US Attacks Iran : जमीन से 60 फीट नीचे बने बंकर में छुपे हैं अयातुल्ला अली खामेनेई, 3 उत्तराधिकारी चुने

Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei : ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के प्राण संकट में हैं. इसी वजह से वे हाई सिक्योरिटी जोन बंकर में शिफ्ट हो गए हैं. बंकर में उनके लिए 6 महीने का खाना और अन्य सुविधाएं मौजूद हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष में अमेरिका की एंट्री के बाद खामेनेई पर खतरा और बढ़ गया है. खतरे को देखते हुए उन्होंने अपने तीन उत्तराधिकारियों की भी घोषणा कर दी है, ताकि सत्ता हस्तांतरण आसन हो सके.

Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei : इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध में आखिरकार अमेरिका की सीधी इंट्री हो गई है. अमेरिका ने 21 जून को B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स और टॉमहॉक मिसाइलों द्वारा ईरान के फोर्डो, नतांज और इस्फहान स्थित तीन परमाणु संयंत्रों पर हमला करके उसे बर्बाद कर दिया है. अमेरिका ने ईरान को यह चेतावनी भी दी है कि अगर उसने जवाबी कार्रवाई की तो अंजाम बहुत बुरा होगा, हालांकि ईरान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी हमले के बाद उसके सभी विकल्प खुले हैं. इन हालात में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है और वे बंकर में शिफ्ट हो गए हैं.

अयातुल्ला अली खामेनेई सुरक्षा के दृष्टिकोण से बंकर में हुए शिफ्ट

ईरान-इजरायल संघर्ष 10वें दिन में प्रवेश कर गया है और इसकी तीव्रता लगातार बढ़ रही है. इजरायल जिस तरह ईरान के शीर्षस्थ अधिकारियों की हत्या कर रहा है और लगातार अली खामेनेई की हत्या की बात कर रहा है. अली खामेनेई बंकर में शिफ्ट हो गए हैं. न्यूयार्क टाइम्स की मानें तो खामेनेई ने अपने उत्तराधिकारियों की भी घोषणा कर दी है, ताकि अगर उनकी मौत हो भी जाए तो सत्ता हस्तांतरण में कोई दिक्कत ना आए. इतना ही नहीं खामेनेई ने फोन सहित सभी इलेक्ट्राॅनिक्स डिवाइस का उपयोग बंद कर दिया है, ताकि उनके लोकेशन को ट्रेस ना किया जा सके. खामेनेई अब सिर्फ अपने भरोसेमंद कमांडरों के जरिए ही बातचीत कर रहे हैं. हालांकि अमेरिका लगातार इस बात को दोहरा रहा है कि उसे यह पता है कि खामेनेई कहां छुपकर बैठा है. न्यूयार्क टाइम्स ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अयातुल्ला खामेनेई अपने शासन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं, तभी उन्होंने अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है. बढ़ते संकट की वजह से ही खामेनेई और उनके परिवार को तेहरान के लविजान इलाके के अंडरग्राउंड बंकर में शिफ्ट किया गया है, ताकि किसी भी हमले से बचा जा सके.

जमीन से 60 फीट नीचे है खामेनेई का बंकर

अयातुल्लाह अली खामेनेई का बंकर काफी सुरक्षित है, ताकि संकट की स्थिति में प्राणों की रक्षा की जा सके. ईरान में जिस बंकर में खामेनेई को रखा गया है उसका उद्देश्य ही है युद्ध और संकट की स्थिति में सर्वोच्च नेतृत्व की सुरक्षा. यह एक हाई सिक्योरिटी जोन है. यहां किसी भी तरह के इलेक्ट्राॅनिक डिवाइस काम नहीं करते हैं. माना जाता है ये हाई सिक्योरिटी बंकर जमीन से 30 से 60 फीट की गहराई में बनाए गए हैं. इसकी वजह यह है कि इसे परमाणु हमलों से सुरक्षित बनाया गया है. ये बंकर EMP (Electromagnetic Pulse) प्रूफ हैं, यानी इनपर परमाणु हमलों का कोई असर नहीं होगा. साथ ही यह डिजिटल ब्लाइंड जोन है, यानी इसके लोकेशन की ट्रैकिंग संभव नहीं है. इसके अलावा यहां ऑक्सीजन की रीसायक्लिंग यूनिट लगाई गई है, ताकि ऑक्सीजन की कमी ना हो. साथ ही 6 महीने का भोजन, पानी और दवाइयां भी यहां रखीं गई हैं. चिकित्सा सुविधा जिसमें चिकित्सा उपकरण, ICU की सुविधा और ऑपरेशन थिएटर भी बनाए गएं हैं, ताकि किसी भी तरह की मेडिकल इमरजेंसी से निपटा जा सके. इतना ही नहीं इन बंकर में सुरक्षित निकासी द्वार भी बनाए गए हैं, जो सीधे सरकारी एयरबेस तक जाते हैं.

खामेनेई की सुरक्षा में तैनात हैं विशेष सुरक्षा ग्रुप

IRGC (Islamic Revolutionary Guard Corps) खामेनेई की सुरक्षा में तैनात है. इस दस्ते ने कई अन्य यूनिट को भी अली की सुरक्षा में लगाया है. सुरक्षा यूनिट के ये सैनिक विदेश से प्रशिक्षण पाकर लौटे हैं और काफी सतर्क और मुस्तैद हैं. यह किसी भी तरह के हमलों से निपटने में खुद को समर्थ पाते हैं. ये सुरक्षा अधिकारी साइबर-सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी में माहिर होते हैं. इनके जिम्मे ही खामेनेई के बंकर और उनके जान की सुरक्षा की जिम्मेदारी है.

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Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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