विनेश फोगाट का 12 घंटे में कैसे बढ़ा वजन? पेरिस ओलंपिक में अबतक कितने विवाद हुए

Vinesh Phogat disqualified : विनेश फोगाट पहली भारतीय महिला पहलवान हैं, जिन्होंने ओलंपिक में फाइनल तक का सफर तय किया था, ऐसे में भारतीयों को उनसे गोल्ड की उम्मीद थी. हर भारतीय का दिल विनेश के लिए धड़क रहा था, उसी वक्त यह खबर आई कि विनेश फोगाट फाइनल मैच नहीं खेल पाएंगी, क्योंकि उनका वजन 50 किलोग्राम से ज्यादा है. यह खबर निराश करने वाली है और सब यह जानना चाहते हैं कि आखिर कैसे विनेश फोगाट अयोग्य हो सकती हैं?

Vinesh Phogat disqualified : भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट को ओलंपिक संघ ने उनके फाइनल मुकाबले से पहले अयोग्य घोषित कर दिया है. संघ के इस फैसले के बाद विनेश फाइनल मुकाबला नहीं खेल पाएंगी और बिना पदक के वापस देश लौटेंगी. विनेश फोगाट के अयोग्य घोषित होने पर भारतीय दल की ओर से एक सूचना सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म एक्स पर शेयर की गई, जिसमें यह बताया गया कि रात भर टीम के सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद आज सुबह विनेश फोगाट का वजन 50 किलोग्राम से कुछ ग्राम अधिक हो गया. इस समय इस मसले पर टीम की ओर से और कोई टिप्पणी नहीं की जाएगी. भारतीय टीम आपसे विनेश की निजता का सम्मान करने का अनुरोध करती है. 

भारतीयों में निराशा-12 घंटे में कैसे बढ़ा वजन?

विनेश फोगाट के अयोग्य घोषित होने के बाद देश के लोगों में निराशा है और सब यह जानना चाहते हैं कि आखिर विनेश फोगाट अयोग्य कैसे घोषित हो सकती है, जबकि उन्होंने कल ही सेमीफाइनल मुकाबला जीता था. दरअसल विनेश फोगाट पहले 53 किलोग्राम वजन वर्ग में खेलती थीं, इस बार वे 50 किलोग्राम के वर्ग में खेल रही हैं. उन्होंने अपना वजन काफी संतुलित भी किया था, लेकिन फाइनल मुकाबले से पहले उनके वजन में कुछ ग्राम की वृद्धि हो गई, जिसकी वजह से उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया. भारतीय एथलेटिक्स टीम के लीडर डॉ मधुकांत पाठक ने बताया कि नियम के अनुसार हर मैच से पहले पहलवान का वजन किया जाता है.

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चूंकि विनेश फोगाट ने मंगलवार को अपना सेमीफाइनल मुकाबला खेला था और यह मैच रात के दस बजे के आसपास खेला गया था और मात्र 12 घंटे के अंतर पर वह वजन ज्यादा होने की वजह से अयोग्य घोषित हो गईं. इस वजह से भारतीयों के मन में कई सवाल हैं, जिनका वह जवाब चाहते हैं, लेकिन फिलहाल भारतीय दल का कोई भी सदस्य इसपर कुछ नहीं कह रहा है, जिसकी वजह से विनेश का अयोग्य घोषित होना विवादित मसला बन गया है. इस मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीटी उषा से जानकारी मांगी है, चूंकि विनेश फोगाट से भारतीयों को सोने की उम्मीद थी, इसलिए वे बेचैन हैं. पेरिस ओलंपिक 2024 में विनेश फोगाट की अयोग्यता के अलावा भी कुछ विवाद जुड़े हैं-

अल्जीरिया की बॉक्सर ईमान खलीफ पर लगा पुरुष होने का आरोप

अल्जीरिया की बाॅक्सर ईमान खलीफ को महिला वर्ग में खेलने की इजाजत देने पर काफी विवाद हुआ. ईमान खलीफ के साथ खेलते हुए इटली की बॉक्सर एजेंला करिनी ने मैच को मात्र 46 सेकेंड में ही छोड़ दिया था और यह कहा था कि वह अपनी जान बचाकर भाग आईं हैं.  खलीफ के शरीर में पुरुषों में पाए जाने वाले हार्मोन टेस्टोस्टोरेन का स्तर काफी ऊंचा है, इसलिए ओलंपिक में उनका महिला बॉक्सिंग में खेलना अनुचित है. ईमान खलीफ को महिला वर्ग में खेलने की अनुमति देने से आईओसी की खूब आलोचना हो रही है क्योंकि 2023 में खलीफ को अयोग्य घोषित किया जा चुका था.

भारतीय बाॅक्सर निशांत देव ने भी लगाया पक्षपात का आरोप

भारतीय बाॅक्सर निशांत देव पेरिस ओलंपिक में पदक से चूक गए.  71 किलोग्राम वजन के वर्ग में क्वार्टर फाइनल में वे अपने मैक्सिकन प्रतिद्वंद्वी मार्को वर्डे अल्वारेज से 1-4 से हार गए. लेकिन निशांत देव का कहना था कि उसके साथ अन्याय हुआ है. उनकी मेहनत को दरकिनार कर जज ने फैसले लिए और उन्हें कम प्वाइंट दिया, जिसकी वजह से वे पदक से चूक गए.

ओपनिंग सेरेमनी विवाद 

पेरिस ओलंपिक के ओपनिंग सेरेमनी में ईसा मसीह के अंतिम भोज का चित्रण किया गया था. इस चित्रण से ईसाई धर्म के लोग आहत हो गए थे और इसे ईसा मसीह का अपमान बताया था. जब विश्व भर से इसपर प्रतिक्रिया आई तो आयोजकों ने माफी मांग ली और कहा कि उनका उद्देश्य किसी धर्म का अपमान करना नहीं था. ओलंपिक का ओपनिंग समारोह इस बार सीन नदी में आयोजित किया गया था.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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