क्या 72 की उम्र में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पत्नी कर रही हैं दादागिरी, जानिए थप्पड़ का सच

Emmanuel Macron : ना उम्र की सीमा हो, ना जन्म का हो बंधन, जब प्यार करे कोई तो देखे केवल मन. इस खूबसूरत प्रेमगीत को लिखा है जगजीत सिंह और इंदीवर ने. यह खूबसूरत गीत फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिगिट मैक्रों की प्रेम कहानी पर बिलकुल सटीक बैठता है. हालांकि जब इनका प्रेम पनपा था उस वक्त इमैनुएल महज 15 साल के थे और ब्रिगिट 39 साल की थीं और तीन बच्चों की मां थीं. इनके प्रेम को नैतिकता की कसौटी पर भी कसा गया और अब जबकि इनका एक वीडियो वायरल है, जिसमें ब्रिगिट, इमैनुएल के चेहरे पर जोर से धक्का मारती नजर आ रही हैं. यह वीडियो फेक नहीं इस बात की पुष्टि खुद इमैनुएल मैक्रों ने की है, तो फिर क्या है इसका सच इनकी प्रेम कहानी.

Emmanuel Macron : फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिगिट मैक्रों का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है. इस वीडियो में ब्रिगिट मैक्रों अपने पति के चेहरे पर प्रहार करती नजर आ रही हैं. दरअसल यह वीडियो वियतनाम की राजधानी हनोई का है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपनी पत्नी के साथ यहां राजकीय दौरे पर थे. एयरपोर्ट पर जैसे ही विमान का दरवाजा खुलता है, इमैनुअल मैक्रों नजर आते हैं, लेकिन वे संभवत: किसी से बात कर रहे होते हैं, उसी वक्त उनके चेहरे पर उनकी पत्नी का हाथ नजर आता है, जिसके बाद मैक्रो असहज हो जाते हैं और बाहर देखकर हाथ हिलाते हैं और विमान में अंदर चले जाते हैं. दरअसल उनकी अगुवाई के लिए मीडिया और विशिष्टजन खड़े थे, इसलिए विमान में मैक्रों के साथ जो कुछ हुआ, उसे सबने खुली आंखों से भी देखा और यह दृश्य रिकाॅर्ड भी हो गया. उसके बाद से सोशल मीडिया में इमैनुएल मैक्रों और उनकी शादी की खूब चर्चा हो रही है. दरअसल इमैनुएल मैक्रों और ब्रिगिट मैक्रों की शादी सामान्य शादियों से अलग है.

इमैनुएल मैक्रों और ब्रिगिट मैक्रों की कब हुई थी शादी

इमैनुएल मैक्रों और ब्रिगिट मैक्रों की मुलाकात 1993 में हुई थी, उस वक्त इमैनुएल सिर्फ 15 साल के थे और ब्रिगिट 39 साल के थे. इन दोनों की मुलाकात फ्रांस के अमियंस(Amiens) शहर के एक स्कूल में हुई थी. ब्रिगिट इमैनुएल की टीचर थीं वे फ्रेंच और ड्रामा पढ़ाती थीं. दरअसल ब्रिगिट, इमैनुएल के थिएटर ग्रुप की मेंटर थीं. ब्रिगिट, मैक्रों को उसी वक्त से बहुत पसंद करती थीं, क्योंकि वे एक अच्छे कलाकार थे और बेहतरीन लेखन भी करते थे. इनदोनों का जुड़ाव इसी वजह से हुआ. पहले इन दोनों ने साथ समय गुजारना शुरू किया और फिर एक दूसरे से जुड़ते चले गए. ब्रिगिट की बेटी इमैनएल की सहपाठी थी. जब इनके संबंधों खुलासा हुआ, तो चर्चाएं शुरू हो गई और इमैनुल के माता-पिता ने उन्हें ब्रिगिट से दूर करने के लिए उनका स्कूल बदलवा दिया.

इमैनुएल और ब्रिगिट के लिए आग का दरिया साबित हुआ प्रेम

इमैनुएल मैक्रों और ब्रिगिट मैक्रों

इमैनुएल और ब्रिगिट के बीच जब प्रेम पनपा उस वक्त ब्रिगिट आंद्रे-लुई औजिएर की पत्नी और तीन बच्चों की मां थीं. इमैनुएल और ब्रिगिट के बीच उम्र का अंतर भी 24 साल का था, इस वजह से इस संबंध को अनैतिक और समाज के लिए नुकसानदायक बताया जा रहा था. इमैनुएल के माता-पिता ने ब्रिगिट के साथ उनके रिश्ते को उम्र का दोष माना और उन्हें पढ़ाई के लिए पेरिस भेज दिया. लेकिन इमैनुएल ब्रिगिट को दिलो-जान से चाहते थे और ब्रिगिट से दूरी के बावजूद उन्होंने अपना प्यार जिंदा रखा. इमैनुएल ने ब्रिगिट से कहा था – तुम कुछ भी करो, क्योंकि मुझे तुमसे शादी करनी है. ग्रेजुएशन के बाद इमैनुएल और ब्रिगिट एक बार फिर मिले और इनके प्यार को समाज के ताने सुनने पड़े. सामाजिक बहिष्कार के बावजूद दोनों का प्यार परवान चढ़ता रहा और अंतत ब्रिगिट ने तलाक लेने का फैसला किया. ब्रिगिट के इस फैसले से हंगामा मच गया क्योंकि ब्रिगिट के साथ उनके रिश्ते को अनैतिक माना जा रहा था.

तमाम तानों और विरोध के बावजूद 2007 में इमैनुएल और ब्रिगिट की हुई शादी

इमैनुएल के प्यार में ब्रिगिट ने 2006 में अपने पति से तलाक ले लिया. ब्रिगिट ने इमैनुएल के लिए अपने 32 साल पुराने विवाह को तोड़ दिया और 20 अक्टूबर 2007 में दोनों की शादी हो गई. जिस वक्त इमैनुएल और ब्रिगिट की शादी हुई थी उस समय ब्रिगिट 54 साल की थीं और इमैनुएल 29 साल के थे. इन दोनों की शादी से कोई बच्चा नहीं है, लेकिन ब्रिगिट के तीन बच्चे पहली शादी से हैं. ब्रिगिट के बच्चों में से एक लॉरेंस औजिएर-जॉर्डन इमैनुएल की सहपाठी थीं. चूंकि ब्रिगिट के बच्चे और इमैनुएल एक ही उम्र के हैं, इसलिए इनके संबंध मित्रवत हैं और इन्होंने अपनी मां और इमैनुएल के रिश्तों को स्वीकार कर लिया है. वे साथ में समय बिताते हैं और ब्रिगिट के पोते-पोतियों को इमैुनएल भी पसंद करते हैं. इमैनुएल और ब्रिगिट की शादी जिस वक्त हुई थी, ब्रिगिट 54 साल की थीं और आमतौर पर उस उम्र में मां बनना संभव नहीं होता है.

काफी मजबूत है इमैनुएल और ब्रिगिट का संबंध

इमैुनएल और ब्रिगिट के संबंध काफी मजबूत और मधुर हैं. दोनों हमेशा एक दूसरे का साथ देते हैं और एक दूसरे से प्यार करते हैं. अपनी शादी में इमैनुएल मैक्रों ने कहा था मैं ब्रिगिट से नहीं भागा, मैंने उनसे प्यार किया. हम दोनों ने अपने रिश्ते के लिए दुनिया से लड़ाई लड़ी है. राष्ट्रपति बनने के बाद भी मैक्रों ने हमेशा ब्रिगिट को अपना सबसे मजबूत सहारा और सलाहकार बताया. ब्रिगिट ने भी फ्रांस की पहली महिला के तौर पर अपने दायित्वों को निभाया है और शिक्षा और बच्चों के मुद्दों पर काफी काम किया है. इमैनुएल मैक्रों ने अपने वायरल वीडियो पर कहा कि यह वीडियो सच है, लेकिन इसे जिस तरह पेश किया जा रहा है, वो गलत है. हम दोनों उस वक्त किसी मसले पर बात कर रहे थे और मैं उसे चिढ़ा रहा था, उसी वक्त का यह वीडियो है, लेकिन इसे आपदा के तौर पर पेश किया जा रहा है. इमैनुएल और ब्रिगिट ने एक साथ लगभग 18 वर्ष बीता लिए हैं, उम्मीद है उनका रिश्ता और मजबूत होगा, क्योंकि जिस तरह उन्होंने अपने रिश्ते के लिए लड़ाइयां लड़ी वह काबिलेगौर है. आज के समय में ब्रिगिट 72 और इमैनुएल 48 साल के हैं.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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