Iran Israel Strikes : मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, क्या तेल आपूर्ति पर पड़ेगा प्रभाव?

Israel Iran News : इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध से मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है और संभावना जताई जा रही है कि इस युद्ध में अभी और देश कूद सकते हैं. इजरायल और ईरान के बीच अगर युद्ध लंबा खिंचा तो तेल की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है, क्योंकि ईरान ने कई बार यह कहा है कि अगर उसपर हमला हुआ तो वो होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर देगा, जो खाड़ी देशों का प्रमुख व्यापारिक समुद्री मार्ग है. होर्मुज जलडमरूमध्य को अगर बाधित किया गया, तो भारत में भी तेल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है.

Israel Iran News : इजरायल और ईरान के बीच दुश्मनी का इतिहास काफी पुराना है. 1979 में जब ईरान में इस्लामी क्रांति हुई तो आयतुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के पास सत्ता आई और देश में शरीयत कानून लागू हुआ और इजरायल के साथ तमाम संबंध तोड़ लिए गए और उसे एक अवैध राज्य भी घोषित कर दिया गया था. हालिया विवाद तब बढ़ा जब 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर हमला कर दिया. इजरायल इस हमले के लिए ईरान को ही दोषी मानता है.

इजरायल ने ईरान पर हमला क्यों किया?

इजरायल का ऐसा मानना है कि ईरान अपनी धरती से इजरायल विरोधी गतिविधियों और संगठनों को बढ़ावा दे रहा है. 7 अक्टूबर 2023 को जब हमास ने इजरायल पर हमला किया और इस हमले में लगभग 1200 लोगों की मौत हुई, तो इजरायल बहुत नाराज हुआ और उसने ईरान को सबक सिखाने की बात की थी. उसी योजना के तहत इजरायल ने अप्रैल 2024 में सीरिया की राजधानी दमिश्क में ईरानी दूतावास को निशाना बनाया था. इजरायल का कहना दावा था कि ईरानी दूतावास में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कुद्स फोर्स के लोगों को जगह दी गई थी. 2023 से ही इजरायल ईरान को टारगेट कर रहा है और उसी आधार पर इजरायल ने वृहस्पतिवार 12 जून से को ईरान पर हमला किया.

इजरायल के हमले में ईरान को कितना हुआ नुकसान

इजरायल के हमले में ईरान के दो शीर्ष सैन्य कमांडर भी मारे गए. इनके नाम है जनरल मोहम्मद बाघेरी और जनरल हुसैन सलामी. इजरायल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ढांचे पर हमला किया. इस हमले को इजरायल ने Operation Rising Lion नाम दिया है. इजरायल का दावा है कि उसने ईरान की आर्मी Islamic Revolutionary Guard Corps के ठिकानों पर हमला किया है. तेहरान में IRGC मुख्यालय को टारगेट किया गया है. इजरायल के हमले में IRGC एयर डिफेंस और ड्रोन यूनिट्स का हेडक्वार्टर तबाह हो गया है. इसके अलावा यूरेनियम के केंद्रों पर भी हमला किया गया है. इजरायल ने यह दावा किया है कि उसने ईरान के रॉकेट और बैलिस्टिक मिसाइल निर्माण-स्थल केंद्रों को भी निशाना बनाया है. ईरान ने भी इस बात को स्वीकारा है कि उसके 6 परमाणु वैज्ञानिक और 5 शीर्ष कमांडर इजरायी हमले में मारे गए हैं. ईरान ने इन हमलों को अपराध बताते हुए कहा है कि इजरायल ने अपराध किया है और उसे इस बात की सजा मिलेगी.

ईरान के जवाबी हमले से तेल अवीव पर खतरा

तेल अवीव पर खतरा

इजरायल के हमले के बाद ईरान ने भी 100 मिसाइल दागे हैं, जिससे इजरायल के प्रमुख शहर तेल अवीव में हंगामा मच गया. 13 जून की रात को ईरान ने इजरायल पर हमला ईरान ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस के तहत इजरायल के तेल अवीव और यरूशलेम पर 100 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागें. इसका परिणाम यह हुआ कि इजरायल की वर्ड फेमस एयर डिफेंस सिस्टम आयरन डोम और डेविड स्लिंग भी सभी मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने में सफल नहीं हो सका. इसके बाद तेल अवीव के आसमान में बमबारी शुरू हो गई, हालांकि अधिकतर मिसाइल को इंटरसेप्ट कर दिया गया है. जो मिसाइलें अपना काम करने में सफल रहीं उनकी वजह से तेल अवीव में कई अपार्टमेंट ध्वस्त हो गए और तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 100 लोगों के घायल होने की खबर है.

क्या मिडिल ईस्ट में तनाव बनेगा थर्ड वर्ल्ड वार की वजह

इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान ने जो किया है, उसका परिणाम उसे भुगतना पड़ रहा है. अमेरिका के इस बयान से यह स्पष्ट है कि अमेरिका इजरायल के साथ खड़ा है. इजरायल को हमेशा ही अमेरिका का समर्थन मिलता रहा है. वहीं दूसरी ओर चीन ने ईरान का समर्थन कर दिया है और कहा है कि इजरायल जो कुछ कर रहा है, वह बहुत गलत है. संयुक्त राष्ट्र में चीन के प्रतिनिधि फू कांग ने कहा कि इजरायल ने ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन किया है और बिलकुल गलत है. संयुक्त राष्ट्र को इजरायली कार्रवाई की निंदा करनी चाहिए क्योंकि इजरायल ने रेड लाइन को क्राॅस कर दिया है. अमेरिका और चीन के इस मामले में बयान देने से यह स्पष्ट है कि इजरायल और ईरान के बीच जो विवाद खड़ा हुआ है उसका दुनिया भर पर प्रभाव पड़ेगा. हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि विश्व थर्ड वर्ल्ड वार की ओर जा रहा है. इसकी वजह यह है कि इजरायल और ईरान के बीच विवाद बहुत पुराना है. फिलिस्तीन के मुद्दे को लेकर इनके बीच विवाद होता रहता है. लेकिन यह कहने में भी गुरेज नहीं है कि अगर अमेरिका, चीन और रूस लगातार इस विवाद में पड़ते रहते और वैश्विक तेल आपूर्ति पर प्रभाव पड़ता है, तो वर्ल्ड वार की आशंका बन सकती है.

इजरायल-ईरान युद्ध से दुनिया भर में तेल आपूर्ति पर क्या होगा असर?

इजरायल-ईरान युद्ध का जो सबसे बड़ा खतरा है वह है वैश्विक तेल उत्पादन पर प्रभाव. इसकी वजह यह है कि ईरान हमेशा यह कहता रहा है कि अगर उसपर हमला हुआ तो वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर देगा. अगर ईरान ऐसा करता है तो विश्व भर में तेल और एलएनजी की कीमत में भारी बढ़ोतरी हो सकती है. होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी (पश्चिम) को ओमान की खाड़ी और अरब सागर (दक्षिणपूर्व) से जोड़ता है. खाड़ी देश अपने व्यापार के लिए इसी मार्ग पर आश्रित हैं. विश्व के लगभग 30% कच्चे तेल का व्यापार यहीं से होता है, ऐसे में अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित हुआ तो उसका बड़ा प्रभाव दुनिया पर होगा. भारत पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा और तेल की कीमतों में प्रति लीटर 10-15 रुपए की बढ़ोतरी हो सकती है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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