Mughal Harem Stories : शाहजहां ने अपनी बेटी जहांआरा के प्रेमियों को दी थी रूह कंपाने वाली मौत

Mughal Harem Stories 4 : मुगल हरम की दीवारों के पीछे इश्क तो खूब हुए, लेकिन वही इश्क पनपा, जिसे बादशाह की अनुमति थी. मुगल बादशाह की इजाजत के बिना हुए इश्क का अंजाम सिर्फ मौत था. कई राजकुमारियां और युवक इसके शिकार बने. शाहजहां की सबसे प्रिय बेटी जहांआरा भी इससे बच ना सकीं. वो आजीवन बिना शादी के तो रहीं, लेकिन उनके जीवन में इश्क आया और कई बार आया, लेकिन उनका हश्र रूह कंपाने वाला था.

Mughal Harem Stories 4 : मुगल हरम की सबसे ताकतवर और सुशिक्षित महिलाओं में जहांआरा का नाम भी आता है. जहांआरा ना सिर्फ मुमताज महल के बाद हरम की संचालिका थी, बल्कि वह एक प्रसिद्ध कवयित्री भी थी. शासन के कामकाज में भी उसका दखल था. उसे पादशाह बेगम यानी राज्य की पहली महिला का दर्जा प्राप्त था.

कौन थी जहांआरा?

जहांआरा शाहजहां और मुमताज महल की सबसे बड़ी बेटी थी. इतिहासकार किशोरी शरण लाल The Mughal Harem में लिखते हैं कि जहांआरा दारा और औरंगजेब से बड़ी थी. उसके बारे में यह कहा जाता है कि वह बिलकुल मुमताज महल की तरह दिखती थी, इसलिए शाहजहां ने उसका संपर्क किसी और पुरुष से होने नहीं दिया. वह सुशिक्षित महिला थी और मात्र 17 वर्ष की उम्र से ही उसने हरम का संचालन किया था, क्योंकि मुमताज महल की मृत्यु हो गई थी. शाहजहां उससे इतनी मोहब्बत करता था कि उसने अपनी अन्य बीवियों की जगह जहांआरा को ही हरम की जिम्मेदारी सौंपी. मुगल घराने में लड़कियों की शादी 14 वर्ष तक कर दी जाती थी, लेकिन अकबर के समय से जब वहां उत्तराधिकार का युद्ध शुरू हुआ, तो मुगलों ने बेटियों का निकाह करने से परहेज किया, लेकिन जहांआरा के अविवाहित रहने की वजह कुछ और ही थी.

जहांआरा का क्यों नहीं हुआ निकाह?

जहांआरा

जहांआरा अपने पिता की सबसे अजीज संतान थी. इसकी वजह उसकी शक्ल मुमताज महल की तरह होना था. शाहजहां, जहांआरा से इतना प्रेम करता था कि उसने उसके निकाह के बारे में सोचा ही नहीं. मां के निधन के बाद जहांआरा के ऊपर अपने पिता और भाई–बहनों को संभालने की जिम्मेदारी भी थी, जिसकी वजह से उसने निकाह को उतनी तवज्जो नहीं दी. वह हमेशा अपने पिता का ध्यान रखती थी, यहां तक कि जब औरंगजेब ने शाहजहां को जेल में डाल दिया था, उस वक्त भी जहांआरा, शाहजहां की देखभाल के लिए उसके साथ रही थी. हालांकि जहांआरा के जीवन में कई पुरुष आए, जिनके साथ उनके इश्क के चर्चे भी हुए, लेकिन जहांआरा आजीवन कुंवारी ही रहीं.

जहांआरा के प्रेमियों को मिली मौत

जहांआरा जिस उम्र में जिम्मेदारियां उठा रहीं थीं, उस उम्र में इश्क का ख्याल आना कोई बड़ी बात नहीं थी. किशोरी शरण लाल लिखते हैं, जहांआरा के जीवन में भी कई युवक आए, जिनसे उनका संपर्क हुआ, क्योंकि वे राजनीतिक महिला थीं, इसलिए यह संभव नहीं था कि वो किसी पुरुष के संपर्क में ना आए.  फ्रेंच यात्री फ्रेंकोइस बर्नियर ने उनके इश्क के दो किस्से लिखे हैं, जिसपर कई इतिहासकार आपत्ति जताते हैं, लेकिन वे यह भी मानते हैं कि राजकुमारी के प्रेमसंबंध थे. उस लिहाज से बर्नियर के किस्सों को सच माना जा सकता है.

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एक प्रेमी को कढ़ाई में भून दिया गया

मुगल हरम की कहानियां

बर्नियर के अनुसार के अनुसार राजकुमारी पर्दे में तो रहती थीं, लेकिन एक युवक उनसे मिलने आया जो ज्यादा उच्च पद पर तो नहीं था, लेकिन बहुत खूबसूरत था. राजकुमारी के साथ उसके प्रेमसंबंध बन गए, लेकिन हरम में रहने वाली अन्य राजकुमारियों और महिलाओं को यह गंवारा नहीं लगा और उन्होंने इसकी शिकायत शाहजहां से की. शाहजहां को जब यह पता चला कि कोई गैरमर्द जहांआरा के कमरे में है, तो वह सीधा उसके कमरे में आया, उसके आने की सूचना से डरकर वह युवक नहाने के लिए रखे गए विशाल कढ़ाई में छिप गया. शाहजहां ने जहांआरा से उस युवक के बारे में कुछ नहीं कहा, बस इतना ही कहा कि तुम गंदी दिख रही हो थोड़ा नहा लो और अपने सेवकों से उस कढ़ाई को गर्म करने का आदेश दिया. शाहजहां के आदेश से वह कढ़ाई तबतक गर्म की गई जबतक कि वह युवक जलकर मर नहीं गया.

एक प्रेमी को जहर देकर मारा गया

दूसरे प्रेम कहानी का जिक्र करते हुए बर्नियर बताते हैं कि जहांआरा को दोबारा फिर इश्क हुआ, लेकिन इसका अंजाम भी दुखद ही हुआ. जहांआरा को नजर खान नाम के एक फारसी रईस से इश्क हुआ. वह अपनी शालीनता और बुद्धिमानी के लिए जाना जाता था. जहांआरा के मामा शाइस्ता खान भी यह चाहते थे जहांआरा का निकाह उससे हो जाए. लेकिन बादशाह इस सुझाव से बहुत नाराज हुए, क्योंकि उन्हें यह शक था कि जहांआरा और नजर खान के बीच संबंध हैं. उन्होंने पूरे दरबार के सामने उस युवक को एक पान भेंट किया, जिसे खाकर वह युवक अपने घर को चल दिया, लेकिन घर पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई, क्योंकि शाहजहां से उसे जहर मिला हुआ पान खिला दिया था.  जहांआरा को भले ही वैवाहिक जीवन का सुख नहीं मिला, लेकिन वह राजनीतिक रूप से सक्रिय रही. उसकी बुद्धिमत्ता के चर्चे हमेशा हुए, साथ ही उसका अपने पिता के प्रति जो प्रेम था वह काबिलेगौर है. 67 वर्ष की उम्र में उसकी मौत हुई. उसने अपना मकबरा अपनी जीवनकाल में ही बनवा लिया था.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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