी पेड़-पौधों को नहीं काटना चाहिए और न ही उनके पत्ते तोड़ने चाहिए. ऐसा करना प्रकृति का अपमान माना जाता है, जिससे माता सरस्वती नाराज हो सकती हैं. शास्त्रों के अनुसार, प्रकृति को नुकसान पहुंचाने से ज्ञान और बुद्धि का नाश होता है.

बसंत पंचमी के दिन तामसिक भोजन करने से बचना चाहिए

बसंत पंचमी के दिन मांस, मदिरा या तामसिक भोजन करने से बचना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन तामसिक भोजन कर पूजा करने से उसका पुण्य फल प्राप्त नहीं होता और मन में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है.

वाणी पर नियंत्रण रखें

मां सरस्वती वाणी का देवी हैं, इसलिए इस दिन किसी को कठोर शब्द न बोलें. अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें. इस दिन मधुर भाषा का प्रयोग करें और किसी भी विवाद से दूर रहें.

शिक्षा सामग्री का अपमान न करें

यह दिन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि आज के दिन किताबों, कलम या वाद्य यंत्रों को अनादर माता सरस्वती का अनादर माना जाता है. इसलिए पुस्तकों कलम और वाद्य यंत्रों को साफ-सुथरा जगह पर रखनी चाहिए और पूजा करनी चाहिए.

बसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन न करें

बसंत पंचमी अत्यंत पवित्र और पावन पर्व है. इस दिन स्नान और पूजा से पहले कुछ भी नहीं खाना चाहिए. पहले स्नान कर मां सरस्वती का पूजा करने के बाद ही कुछ खाना चाहिए.

बसंत पंचमी पर ‘गजकेसरी योग’ का दुर्लभ संयोग पर करे ये सरल उपाय

  • अपनी शिक्षण सामग्री कलम, किताब और कॉपी पर हल्दी लगाकर माता सरस्वती के चरण में रखें. पूजा के बाद इससे पढाई शुरू करें.
  • मां सरस्वती को पीले और सफेद फूल चढ़ाएं. इससे कुंडली में गुरु और चंद्रमा मजबूत होगी
  • धन और सुख-समृद्धि के लिए अपने माथे, कंठ और नाभि पर केसर का तिलक लगाएं.
  • मां लक्ष्मी की आराधना के साथ ‘श्री सूक्त’ का पाठ करें.
  • चंद्रमा और गुरु को मजबूत करने के लिए दूध में केसर मिलाकर भगवान विष्णु को भोग लगाएं और स्वयं भी ग्रहण करें.
  • गुरुजनों और माता-पिता के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें.

इन मंत्रों का करें जाप

“ॐ ऐं क्लीं वाचस्पतये नमः” का 108 बार जाप करें. इससे मां सरस्वती और देव गुरु बृहस्पति का आशीर्वाद प्राप्त होगा.
“ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः”
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वत्यै नमः”
“सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी। विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥”

Also Read:- Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी पर 5 शक्तिशाली राजयोग सक्रिय, जानें सरस्वती पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री और आरती

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Ranjan Kumar

दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज़्म, दिल्ली विश्वविद्यालय से मास्टर्स. वर्तमान में प्रभात खबर में धर्म और राशिफल बीट पर काम कर रहे हैं, जहां गंभीर विषयों को सरल और प्रभावी शैली में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं. राजनीति, सिनेमा और हेल्थ विषयों पर पैनी पकड़. गहरी रिसर्च आधारित लेखन सीखने का प्रयास जारी है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >