जीवन जीने का सलीका सिखाती किताब ‘लाइफ मैनेजमेंट’

Book Review : आपाधापी के इस दौर में इंसान की जिंदगी बेतरतीब हो जाती है और वह अपनी जिम्मेदारियों और कार्यों के बीच उलझ कर रह जाता है. कई बार खुद को हारा हुआ समझने लगता. दरअसल उसमें ना तो प्रतिभा की कमी होती है और ना ही उसने मेहनत कम की होती है, बस उसने सबकुछ व्यवस्थित तरीके से नहीं किया होता है. आईआईएम इंदौर के मैनेजर नवीन कृष्ण राय ने अपनी किताब लाइफ मैनेजमेंट में इन्हीं बातों का जिक्र करते हुए समाधान बताया है.

Book Review : अगर कोई चीज सुव्यवस्थित तरीके से रखी हो, तो निश्चित तौर पर वह लोगों को आकर्षित करती है, यही बात जीवन के हर क्षेत्र में लागू होती है, फिर चाहे वो आपके जीवन जीने का तरीका हो, नौकरी करने का सलीका हो या फिर अपनी बात को बेहतरीन और आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने का हुनर हो. यही वजह है कि आज के युवाओं का मैनेजमेंट की पढ़ाई की ओर बहुत झुकाव है. लेकिन हर व्यक्ति तो मैनेजमेंट की पढ़ाई नहीं कर सकता है,  ऐसे में वे यह समझना चाहते हैं कि कैसे जीवन को बेहतर और आकर्षक ढंग से जीया जा सकता है. लेखक नवीन कृष्ण राय ने अपनी पुस्तक लाइफ मैनेजमेंट में इसी बात को बात बहुत ही बेहतरीन ढंग से बताया है. 

नवीन कृष्ण राय की पुस्तक लाइफ मैनेजमेंट में यह बताया गया है कि आपको कैसे जीना चाहिए. पुस्तक के नाम के नीचे एक टैग लाइन-गुमराह और शोषित होने से कैसे बचें, भी दिया गया है जो यह बताता है कि पुस्तक में आखिर किन बातों की चर्चा है और यह कहना क्या चाहता है. इस पुस्तक में जीवन जीने की कला और उसे आकार देने के तरीकों के बारे में विस्तार से बात की गई है. इस पुस्तक में पार्ट वाइज यह बताया गया है कि आप कैसे अपना जीवन मैनेज कर सकते हैं और उसे सुंदर बना सकते हैं. 

किस्सागोई में लिखी गई है किताब

पुस्तक में कुल 36 चैप्टर हैं और सभी चैप्टर में बयानगी का अंदाज निराला है. चैप्टर के शीर्षक भी आकर्षित करते हैं. जैसे -हमेशा यह याद रखें कि आप वास्तव में चाहते क्या हैं! ,बिना साहस के किसी भी प्रतिभा का कोई मूल्य नहीं होता, लक्ष्य निर्धारण के समय भविष्य को अनुकूल और तैयारी के समय प्रतिकूल मानें, जीवन में तेज चलना हो तो अनावश्यक जिम्मेदारियां लेने से बचें, स्वयं की कमियों को नजरअंदाज करने से बचें और मौत जब सामने होती है, जिंदगी की असली कीमत तभी पता चलती है. ये कुछ उदाहरण हैं, जो यह बताते हैं कि आप अपने जीवन को कैसे मैनेज कर सकते हैं.

लेखक ने किताब के हर चैप्टर में शुरुआत एक किस्से से की है, ‘चैप्टर हमेशा यह याद रखें कि आप वास्तव में चाहते क्या हैं!’ में लेखक ने एक किरदार नंदू भैया के जरिए यह बुना है कि आप चाहते क्या है. नंदू भैया जो पढ़ने आए थे नवोदय विद्यालय में और फिर खेल की तरफ झुके और भी उनकी पढ़ाई बाधित हुई. लेखक यह बताना चाहते हैं कि जीवन में पहले आप तय कर लें कि आप चाहते क्या हैं और तब उसे पाने की कोशिश करें. यह तो बात हुई किस्से की लेकिन इस पुस्तक में मैनेजमेंट के सिद्धांतों के आधार पर भी यह बताने की कोशिश की गई है कि जीवन कैसे जिया जाए. हर अध्याय की शुरुआत तो किस्सागोई से हुई है,लेकिन फिर जिस तरह मैनेजमेंट के सिद्धांतों को बताया गया है वह थोड़ा सा आम पाठकों के लिए बोझिल करने वाला हो सकता है. किताब का यह हिस्सा उसे टेक्सटबुक वाले फाॅर्मेट में लेकर जा रहा है.

मैनेजमेंट की जरूरत पर किया गया है फोकस

लेखक  नवीन कृष्ण राय ने किताब की भूमिका में स्पष्ट कर दिया है कि किताब का उद्देश्य और टारगेट कौन है. उन्होंने लिखा है- हर व्यक्ति मैनेजमेंट की औपचारिक ट्रेनिंग या एमबीए की पढ़ाई नहीं कर सकता…लेकिन हर किसी को मैनेजमेंट की उतनी ही जरूरत है, जितनी किसी प्रोफेशनल कार्य को करने वाले एमबीए डिग्रीधारी व्यक्ति को. जैसा कि उपनिषध में भी लिखा है कि “सिद्धि मूलं प्रबंधनम्” अर्थात् ‘किसी भी व्यक्ति की सभी उपलब्धियों का मूल अच्छा प्रबंधन यानी मैनेजमेंट है’. इसलिए हम चाहे जैसी जिंदगी जीना चाह रहे हों, हमारे जीवन के चाहे जो भी लक्ष्य हों, हमारी चाहे जो भी महत्वकांक्षाएं हों, हम जो भी उपलब्धियां हासिल करना चाहतें हों, हमें अपने जीवन में मैनेजमेंट की अच्छी समझ होना अवश्यक है. यह लाइफ मैनेजमेंट” पुस्तक मैनेजमेंट के ज्ञान का लोकतंत्रीकरण करने का एक प्रयास है. सभी पृष्ठभूमि के पाठकों को मैनेजमेंट के विभिन्न स्किल से रूबरू कराने और उन्हें समझाने के लिए ही यह पुस्तक लिखी गई है. इसमें मैनेजमेंट के मुख्य सूत्रों को समझाने के लिए नायकों का चयन भी आपके बीच से ही किया गया है.

हिंदी में मैनेजमेंट पर लिखी गई बहुप्रतीक्षित पुस्तक 

इस पुस्तक की प्रस्तावना आईआईएम, इंदौर के निदेशक प्रो हिमांशु राय ने लिखी है और पुस्तक को आम जन के लिए उपयोगी बताया है. उन्होंने लिखा है कि नवीन की यह पुस्तक लोगों को लाइफ मैनेजमेंट का कौशल सिखाती है. इसमें मनोविज्ञान और मैनेजमेंट का अद्‌भुत समिश्रण किया गया है जो आम जनता के लिए बहुत ही उपयोगी है. इस पुस्तक के बारे में बात करते हुए जस्टिस ए पी साही, अध्यक्ष, नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन कहते हैं -इस पुस्तक में उन सरल उपायों का विवरण दिया गया है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने आप को संतुलित जीवन प्रदान कर सकता है. यह पुस्तक पाठकों को न्यायसंगत निर्णय लेने और अपनी जीवनशैली के कौशल को निखारने में बहुमूल्य रूप से प्रेरणादायी होगी. राजीव कुमार, पूर्व उपाध्यक्ष, नीति आयोग ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुझे विश्वास है की यह पुस्तक हिंदी क्षेत्र के युवाओं के लिए एक वरदान साबित होगी. 

इस पुस्तक इसलिए भी खास है क्योंकि मैनेजमेंट पर यह हिंदी भाषा में लिखी गई पुस्तक है और इसका प्रस्तुतीकरण बहुत बेहतर है. इस पुस्तक का प्रकाशन मंजुल पब्लिशिंग हाउस द्वारा किया गया है. पुस्तक में 276 पृष्ठ हैं और यह पेपरपैक में उपलब्ध होगा. पुस्तक का पहला संस्करण 25 अक्टूबर 2024 को प्रकाशित होगा. पुस्तक के लेखक नवीन कृष्ण राय भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM), इंदौर में मैनज़र के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें देश के जाने-माने मैनेजमेंट एक्स्पर्ट के रूप में जाना जाता है. 

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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