Gandant Dosh: कुंडली में गंडांत दोष है या नहीं? चंद्रमा, गुरु और इन योगों से ऐसे समझें इसका असली प्रभाव

Gandant Dosh: कुंडली में गंडांत दोष के पहले आर्टिकल में हमने समझा था कि गंडांत और गंड मूल क्या होते हैं और नक्षत्रों की गणना के आधार पर इनकी स्थिति किस तरह बनती है. अब इसके आगे एक और जरूरी बात समझना है कि कुंडली में गंड मूल या गंडांत होने मात्र से ही उसका प्रभाव तय नहीं हो जाता.

कई बार लोग गंड मूल का प्रभाव बताकर उसकी शांति करा लेते हैं, जबकि कुंडली की ठीक से जांच करने पर पता चलता है कि वहां वह योग था ही नहीं. इसलिए किसी भी उपाय से पहले यह देखना जरूरी है कि दोष वास्तव में कुंडली में मौजूद है या नहीं. इसके अलावा, पारंपरिक ज्योतिष में ऐसे कई सिद्धांत बताए गए हैं, जो गंडांत के प्रभाव को कम या समाप्त कर सकते हैं. इसके सिद्धांत क्या हैं,काशी से पं. प्रशांत पांडेय बता रहे है.

कैसे समझें कुंडली में गंडांत दोष है या नहीं?

  1. मूल, आश्लेषा और रेवती से जुड़े गंडांत का प्रभाव हर स्थिति में सक्रिय नहीं माना गया है. विशेष रूप से तब, जब लग्नेश पर चंद्रमा की दृष्टि न हो. चंद्रमा किसी कमजोर पाप ग्रह के साथ हो और उस पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि भी न पड़ रही हो.
  2. यदि चंद्रमा बलवान हो तो नक्षत्र और तिथि गंडांत के प्रभाव काफी हद तक समाप्त माने गए हैं. इसी प्रकार बलवान गुरु लग्न या राशि गंडांत से जुड़े दोषों को कम करने में सक्षम माना गया है.
  3. केंद्र भावों (1, 4, 7 या 10) में किसी शुभ ग्रह की उपस्थिति या चंद्रमा का 11वें भाव में होना गंडांत के प्रभाव को निष्प्रभावी करने वाला माना गया है.
  4. बलवान चंद्रमा और गुरु न केवल अशुभ योगों के प्रभाव को कम करते हैं, बल्कि तिथि और लग्न गंडांत के प्रतिकूल प्रभावों को भी समाप्त करने की क्षमता रखते हैं.
  5. परंपरा में कहा गया है कि मजबूत गुरु लग्न गंडांत के दोष को दूर कर सकता है, जबकि मजबूत चंद्रमा तिथि गंडांत के प्रभाव को समाप्त कर सकता है.

गंडांत का प्रभाव कम और खत्म कब होता है

  • रविवार या बुधवार का हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, रेवती, ज्येष्ठा या मूल नक्षत्र के साथ संयोग तथा रविवार का अश्विनी नक्षत्र के साथ संयोग, नक्षत्र, तिथि और राशि- तीनों प्रकार के गंडांत के प्रभाव को समाप्त करने वाला माना गया है. अभिजित मुहूर्त को भी एक शक्तिशाली सुरक्षा कारक माना गया है और इसे गंडांत से जुड़े प्रतिकूल प्रभावों को कम करने वाला बताया गया है.
  • चंद्रमा की स्थिति और उसकी शक्ति भी बहुत महत्वपूर्ण मानी गई है. यदि, चंद्रमा अपने वर्ग में हो, मित्र राशि में हो या किसी शुभ ग्रह के साथ अथवा उसकी दृष्टि में हो, तो यह भी गंडांत के प्रतिकूल प्रभावों से सुरक्षा देने वाला कारक माना गया है.
  • किसी कुंडली में गंडांत दिखाई देना ही पर्याप्त नहीं है. उसका सही आकलन करने के लिए पूरी कुंडली को देखना जरूरी है. संबंधित ग्रहों की शक्ति, लग्न, चंद्रमा, शुभ ग्रहों का प्रभाव और सबसे बढ़कर वे सभी परिस्थितियां, जो इस दोष को कम या समाप्त कर सकती हैं.
  • पहले यह देखें कि दोष वास्तव में कुंडली में है या नहीं. फिर उसकी ताकत और प्रभाव को समझें. इसके बाद यह देखें कि उसे कम करने या समाप्त करने वाले कौन-कौन से कारक मौजूद हैं. गंड मूल और गंडांत को समझने का यही संतुलित तरीका है. इससे ज्योतिष को अनावश्यक डर और भ्रम से अलग रखकर उसके मूल सिद्धांतों के साथ समझने में मदद मिलती है.

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काशी से ज्योतिषाचार्य पं. प्रशांत पांडे

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लेखक के बारे में

By दीपेश कुमार ठाकुर

दीपेश कुमार ठाकुर प्रभात खबर डिजिटल में धर्म और राशिफल सेक्शन लीड के तौर पर सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें लंबे समय का अनुभव है. वह धर्म-अध्यात्म, ज्योतिष, वास्तुशास्त्र, हस्तरेखा शास्त्र और न्यूमेरोलॉजी से जुड़े विषयों पर लेखन करते हैं.

दीपेश कुमार ठाकुर इससे पहले Zee News, News24, Bharat Express, NDTV, Jansatta और Hari Bhoomi जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं. अपने पत्रकारिता करियर में उन्होंने धर्म, अध्यात्म और ज्योतिष के अलावा विभिन्न समसामयिक और उपयोगी विषयों पर भी लेखन किया है.

धर्म और ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों की रुचि के अनुरूप प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है. पौराणिक कथाओं, धार्मिक परंपराओं, ज्योतिषीय अवधारणाओं, व्रत-त्योहार, पंचांग और राशिफल से जुड़े विषयों पर उनका विशेष लेखन अनुभव है.

उन्होंने संस्कृत साहित्य में स्नातक करने के बाद जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन में मास्टर्स डिग्री हासिल की है.

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