Amalaki Ekadashi 2026: आमलकी एकादशी फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है. इसे रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की विशेष पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस व्रत को करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है.
आमलकी एकादशी व्रत 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
आमलकी एकादशी 27 फरवरी 2026, शुक्रवार को है.
- आमलकी एकादशी तिथि प्रारंभ — 26 फरवरी 2026 की रात 12:06 बजे
- आमलकी एकादशी तिथि समाप्त — 27 फरवरी 2026 की रात 09:48 बजे
- पूजा का शुभ समय — 27 फरवरी 2026 को सुबह 06:15 से 09:09 बजे तक
- पारण का शुभ समय — 28 फरवरी 2026 को सुबह 07:41 से 09:08 बजे तक
आमलकी एकादशी पूजा विधि
पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. घर के मंदिर में भगवान नारायण के सामने व्रत का संकल्प लें. इसके बाद भगवान नारायण के सामने दीप प्रज्वलित करें और पीले फूल, अक्षत तथा तुलसी दल अर्पित करें. फिर भोग लगाएं, भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें और व्रत कथा का पाठ करें. अंत में भगवान विष्णु की आरती करें.
इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने का भी विधान है. आंवले के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं, धूप-बत्ती दिखाएं, जल अर्पित करें और सात बार वृक्ष की परिक्रमा करें. यदि घर के पास आंवले का पेड़ न हो, तो आंवले का फल भगवान विष्णु को अर्पित करें. पूजा के अगले दिन शुभ मुहूर्त में पारण करके व्रत समाप्त करें.
आमलकी एकादशी का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आंवले के वृक्ष की उत्पत्ति भगवान विष्णु के मुख से हुई थी. जो व्यक्ति इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करता है और व्रत रखता है, उसे सभी पापों से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है. इसे ‘रंगभरी एकादशी’ भी कहा जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव माता पार्वती का गौना कराकर पहली बार काशी आए थे, जिससे होली के त्योहार की शुरुआत मानी जाती है.
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