अमेरिकी राष्ट्रपति कांग्रेस से पारित विधेयक को कानून बनने से रोक सकता है, ये हैं विशेषाधिकार और वेतन

US Election Results : अमेरिका के राष्ट्रपति को विश्व का सबसे ताकतवर व्यक्ति माना जाता है, इसका कारण है उन्हें प्राप्त कई विशेषाधिकार. अमेरिका का राष्ट्रपति कमांडर इन चीफ होता, वह अपने देश में नए कानूनों के निर्माण की सलाह देता है और उसे यह अधिकार भी प्राप्त है कि वह कांग्रेस के दोनों सदन द्वारा पारित विधेयक को वीटो पावर के जरिए कानून बनने से रोक दे.

US Election Results : अमेरिका के राष्ट्रपति के पास एक्सीक्यूटिव प्रिविलिज का विशेषाधिकार है, जिसके तहत उनसे किसी गोपनीय बात की जानकारी देने से वह इनकार कर सकता है, चाहे वह जानकारी फ्रीडम ऑफ इंफाॅर्मेशन एक्ट के तहत ही आती हो. 2018 में जब डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति थे, तो उन्होंने पाकिस्तान को दी जाने वाली 25.5 करोड़ डालर की अमेरिकी मदद रोक दी थी और इसकी वजह नहीं बताई थी, यह उनके कार्यकारी विशेषाधिकार में आता है, जिसे एक्सीक्यूटिव प्रिविलेज का कहा जाता है.  

 

क्या हैं अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रमुख अधिकार?

अमेरिका का राष्ट्रपति सशस्त्र बलों का चीफ होता है उसके पास किसी देश के साथ युद्ध या सेना भेजकर कार्रवाई शुरू करने और खत्म करने का अधिकार है. उसके पास परमाणु हथियारों की टेस्टिंग से लेकर रक्षा नीतियों को बनाने का अधिकार भी है. हालांकि युद्ध की घोषणा का अधिकार अमरीकी कांग्रेस के पास है, लेकिन युद्ध को नियंत्रित करने की पूरी जिम्मेदारी राष्ट्रपति के पास ही होती है.

वीटो पावर

अमेरिका का राष्ट्रपति अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदन द्वारा पारित विधेयक को अपने विशेषाधिकार जिसे वीटो पावर कहा जाता है के जरिए किसी विधेयक को कानून बनने से रोक सकता है. 

राष्ट्रपति अगर वीटो पावर का इस्तेमाल कर देता है तो कोई भी विधेयक तब तक कानून नहीं बन सकता जबतक की कांग्रेस का दोनों सदन उसे दो तिहाई बहुमत से पारित ना कर दे.

अमूमन अगर राष्ट्रपति वीटो लगा देते हैं, तो उसके बाद कोई भी विधेयक कानून नहीं ही बनता है. वीटो लैटिन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है मेरी स्वीकृति नहीं है. राष्ट्रपति के पास यह अधिकार भी है कि वह यह सलाह दे कि देश को किस तरह के नए कानूनों की जरूरत है. भारत में यह अधिकार संसद के पास है कि वो किसी नए कानून को मंजूरी देगी या नहीं. भारत का प्रधानमंत्री अकेले नए कानूनों को मंजूरी नहीं दे सकता है, उसे कैबिनेट की मंजूरी लेनी पड़ती है, उसके बाद ही वह विधेयक का रूप लेता है.

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अमेरिकी राष्ट्रपति को कितनी मिलती है सैलरी?

अगर आप यह सोचते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति को बहुत ज्यादा सैलरी मिलती है, तो आप गलत हैं क्योंकि उनकी सैलरी सिंगापुर के प्रधानमंत्री को उनसे ज्यादा सैलरी मिलती है. हांगकांग के राष्ट्राध्यक्ष को भी उनसे सैलरी मिलती है. चूंकि अमेरिका का राष्ट्रपति जनता का सेवक होता है इसलिए उन्हें उनके काम का भुगतान किया जाता है. अमेरिकी राष्ट्रपति के वेतन और भत्ते का विवरण uscode.house.gov के अनुसार.

राष्ट्रपति को अपने कार्यकाल के दौरान प्रति वर्ष $400,000 की कुल राशि का भुगतान किया जाता है, यानी अमेरिकी राष्ट्रपति को सिर्फ 3.36 करोड़ सालाना वेतन दिया जाता है. इसके अलावा उन्हें व्यय भत्ता के रूप में $50,000 (42 लाख रुपये) यात्रा भत्ता के रूप में $100,000 (84 लाख रुपये) और मनोरंजन भत्ते के रूप में $19,000 (16 लाख रुपये) मिलते हैं. यानी कुल मिलाकर अमेरिकी राष्ट्रपति को प्रति वर्ष कुल वेतन 4.78 करोड़ रुपये के आसपास मिलते हैं. 

विश्व में सर्वाधिक वेतन पाने वाले राष्ट्राध्यक्ष

कितना आलीशान है व्हाइट हाउस जहां रहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति

व्हाइट हाउस अमेरिकी राष्ट्रपति का अधिकारिक निवास स्थान है. इस हाउस का निर्माण आयरिश मूल के आर्किटेक्ट जेम्स होबन ने किया है. सफेद रंग की पत्थरों से इस भवन की बाहरी दीवारों का निर्माण किया गया है. वर्तमान में जो व्हाइट हाउस है वह छह मंजिला है और इसमें दो मंजिला बेसमेंट बनाया गया है. व्हाइट हाउस में 130 के करीब कमरे हैं और यह 55 हजार वर्गफीट में बना हुआ है. यहां अतिथियों के रहने की भी विशेष व्यवस्था है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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