Pahalgam Attack : ओवैसी और थरूर मजबूती से विदेश में रख रहे मोदी सरकार का रुख, अटल और इंदिरा की आई याद

Pahalgam Attack All-Party Delegation : पहलगाम हमले की सच्चाई और आतंकवाद के खिलाफ भारत द्वारा किए गए ऑपरेशन सिंदूर के बारे में विश्व को बताने और उनका समर्थन हासिल करने के लिए भारत सरकार ने 7 सर्वदलीय डेलीगशन विदेशों में भेजा है. इस डेलीगेशन में गए विपक्षी सांसदों ने जिस मजबूती के साथ भारत का पक्ष वहां रखा है और यह बताया है कि भारत अब आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा वह काबिलेतारीफ है. शशि थरूर और असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं ने जिस मजबूती से अपनी बात विदेश में रखी है, वह सरकार के साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित की है, वह हमें पुराने दिनों की याद ताजा कराता है, जब एक दूसरे के प्रबल विरोधी रहे अटल बिहारी वाजपेयी और इंदिरा गांधी ने विदेश में मतभेद भुलाकर भारत का पक्ष रखा था.

Pahalgam Attack All-Party Delegation : ऑपरेशन सिंदूर पर पूरे देश को गर्व है, देश का हर नागरिक आतंकवाद को मिटाना चाहता है, उक्त बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में रविवार को कही. उन्होंने कहा कि पहलगाम की बर्बर घटना ने पूरे देश को एक साथ खड़ा कर दिया है और सभी यह चाहते हैं कि देश से आतंकवाद का अंत हो. एक ओर प्रधानमंत्री यह बात मन की बात कार्यक्रम में कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सर्वदलीय डेलीगेशन विदेशों में भारत का पक्ष रख रहा है और दुनिया को यह बताया जा रहा है कि किस प्रकार भारत पड़ोसी मुल्क द्वारा फैलाए जा रहे आतंकवाद से ग्रसित है और अबतक संयम बरते हुए है.

देश हित के मुद्दे पर भारत हमेशा एकजुट रहा है

पहलगाम की घटना के बाद से देश में एक बड़ा बदलाव नजर आ रहा है, वो है सभी राजनीतिक पार्टियां साथ खड़ी है. पूरा देश एकता के सूत्र में बंधा नजर आ रहा है. इसे देखकर आम जनता को काफी पॉजिटिव एनर्जी मिल रही है. भारत की परंपरा रही है कि देश में राजनीतिक दलों के बीच चाहे कितने भी विवाद रहे हों, लेकिन देशहित के मुद्दे पर वे एक साथ आ जाते हैं. 1977 में जब अटल बिहारी वाजपेयी संयुक्त राष्ट्र महासभा में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, तो उनसे एक पत्रकार ने पूछा था कि आप इंदिरा गांधी की आलोचना करेंगे, क्योंकि वे अब विपक्ष में हैं, तो अटल जी ने कहा था-इंदिरा गांधी से मेरा विरोध देश में है, विदेश में नहीं. उसी दौर की बात है कि मोरारजी देसाई की सरकार ने इंदिरा गांधी को एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भेजा था, उस वक्त इंदिरा गांधी ने वहां कहा था कि जब बात राष्ट्रीय हित की होती है, तो इंदिरा गांधी महत्वपूर्ण नहीं रह जाती हैं, भारत महत्वपूर्ण हो जाता है.

ओवैसी ने कहा-सरकार से हमारा विरोध राजनीतिक

एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी हमेशा नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की तीखी आलोचना करते हैं, लेकिन सर्वदलीय डेलीगशन का हिस्सा बनकर बहरीन गए एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने वहां सरकार की प्रशंसा की और कहा कि हमारे बीच राजनीतिक मतभेद हैं, लेकिन देशहित के मसले पर हम सब एक हैं. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने हमें यहां भेजा है. हम आपको यह बताना चाहते हैं कि पाकिस्तान एक फेल्योर स्टेट है. वह हमारे देश में आतंकवाद को बढ़ावा देने उन्हें ट्रेनिंग देने और उन्हें फंडिंग करने का काम करता है. वह मुल्क पाकिस्तान ही है, जो हमारे देश को उकसाने का काम करता रहता है, लेकिन हम संयम बरत रहे हैं. उन्होंने कहा कि आप इस आतंकवाद के दुष्परिणाम को समझें, हमारे देश की एक महिला शादी के सातवें दिन विधवा हो गई, कोई दो माह की शादी के बाद विधवा हो गई. हमारी सरकार अपने नागरिकों की रक्षा के लिए हर कदम उठा रही है. लेकिन अब अगर पाकिस्तान ने दुस्साहस किया तो उसे परिणाम भुगतने पड़ेंगे. ओवैसी ने बहरीन की सरकार से कहा कि मैं अनुरोध करता हूं कि आप पाकिस्तान को FATF की ग्रे सूची में वापस लाने में हमारी मदद करेंगे क्योंकि पाकिस्तान उन पैसों का इस्तेमाल आतंकवादियों को समर्थन देने के लिए किया है. ओवैसी बीजेपी सांसद बैजयंत पांडा के नेतृत्व में गई प्रतिनिधिमंडल के सदस्य हैं.

मैं सरकार के लिए काम नहीं करता, लेकिन पहलगाम की घटना ने हमें एकजुट किया है

कांग्रेस नेता शशि थरूर अमेरिका गए डेलीगेशन का हिस्सा हैं और वहां उन्होंने भारत का पक्ष रखते हुए कहा है कि हम आतंकवाद के खिलाफ लड़ रहे है. भारत, पड़ोसी मुल्क द्वारा प्रचारित और प्रसारित आतंकवाद को झेल रहा है, लेकिन अब हमारी सरकार ने इससे निपटने का चतुर तरीका ढूंढ़ निकाला है. शशि थरूर ने कहा कि पहलगाम की घटना ने पूरे देश को एकजुट कर दिया है. हम सबको पता है कि इस तरह की घटनाएं कहां से हमारे देश में रही हैं. हम अब इस तरह के आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे. अमेरिका में भारतीय डेलीगेशन 9/11 के मेमोरियल पर भी गया और अमेरिका को यह संदेश दिया है कि उसकी ही तरह हम भी आतंकवाद के शिकार हैं. शशि थरूर ने वहां अपनी बात रखते हुए कहा कि मैं सरकार के लिए काम नहीं करता, मैं विपक्ष के लिए काम करता हूं. लेकिन हमारी सरकार ने पहलगाम की घटना के बाद जिस तरह 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया, वह स्पष्ट करता है कि हम आतंकवाद को और बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे. सरकार के इस रुख पर सभी एक साथ खड़े हैं और विश्व को भी यह समझना होगा कि आतंकवाद से किसी का भला होने वाला नहीं है.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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