सोचिए, देश के सबसे बड़े राजनीतिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट होता है.
10 घंटे बाद-
1 करोड़ लाइक 8.2 लाख कमेंट 7 लाख रीशेयर 40 लाख सेंड 3.5 लाख सेव
और यह कोई मनोरंजन का वीडियो नहीं है.
न कोई फिल्मी गाना. न कोई क्रिकेट का हाइलाइट. न कोई सेलिब्रिटी का बयान.
यह वीडियो बात करता है उस परीक्षा की, जिसके लिए भारत के लाखों बच्चे वर्षों तक पढ़ते हैं और उनके माता-पिता अपनी जमा-पूंजी तक लगा देते हैं- NEET.
यह बात करता है पेपर लीक के आरोपों की. उन छात्रों की बेचैनी की, जिनका भविष्य एक परीक्षा से जुड़ा है. उन माता-पिताओं के गुस्से की, जिन्होंने अपने बच्चों के सपनों के लिए वर्षों तक संघर्ष किया.
और फिर सवाल उठता है-
इतने बड़े स्तर पर इस वीडियो का असर क्या हुआ?
क्या यह केवल एक वायरल वीडियो है?
या फिर यह एक ऐसा डिजिटल संदेश बन चुका है, जिसे लोग एक-दूसरे तक पहुंचा रहे हैं?
10 घंटे में 1.5 करोड़ से ज्यादा इंटरैक्शन
नरेंद्र मोदी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर करीब 10.1 करोड़ फॉलोअर्स हैं.
अब इस वीडियो के आंकड़ों को समझिए.
10 घंटे में-
1 करोड़ लाइक.
यानी लगभग हर 10 फॉलोअर्स में से 1 ने वीडियो को लाइक किया.
फिर आते हैं 8.2 लाख कमेंट.
कमेंट सिर्फ एक क्लिक नहीं होता। लाइक करने में एक सेकंड लगता है. लेकिन कमेंट करने के लिए व्यक्ति को रुकना पड़ता है, सोचना पड़ता है और अपनी बात लिखनी पड़ती है.
8.2 लाख कमेंट का मतलब है कि इस वीडियो ने लोगों को प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर किया.
लेकिन सबसे बड़ा आंकड़ा अभी बाकी है.
40 लाख सेंड.
यानी 40 लाख बार लोगों ने इस वीडियो को किसी दूसरे व्यक्ति को भेजा.
यहीं से इस वीडियो की असली कहानी शुरू होती है.
लाइक सार्वजनिक होता है, सेंड निजी होता है
लाइक दिखाई देता है.
लेकिन सेंड अक्सर दिखाई नहीं देता.
आप किसी वीडियो को लाइक करते हैं तो दुनिया को पता चल जाता है कि आपने उसे पसंद किया.
लेकिन जब आप उसे किसी दोस्त, भाई, बहन, बच्चे, माता-पिता या किसी ग्रुप में भेजते हैं, तो आप एक अलग संदेश दे रहे होते हैं.
आप कह रहे होते हैं-
“इसे देखो.”
कभी इसका अर्थ होता है-
“यह बात सही है.”
कभी-
“देखो, सरकार ने क्या कहा है.”
और कभी-
“इस पर तुम्हारी क्या राय है?”
NEET जैसे संवेदनशील मुद्दे पर 40 लाख सेंड का आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बताता है कि वीडियो सिर्फ देखा नहीं गया.
वीडियो बातचीत का हिस्सा बना.
किसी छात्र ने अपने दोस्त को भेजा होगा.
किसी अभिभावक ने अपने बच्चे को.
किसी शिक्षक ने अपने छात्रों के ग्रुप में.
किसी राजनीतिक समर्थक ने अपने नेटवर्क में.
और किसी आलोचक ने भी शायद इसे चर्चा के लिए आगे भेजा हो.
सोशल मीडिया पर हर शेयर समर्थन नहीं होता.
लेकिन हर शेयर एक बात जरूर बताता है-
यह कंटेंट लोगों के लिए महत्वपूर्ण है.
यह केवल एक परीक्षा नहीं है
NEET सिर्फ एक परीक्षा का नाम नहीं है.
यह लाखों परिवारों की कई वर्षों की मेहनत का नाम है.
एक बच्चा 11वीं से तैयारी शुरू करता है.
सुबह जल्दी उठना.
कोचिंग जाना.
स्कूल और कोचिंग के बीच संतुलन बनाना.
टेस्ट देना.
गलतियों को सुधारना.
दोबारा पढ़ना.
फिर परीक्षा देना.
और इस पूरी प्रक्रिया में माता-पिता भी उसके साथ चलते हैं.
कई परिवारों के लिए यह आर्थिक संघर्ष भी है.
कोचिंग फीस.
हॉस्टल.
किताबें.
यात्रा.
और कभी-कभी एक छोटे शहर से बड़े शहर तक जाकर तैयारी करने का खर्च.
इसलिए जब परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठता है, तो यह केवल एक परीक्षा का विवाद नहीं रह जाता.
यह सवाल बन जाता है-
क्या मेहनत करने वाले बच्चे को उसका अधिकार मिलेगा?
यही कारण है कि पेपर लीक का मुद्दा भावनात्मक रूप से इतना बड़ा बन गया.
यह सिर्फ छात्रों का सवाल नहीं था.
यह माता-पिता का सवाल था.
यह भरोसे का सवाल था.
इस वीडियो ने पहले से मौजूद गुस्से को पकड़ा
यह समझना भी जरूरी है कि वीडियो ने लोगों का गुस्सा पैदा नहीं किया.
छात्रों और अभिभावकों के बीच पहले से नाराजगी थी.
परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर सवाल थे.
सोशल मीडिया पर बहस चल रही थी.
प्रदर्शन हो रहे थे.
राजनीतिक दल अपना-अपना पक्ष रख रहे थे.
ऐसे समय में जब समाज पहले से किसी मुद्दे को लेकर भावनात्मक रूप से सक्रिय हो, तब किसी बड़े नेता का संदेश बहुत तेजी से फैल सकता है.
यही यहां हुआ.
वीडियो एक ऐसी बातचीत में पहुंचा, जो पहले से चल रही थी.
लेकिन अब उस बातचीत में प्रधानमंत्री का सीधा संदेश भी शामिल हो गया.
यही राजनीतिक संचार की ताकत है.
820 हजार कमेंट क्या बताते हैं?
कमेंट सेक्शन किसी भी राजनीतिक वीडियो का सबसे जटिल हिस्सा होता है.
क्योंकि यहां हर प्रतिक्रिया समर्थन में नहीं होती.
कुछ लोग सरकार के पक्ष में लिखते हैं.
कुछ आलोचना करते हैं.
कुछ सीधे कार्रवाई की मांग करते हैं.
कुछ अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हैं.
कुछ छात्र अपनी परेशानी लिखते हैं.
कुछ माता-पिता अपनी नाराजगी व्यक्त करते हैं.
इसलिए 8.2 लाख कमेंट को सीधे-सीधे 8.2 लाख समर्थन नहीं कहा जा सकता.
लेकिन एक बात साफ है-
वीडियो ने लोगों को बोलने के लिए मजबूर किया.
और लोकतंत्र में किसी मुद्दे पर लोगों का बोलना अपने आप में एक महत्वपूर्ण सामाजिक संकेत है.
7 लाख रीशेयर और 40 लाख सेंड में अंतर
रीशेयर सार्वजनिक विस्तार है.
आप किसी वीडियो को अपनी प्रोफाइल या नेटवर्क पर आगे बढ़ाते हैं.
सेंड व्यक्तिगत विस्तार है.
आप उसे किसी खास व्यक्ति या ग्रुप तक पहुंचाते हैं.
जब दोनों आंकड़े एक साथ इतने बड़े हों, तो संदेश का प्रसार केवल एकतरफा नहीं रहता.
वह कई दिशाओं में फैलने लगता है.
एक व्यक्ति वीडियो देखता है.
वह उसे पांच लोगों को भेजता है.
उनमें से कोई दो लोग आगे भेजते हैं.
किसी ग्रुप में चर्चा शुरू होती है.
फिर वही वीडियो किसी दूसरे प्लेटफॉर्म पर पहुंचता है.
इस तरह एक राजनीतिक संदेश केवल अपने मूल अकाउंट तक सीमित नहीं रहता.
वह लोगों के निजी नेटवर्क में प्रवेश करता है.
और जब कोई संदेश निजी बातचीत में पहुंच जाता है, तो उसका प्रभाव अक्सर सार्वजनिक पोस्ट से ज्यादा गहरा हो सकता है.
3.5 लाख सेव: कम संख्या, लेकिन महत्वपूर्ण संकेत
लाइक तत्काल प्रतिक्रिया है.
कमेंट तत्काल प्रतिक्रिया है.
सेंड तत्काल प्रसार है.
लेकिन सेव कुछ अलग बताता है.
जब कोई व्यक्ति किसी राजनीतिक वीडियो को सेव करता है, तो वह भविष्य में उसे फिर देखना चाहता है.
350,000 सेव यह संकेत देते हैं कि एक बड़ी संख्या में लोगों ने इस संदेश को केवल उसी समय के लिए नहीं देखा.
उन्होंने उसे अपने पास रखा.
यह संख्या लाइक की तुलना में छोटी है, लेकिन राजनीतिक कंटेंट के लिए महत्वपूर्ण है.
लेकिन क्या इसका मतलब है कि 1 करोड़ लोग सरकार से सहमत हैं?
नहीं.
यह निष्कर्ष निकालना गलत होगा.
सोशल मीडिया पर engagement और approval एक ही चीज नहीं हैं.
कोई व्यक्ति वीडियो को लाइक कर सकता है क्योंकि उसे संदेश पसंद आया.
कोई उसे भेज सकता है क्योंकि वह उससे असहमत है.
कोई कमेंट कर सकता है क्योंकि वह नाराज है.
इसलिए इन आंकड़ों से हम यह कह सकते हैं कि वीडियो ने-
ध्यान खींचा. भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा की. बातचीत शुरू की. और बड़े पैमाने पर प्रसारित हुआ.
लेकिन यह नहीं कह सकते कि हर इंटरैक्शन सरकार के समर्थन में था.
उसके लिए कमेंट्स का sentiment analysis करना होगा.
देखना होगा-
कितने कमेंट सकारात्मक हैं?
कितने नकारात्मक?
कितने कार्रवाई की मांग कर रहे हैं?
कितने व्यक्तिगत अनुभव साझा कर रहे हैं?
तभी वास्तविक जनभावना को समझा जा सकता है. प्रभात खबर UPSC पर खास कवरेज कर रहा है, ताकि आपको एक्सपर्ट गाइडेंस के लिए कहीं और न जाना पड़े. UPSC परीक्षाओं से जुड़ी सभी ताजा जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहें.
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असली प्रभाव क्या है?
इस वीडियो का सबसे बड़ा प्रभाव शायद यह नहीं है कि इसे कितने लोगों ने देखा.
सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि कितने लोगों ने इसे आगे पहुंचाया.
क्योंकि आज के डिजिटल दौर में किसी संदेश की ताकत केवल उसके दर्शकों की संख्या से नहीं मापी जाती.
यह भी देखा जाता है कि वह संदेश लोगों के व्यवहार को कितना बदलता है.
क्या लोगों ने उसे शेयर किया?
क्या उस पर बहस की?
क्या उसे सेव किया?
क्या उस पर प्रतिक्रिया दी?
इस वीडियो के आंकड़े बताते हैं कि लोगों ने चारों स्तरों पर प्रतिक्रिया दी.
इसलिए 10 घंटे के प्रदर्शन को सिर्फ एक वायरल इंस्टाग्राम रील कहना कम होगा.
यह एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे पर डिजिटल जन-संवाद का उदाहरण है.
अंतिम बात
NEET विवाद ने पहले से ही छात्रों और माता-पिता के बीच गहरी बेचैनी पैदा कर रखी थी.
इस वीडियो ने उस बेचैनी के बीच एक आधिकारिक राजनीतिक संदेश को सीधे करोड़ों लोगों तक पहुंचाया.
1 करोड़ लाइक 8.2 लाख कमेंट 7 लाख रीशेयर 40 लाख सेंड 3.5 लाख सेव
कुल मिलाकर 1.587 करोड़ से ज्यादा दर्ज इंटरैक्शन.
और इनमें सबसे बड़ा संकेत है-
40 लाख सेंड.
क्योंकि जब लोग किसी वीडियो को किसी दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाते हैं, तो वह वीडियो सिर्फ कंटेंट नहीं रहता.
वह बातचीत बन जाता है.
और जब वह बातचीत लाखों निजी चैट, ग्रुप और परिवारों तक पहुंचती है, तब सोशल मीडिया का असली प्रभाव दिखाई देता है.
इसलिए इस रील का निष्कर्ष सिर्फ इतना नहीं है कि-
यह बहुत वायरल हुई.
सही निष्कर्ष शायद यह है-
इस वीडियो ने NEET विवाद पर चल रही राष्ट्रीय बातचीत में खुद को बहुत तेजी से शामिल कर लिया है.
इसने लोगों का ध्यान खींचा है.
लोगों को प्रतिक्रिया देने पर मजबूर किया है.
लोगों को इसे आगे भेजने के लिए प्रेरित किया है.
और लाखों निजी बातचीत में प्रवेश किया है.
अब अंतिम सवाल यह नहीं है कि वीडियो कितना चला.
अंतिम सवाल यह है-
इस वीडियो के बाद लोगों की राय कितनी बदली?
उसका जवाब लाइक काउंट में नहीं मिलेगा.
उसके लिए कमेंट्स पढ़ने होंगे.
भावनाओं को समझना होगा.
और देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह डिजिटल प्रतिक्रिया वास्तविक सार्वजनिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया में कितनी बदलती है. यह भी पढ़ें : 20 जुलाई… Modi 3 vs Protest 3
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