Dilip Ghosh : 61 की उम्र में दिलीप घोष को भा गईं रिंकू मजूमदार, सिंतबर में किया था प्रपोज

Dilip Ghosh : बंगाल बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष, अपने बयानों के लिए चर्चित और आरएसएस के प्रचारक रहे दिलीप घोष की शादी की खबर हाॅट केक बनी हुई है. सभी यह जानना चाहते हैं कि 61 की उम्र तक कुंवारे रहने वाले दिलीप घोष आखिर अब शादी क्यों कर रहे हैं? रिंकू मजूमदार वह महिला हैं, जिन्होंने अकेले दिलीप घोष को सहारा दिया है और उनके अकेलेपन को मिटाने का काम किया है.

Dilip Ghosh : दिलीप घोष ने लगभग 61 की उम्र में शादी का फैसला किया और पार्टी की ही एक सहयोगी रिंकू मजूमदार से शादी कर रहे हैं. 18 अप्रैल को ही उनकी शादी होनी है. दिलीप घोष और रिंकू मजूमदार की शादी, कोलकाता में ही नहीं पूरे देश में चर्चा का विषय है. वजह सिर्फ इतनी ही है कि दिलीप घोष ने 61 की उम्र में शादी का फैसला किया है. आरएसएस के प्रचारक रहे दिलीप घोष ने 60 की उम्र तक सिंगल रहने का निर्णय किया था और अब वे कह रहे हैं कि क्या शादी करना अपराध है?

दिलीप घोष शादी के लिए क्यों मान गए

बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष रहे दिलीप घोष शादी करने को लेकर काफी गंभीर नहीं रहे थे. आरएसएस के प्रचारक होने की वजह से उनकी रुचि विवाह जैसी संस्था में नहीं रही थी,लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें एक साथी की जरूरत महसूस हो गई. दिलीप घोष अपनी मां के साथ अकेले रहते हैं. 61 के दिलीप घोष हैं, तो मां की उम्र भी काफी हो चुकी है, इन हालात में दिलीप घोष के ऊपर मां शादी करने के के लिए हमेशा दबाव बनाती थीं, ताकि उनके जाने के बाद दिलीप घोष अकेले ना रहें. इसी दौर में उन्हें रिंकू मजूमदार ने प्रपोज किया और संभवत: रिंकू उनके दिल को भा गई और उन्होंने साथ रहने का फैसला कर लिया.

रिंकू मजूमदार ने कब किया दिलीप घोष को प्रपोज

रिंकू मजूमदार साल 2013 से बीजेपी से जुड़ी हैं. दिलीप घोष से मिलना तो होता था, लेकिन उन्होंने कभी उनसे बातचीत नहीं की थी. जब वे सांसद थे, उनके बीच संवाद कभी नहीं हुआ, उस वक्त रिंकू ब्लॉक लेवल पर काम करती थीं. उनकी बातचीत दिलीप घोष से 2021 के चुनाव से पहले हुई. संवाद प्रतिदिन के साथ बातचीत में रिंकू मजूमदार ने बताया कि वे बहुत ईमानदार हैं. मैं उनसे प्रभावित तो थी, पर शादी या अफेयर जैसा हमारे बीच कुछ भी नहीं था.लोकसभा चुनाव के दौरान भी हमारी बातचीत हुई, पर वह बिलकुल सामान्य बातचीत थी. सिंतबर में मैंने अपने बारे में सोचना शुरू किया, क्योंकि मैं अकेली हूं. बेटे के प्रति जो जिम्मेदारी है, उसे मैंने पूरा किया. समाज, परिवार और राजनीति के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी निभाई है. मैं अब उम्र के उस दौर में हूं, जहां मैंने अपने बारे में सोचा, क्योंकि जीवन का यह ऐसा दौर है, जहां आप अकेले रह जाते हैं, इसलिए मुझे साथी चाहिए था. मैं यह भी चाहती थी कि वह मेरे शहर का हो, मेरे राजनीतिक जीवन से उसे कोई आपत्ति ना हो, तब मुझे दिलीप जी नजर आए, जो हमारे इलाके के सबसे योग्य कुंवारे थे. मैंने उन्हें प्रपोज किया, शुरुआत में उन्होंने रुचि नहीं दिखाई, फिर मां से बात की और तीन महीने बाद मुझे सूचना दी.

शादी के वक्त धोती-कुर्ता पहनेंगे दिलीप घोष

दिलीप घोष अपनी शादी में पारंपरिक धोती कुर्ता में नजर आएंगे. वहीं रिंकू बहुत उत्साहित हैं. वो बनारसी साड़ी में दुल्हन बनेंगी. शाखा-पोला (बंगाली महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाले चूड़ी) भी पहनेंगी और दुल्हन की तरह सजेंगी भी. उन्हें मनचाहा साथी मिला है.

अकेले हैं दिलीप घोष, रिंकू ने दिया साथ

दिलीप घोष के करीबी संघ से जुड़े उनके एक साथी ने बताया कि दिलीप घोष अकेले हैं, अब चुनाव भी हार चुके हैं. ऐसे मुश्किल वक्त में रिंकू मजूमदार ने उनका साथ दिया है. मां का भी दबाव है, एक उम्र के बाद एकांकीपन परेशान करता है. दिलीप दा ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने शादी को बहुत महत्व नहीं दिया था, लेकिन अब उन्हें इसकी जरूरत महसूस हुई है, साथ रहने वाला भी कोई होना चाहिए, जिससे संवाद हो सके. शादी बहुत सीमित लोगों के बीच होगी, निश्चित तौर पर उनकी मां इस अवसर पर आशीर्वाद देने के लिए मौजूद रहेंगी.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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