संजीव मिश्रा, देवघर
Baba Baidyanath Dham: झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम की कई परंपराएं अपने आप में अनोखी और आस्था से जुड़ी हैं. इन्हीं में से एक है बाबा बैद्यनाथ मंदिर और मां पार्वती मंदिर के शिखरों के बीच बंधा लाल धागा. आखिर दोनों मंदिरों के बीच यह पवित्र धागा क्यों बांधा जाता है और इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता है? जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर.
दो मंदिरों के शिखरों को जोड़ता है लाल धागा
बाबा बैद्यनाथ मंदिर और मां पार्वती मंदिर के शिखरों को एक लाल धागे से जोड़ा गया है. दूर से देखने पर यह धागा सामान्य लग सकता है, लेकिन धार्मिक दृष्टि से इसे बहुत खास माना जाता है. मान्यता है कि यह धागा भगवान शिव और माता पार्वती के बीच अटूट संबंध का प्रतीक है. यह उनके दांपत्य जीवन और शिव-शक्ति के मिलन को दर्शाता है.
यह भी पढ़ें: क्यों किया गया था हजारों नागों को जलाने का यज्ञ? जानें नाग पंचमी की कथा
शिव और शक्ति के अटूट संबंध का प्रतीक
देवघर की धार्मिक परंपरा में भगवान शिव और माता पार्वती को एक-दूसरे का पूरक माना जाता है. बाबा बैद्यनाथ भगवान शिव के रूप में पूजे जाते हैं, जबकि मां पार्वती शक्ति स्वरूपा हैं. दोनों मंदिरों के शिखरों को जोड़ता यह धागा इसी शिव-शक्ति के संबंध को प्रतीकात्मक रूप से दिखाता है. श्रद्धालुओं के लिए यह केवल एक धागा नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है.
सावन में खास नजर आता है यह दृश्य
सावन के महीने में बाबा बैद्यनाथ धाम में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और कांवरिया पहुंचते हैं. बाबा पर जल चढ़ाने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के बीच मंदिरों के शिखरों को जोड़ता यह लाल धागा खास आकर्षण का केंद्र बनता है. आस्था से जुड़े इस दृश्य को श्रद्धालु शिव और शक्ति के पवित्र मिलन के रूप में देखते हैं.
यह भी पढ़ें: सावन सोमवार और नाग पंचमी एक दिन, करें ये उपाय, कालसर्प दोष से मिल सकती है राहत
देवघर की पहचान से जुड़ी है यह परंपरा
बाबा बैद्यनाथ धाम में ऐसी कई परंपराएं और धार्मिक प्रतीक हैं, जो लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का हिस्सा बने हुए हैं. मंदिरों के बीच बंधा यह लाल धागा भी इन्हीं परंपराओं में से एक है. यह धागा श्रद्धालुओं को विश्वास, प्रेम, समर्पण और जीवनभर के अटूट रिश्ते का संदेश देता है. यही धार्मिक विशेषताएं देवघर को देश के प्रमुख तीर्थस्थलों में एक अलग पहचान दिलाती हैं.
यह भी पढ़ें: क्यों किया गया था हजारों नागों को जलाने का यज्ञ? जानें नाग पंचमी की कथा
