कश्मीर घाटी तक सीधी पहुंच

Z-Morh Tunnel : माना जा रहा है कि इस सुरंग के बनने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा. बेहतर कनेक्टिविटी होने से वस्तुओं और सेवाओं के परिवहन को गति मिलेगी. स्थानीय उत्पादकों और व्यापारियों के लिए नये बाजार तक पहुंच आसान हो जायेगी.

Z-Morh Tunnel : सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले के सोनमर्ग क्षेत्र में जेड-मोड़ सुरंग का उद्घाटन किया. इस दौरान जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, एलजी मनोज सिन्हा और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी उपस्थित रहे. इस सुरंग को लगभग 2,700 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है. यह गगनगीर से सोनमर्ग को जोड़ेगी, जिससे हर मौसम में कश्मीर घाटी तक पहुंच आसान हो जायेगी. यह सुरंग 6.5 किलोमीटर लंबी है और 8,562 फीट की ऊंचाई पर स्थित है.

गगनगीर से सोनमर्ग तक की सड़कों पर सर्दियों के दौरान अक्सर हिमस्खलन होता है, जिससे श्रीनगर से सोनमर्ग तक पहुंच मुश्किल हो जाती है. बर्फीले तूफान, हिमस्खलन और भारी बर्फबारी से यहां के लोगों का जनजीवन भी अस्त-व्यस्त हो जाता है. पर्यटन प्रभावित होता है सो अलग. सामरिक और आर्थिक महत्व का होने के कारण यह सुरंग न केवल जम्मू-कश्मीर के लिए, बल्कि भारत के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है. माना जा रहा है कि इस सुरंग के बनने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा. बेहतर कनेक्टिविटी होने से वस्तुओं और सेवाओं के परिवहन को गति मिलेगी. स्थानीय उत्पादकों और व्यापारियों के लिए नये बाजार तक पहुंच आसान हो जायेगी.

सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने जेड-मोड़ सुरंग के खुलने के बाद से व्यापार में 30 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान जताया है. सुरंग इस क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा देगा, जिससे आतिथ्य सेवा के क्षेत्र बेहतर होंगे और लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी मिलेंगे. सुरंग के जरिये सोनमर्ग तक पहुंच से लद्दाख पहुंचने में भी आसानी होगी. सुरंग की हर मौसम में निर्बाध कनेक्टिविटी सामरिक सुरक्षा भी सुनिश्चित करती है.

इसका अर्थ हुआ कि कुछ ही घंटों में श्रीनगर से लेह तक पहुंचा जा सकेगा, क्योंकि जेड-मोड़ सुरंग के पूर्व में जोजिला सुरंग का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके पूरा होने के बाद सोनमर्ग से द्रास तक हर मौसम में पहुंच संभव हो सकेगी. इससे स्थानीय सुरक्षा तो पुख्ता रहेगी ही, यात्रा में रुकावटें भी पूर्व की तुलना में कम ही आयेंगी. इतना ही नहीं, जेड-मोड़ सुरंग और जोजिला सुरंग दोनों मिलकर भारतीय सेना को हर मौसम में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के उत्तरी क्षेत्रों तक पहुंचने की क्षमता प्रदान करेगी. इससे नियंत्रण रेखा और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पूर्व में सतर्कता बढ़ेगी.

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Published by: संपादकीय

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