Sheetala Ashtami 2026: हिंदू धर्म में शीतला माता को स्वच्छता और शीतलता की देवी माना जाता है. कहा जाता है कि माता शीतला स्वयं माता पार्वती का अवतार हैं. मान्यता है कि माता की आराधना से चेचक, खसरा और त्वचा रोग समेत अन्य बीमारियों से मुक्ति मिलती है. अन्य देवी-देवता जहाँ अपने हाथों में कोमल फूल और अस्त्र रखते हैं, वहीं शीतला माता के हाथों में झाड़ू, सूप, कलश और नीम रहते हैं. इसे देखकर मन में सवाल उठता है कि माता अपने हाथों में ये वस्तुएं क्यों रखती हैं और इनका क्या महत्व है. आइए इस आर्टिकल के माध्यम से जानते हैं इसके पीछे छिपे महत्व के बारे में.
शीतला माता के हाथों में झाड़ू क्यों होती है?
शास्त्रों के अनुसार, माता शीतला के हाथों में झाड़ू यह संदेश देती है कि जहां स्वच्छता होगी, वहीं स्वास्थ्य का वास होगा. झाड़ू का उपयोग गंदगी को साफ करने के लिए किया जाता है. माता शीतला अपने भक्तों को यह सिखाती हैं कि रोगों से बचने का पहला कदम अपने परिवेश को स्वच्छ रखना है.
माता के हाथों में रखा नीम क्या दर्शाता है?
नीम को ‘सर्व रोग निवारक’ माना जाता है. यह जीवन के कठिन सत्य को स्वीकार करने और कड़वाहट के माध्यम से रोगों और बुराइयों को नष्ट करने की शक्ति का प्रतीक है. नीम प्राकृतिक एंटी-सेप्टिक, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल औषधि है. संक्रमण के समय हवा को शुद्ध करने और त्वचा रोगों को ठीक करने के लिए नीम का सदियों से प्रयोग किया जाता रहा है.
सूप क्या दर्शाता है?
माता शीतला के हाथ में सूप होता है, जिसका उपयोग अनाज साफ करने के लिए किया जाता है. यह हमें यह सिखाता है कि हमें अपने जीवन से नकारात्मक विचारों और अशुद्धता को छानकर बाहर करना चाहिए और केवल शुद्धता को अपनाना चाहिए.
माता के हाथों का कलश किस चीज का प्रतीक है?
कलश को ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है. इसमें मौजूद जल शांति और शीतलता प्रदान करता है. पूजा के दौरान इस कलश के जल का छिड़काव घर की शुद्धि के लिए किया जाता है.
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