Vaishakh Purnima 2026: वैशाख पूर्णिमा को ‘बुद्ध पूर्णिमा’ के रूप में भी जाना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल की रात 9:12 बजे से शुरू होकर 1 मई की रात 10:52 बजे तक रहेगी. उदया तिथि के अनुसार आज, 1 मई को ही बुद्ध जयंती का पावन पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. यह गौतम बुद्ध द्वारा सिखाए गए ‘अहिंसा परमो धर्मः’ के मार्ग को याद करने का दिन है.
पौराणिक कथा
अंगुलिमाल के आतंक से आत्मज्ञान तक का सफर
प्राचीन समय में मगध के जंगलों में ‘अंगुलिमाल’ नाम का एक खूंखार डाकू रहता था. उसने प्रतिज्ञा की थी कि वह एक हजार लोगों की हत्या कर उनकी उंगलियों की माला पहनेगा. उसके डर से लोगों ने उस रास्ते से गुजरना बंद कर दिया था.
बुद्ध और अंगुलिमाल की मुलाकात
एक दिन महात्मा बुद्ध उसी जंगल की ओर निकल पड़े. गांव वालों ने उन्हें बहुत रोका, लेकिन बुद्ध मंद मुस्कान के साथ आगे बढ़ गए. जब अंगुलिमाल ने बुद्ध को देखा, तो वह हाथ में तलवार लेकर उनके पीछे दौड़ा. बुद्ध शांति से चलते रहे. अंगुलिमाल चिल्लाया, “ठहर जा संन्यासी!” बुद्ध रुके और शांत भाव से बोले, “मैं तो ठहर गया, पर तुम कब ठहरोगे?”
पेड़ की पत्ती और जीवन का सत्य
अंगुलिमाल बुद्ध की निर्भयता देखकर चकित रह गया. बुद्ध ने उससे कहा, “यदि तुम स्वयं को शक्तिशाली समझते हो, तो सामने वाले पेड़ से चार पत्तियां तोड़ लाओ.” अंगुलिमाल ने तुरंत पत्तियां तोड़ दीं. तब बुद्ध ने कहा, “अब इन्हें वापस उसी डाल पर जोड़ दो.”अंगुलिमाल हंसकर बोला, “यह तो असंभव है, जो टूट गया वह जुड़ नहीं सकता.”
बुद्ध ने गंभीरता से कहा, “जब तुम किसी को जोड़ नहीं सकते, जब तुम किसी को जीवन नहीं दे सकते, तो तुम्हें उसे मिटाने या तोड़ने का अधिकार किसने दिया?” यह सुनकर अंगुलिमाल की आंखें खुल गईं. उसे अहसास हुआ कि असली शक्ति विनाश में नहीं, बल्कि सृजन और करुणा में है. उसने बुद्ध के चरणों में अपनी तलवार रख दी और उनका शिष्य बन गया.
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