Numerology: अंक ज्योतिष के अनुसार, वर्ष 2026 का मूलांक 1 है. (2+0+2+6 = 10, 1+0 = 1) मूलांक 1 सूर्यकी ऊर्जा से जुड़ा है, जो आत्मविश्वास, नेतृत्व, साहस, स्वतंत्रता और नयी शुरुआतों का प्रतीक माना जाता है. इसी कारण 2026 को वैश्विक स्तर पर एक नये चक्र की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है. यह वर्ष उन देशों और संस्थाओं के लिए विशेष फलदायी रहेगा, जो साहसिक निर्णय लेने और नवाचार को अपनाने के लिए तैयार होंगे. वहीं ये साल भारत की आर्थिक व सामाजिक प्रगति का संकेत दे रहा है. आइए जानते है ज्योतिषाचार्य डॉ श्रीपति त्रिपाठी से साल 2026 को लेकर महत्वपूर्ण भविष्यवाणी के बारे में-
Numerology: वैश्विक और भारतीय आर्थिक परिदृश्य
अंक ज्योतिष के अनुसार, 2026 में अमेरिका और यूरोप में आर्थिक सुधार के प्रयास तेज होंगे, लेकिन तेल, गैस और धातुओं की कीमतों में अस्थिरता बनी रहेगी. भारत में रुपया कुछ हद तक स्थिर रहेगा और विदेशी निवेश बढ़ेगा. स्टार्टअप और तकनीकी क्षेत्रों में नये अवसर खुलेंगे. कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मौसम आधारित चुनौतियां रहेंगी. अप्रैल, 2026 तक कई देशों में कागजी मुद्रा का महत्व लगभग समाप्त हो जायेगा. संभवत: 2026 ऐसी नयी वैश्विक अर्थव्यवस्था की शुरुआत करेगा, जहां डिजिटल मुद्रा और वस्तु विनिमय प्रणाली का बोलबाला होगा.
तकनीकी क्रांति और अंतरिक्ष अनुसंधान
2026 तकनीकी नवाचारों का वर्ष रहेगा. कृत्रिम, बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन और अंतरिक्ष अनुसंधान में नये विकास होंगे. युवा शक्ति साल की सबसे बड़ी पहचान बनेगी.
शिक्षा प्रणाली और यात्रा के तरीकों (जैसे इलेक्ट्रिक प्लेन या नयी रेल तकनीक) में ऐसी क्रांति आयेगी, जो पहले कभी नहीं देखी गयी. भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम और तकनीकी निवेश को मजबूती मिलेगी. विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में भारत अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ायेगा. विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए यह वर्ष नवाचार और प्रगति का नया अवसर लेकर आयेगा.
प्राकृतिक आपदाएं और जलवायु परिवर्तन
नये साल में मौसम और प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव अधिक रहेगा. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उष्णकटिबंधीय तूफान, बाढ़ और सूखे की घटनाओं में वृद्धि होगी. भारत में मानसून प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ और सूखे की स्थिति बनी रहेगी. सरकार और स्थानीय प्रशासन को आपदा प्रबंधन के लिए सजग रहना होगा. जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के चलते पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना होगा. जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने का संकेत देंगी. देश में हरित तकनीक और पर्यावरण मित्र नीतियों को अपनाने पर जोर रहेगा.
राजनीतिक बदलाव और अंतरराष्ट्रीय तनाव
अमेरिका, यूरोप और एशियाई देशों में चुनाव और नयी नीतियां वैश्विक राजनीति को प्रभावित करेंगी. अंतरराष्ट्रीय तनाव और सहयोग का मिश्रण दिखेगा. सूर्य की प्रबल ऊर्जा के कारण सत्ता में बैठे लोगों में अहंकार व टकराव की स्थिति बन सकती है. देश में ऐसे सामाजिक व राजनीतिक आंदोलन, विरोध प्रदर्शन होंगे, जो व्यवस्था को अस्थिर करेंगे. देश में आतंकवादी हमला की संभावना प्रबल है. वहीं पंजाब, बंगाल, कश्मीर, ओडिसा और पूर्वोत्तर राज्यों में गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है. राजनीतिक स्तर पर नीतिगत सुधार और युवा नेतृत्व का प्रभाव बढ़ेगा.
स्वास्थ्य सेवाएं और वैश्विक सतर्कता
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नयी रोग-महामारी की आशंका बनी रहेगी. वैक्सीनेशन, अनुसंधान और स्वास्थ्य विज्ञान में नयी प्रगति होगी. भारत में मानसिक स्वास्थ्य, जीवनशैली और संक्रमण रोगों पर ध्यान देना जरूरी होगा. हेल्थ केयर उद्योग और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और निवेश देखने को मिलेगा. सामान्य जन स्वास्थ्य और स्वच्छता पर जागरुकता बढ़ाने की आवश्यकता होगी. हालांकि अप्रैल से अक्तूबर के बीच सुरक्षा और मौसम संबंधी सतर्कता आवश्यक रहेगी. भारत में प्रदूषण चरम पर होगा, मौसम और हवाओं से लोग परेशान रहेंगे.
