मिर्च के शहर से निकला मिर्च सा तेज युवा खिलाड़ी शेख रशीद, धोनी ने जुनून को पहचान किया विश्वास

Shaik Rasheed : शेख रशीद, 20 साल का घुंघराले बालों वाला लड़का. आंखों में क्रिकेट के प्रति जुनून और गले में सिल्वर की चेन पहने जब वो चेन्नई सुपर किंग्स की पारी की शुरुआत करने इकाना स्टेडियम में उतरा, तो सबके मन में यही सवाल था, कौन है ये शेख रशीद जिस पर कैप्टन कूल धोनी ने किया है भरोसा. आंध्र प्रदेश गुंटूर का रहने वाला शेख रशीद अंडर 19 क्रिकेट में भारत का उपकप्तान रहा है और क्रिकेट के प्रति उसकी दीवानगी इस कदर है कि वह प्रतिदिन 40 किलोमीटर की यात्रा तय कर कोचिंग के लिए आता था.

Shaik Rasheed : चेन्नई सुपर किंग्स को आईपीएल 2025 में लगातार पांचवीं हार के बाद जीत नसीब हुई है. टीम जब 14 अप्रैल को लखनऊ के इकाना स्टेडियम में उतरी तो रचिन रविंद्र के साथ चेन्नई की पारी की शुरुआत युवा खिलाड़ी शेख रशीद ने की. शेख रशीद अपना डेब्यू मैच खेल रहे थे और छोटी सी पारी में उन्होंने 19 गेंद में 27 रन बनाएं, जिसमें छह चौका शामिल था. आंध्र प्रदेश का यह युवा खिलाड़ी अपनी पारी के साथ चर्चा में है और अबतक इसके बारे में जानने की इच्छा करने वालों की संख्या 10 लाख से अधिक हो गई है. गूगल के टॉप ट्रेंड में वह नंबर एक पर बना हुआ है.

कौन है शेख रशीद?

शेख रशीद पर चयनकर्ताओं की नजर तब गई थी जब उसने अंडर 19 क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया था और टीम के उप-कप्तान भी रहे. शेख रशीद ने अंडर19 विश्वकप के सेमीफाइनल और फाइनल में बेहतरीन प्रदर्शन किया, जिसकी वजह से टीम जीती. सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शेख रशीद ने 94 रन बनाए थे, जबकि फाइनल में 50 रन का योगदान दिया था और टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में शेख रशीद का जन्म हुआ है. गुंटूर पूरे देश में मिर्च और कपास के लिए प्रसिद्ध है. अंडर 19 के अलावा शेख रशीद का बल्ला रणजी ट्रॉफी में भी चला और शेख रशीद ने दोहरा शतक जड़ा.

चेन्नई सुपर किंग्स ने 30 लाख में है खरीदा

अंडर 19 और रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन के बाद शेख रशीद को आईपीएल में मौका मिला और 2024 में चेन्नई की टीम ने रशीद को 20 लाख के बेस प्राइस पर खरीदा, उसके बाद रशीद को 30 लाख देकर टीम में रखा गया. लखनऊ सुपर जायंट्‌स के खिलाफ लखनऊ में शेख रशीद को मौका मिला और उन्होंने संतोषजनक प्रदर्शन किया. चेन्नई की पारी की शुरुआत करने की वजह से रशीद के नाम की चर्चा जोरों पर है.

क्या है शेख रशीद की खासियत

महेंद्र सिंह धोनी ने शेख रशीद को पारी की शुरुआत करने का मौका दिया, जो यह साबित करता है कि कैप्टन कूल को रशीद पर भरोसा है. रशीद की बैटिंग बहुत क्लास की मानी जाती है, जिसमें वे शानदार खेल दिखाते हैं. उनके पास बैटिंग की शानदार तकनीक है और वे काफी कूल रहकर अपनी बैटिंग करते हैं. शेख रशीद एक आम मध्यमवर्गीय परिवार से हैं और उनके पिता ने उन्हें निखारने के लिए काफी मेहनत की है. शेख रशीद के पिता प्रतिदिन 40 किलोमीटर की दूरी तय करके उन्हें क्रिकेट की कोचिंग दिलाने लाते थे. आईपीएल में अपने डेब्यू से शेख रशीद बहुत खुश हैं और कहा है कि वे अच्छा खेल रहे थे, पर एक गलती हो गई है, आगे के मैचों में वे कोशिश करेंगे कि वे गलतियां ना हों.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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