ऐतिहासिक अभियान

उत्तराखंड समेत अनेक राज्यों में ऐसी सुरंगों का निर्माण होता रहा है तथा कई सुरंगों का प्रस्ताव भी है. सिलक्यारा की घटना से इस तरह के सभी निर्माणों को सीख लेना चाहिए. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के सभी सुरंगों की समीक्षा का निर्णय लिया है ताकि ऐसी घटना फिर न हो सके.

उत्तराखंड के सिलक्यारा में एक सुरंग में 17 दिनों से फंसे 41 मजदूरों के सकुशल निकाले जाने से समूचे देश ने राहत की सांस ली है. जहां उन मजदूरों ने अपना हौसला बनाये रखा, वहीं उन्हें बचाने में लगे श्रमिकों, इंजीनियरों और विशेषज्ञों ने लगातार मेहनत कर एक असाधारण उदाहरण प्रस्तुत किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में पूरे देश की भावना को अभिव्यक्त करते हुए श्रमिकों और उनके परिजनों के साहस एवं धैर्य तथा बचाव दल की प्रतिबद्धता की प्रशंसा की है. निश्चित रूप से यह प्रकरण प्रेरणादायी है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने श्रमिकों की सराहना करते हुए कहा है कि वे लोग व्यक्तिगत खतरे के बावजूद देश के लिए महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिलक्यारा सुरंग का निर्माण सिलक्यारा को बड़कोट से जोड़ने के लिए किया जा रहा है. इस सुरंग की प्रस्तावित लंबाई 4531 मीटर है तथा इसके बन जाने से वर्तमान मार्ग की दूरी 26 किलोमीटर कम जायेगी और इससे यात्रा में 45 मिनट की बचत होगी. यह एक एकल सुरंग होगी, जिसमें आने-जाने के लिए दो रास्ते होंगे और उनके बीच एक दीवार होगी. जिस स्थान पर इसका निर्माण हो रहा है, वहां पत्थर बहुत कमजोर हैं. इसलिए 15 मीटर की परिधि के इस सुरंग का निर्माण बेहद सावधानी से किया जा रहा है. फिर भी यह हादसा हुआ. सरकार और निर्माता कंपनी की ओर से आश्वासन दिया गया है कि मामले की जांच होगी. यह काम तुरंत किया जाना चाहिए और उसके आधार पर आगे के निर्माण के बारे में निर्णय लिया जाना चाहिए. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी कहा है कि सुरंग निर्माण के दौरान जो सुरक्षा व्यवस्था की गयी थी.

उसका लेखा-जोखा भी होगा. उत्तराखंड समेत अनेक राज्यों में ऐसी सुरंगों का निर्माण होता रहा है तथा कई सुरंगों का प्रस्ताव भी है. सिलक्यारा की घटना से इस तरह के सभी निर्माणों को सीख लेना चाहिए. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के सभी सुरंगों की समीक्षा का निर्णय लिया है ताकि ऐसी घटना फिर न हो सके. पहाड़ों में खनन और निर्माण को लेकर कई रिपोर्ट प्रकाशित हैं तथा विशेषज्ञों द्वारा दिये गये सुझावों के आधार पर स्पष्ट निर्देश भी हैं. यह सर्वविदित तथ्य है कि हिमालय धरती का सबसे युवा पहाड़ है और अभी वह अपने बनने की प्रक्रिया में है. इसके बावजूद विकास परियोजनाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, पर्यटन आदि के कारण निर्माण कार्य चलते रहते हैं. इसी के साथ अनेक प्रकार के हादसे भी होते रहते हैं. जलवायु परिवर्तन के कारण औचक तेज बारिश और बादल फटने की घटनाएं भी बढ़ती जा रही हैं. पूरा हिमालय भूकंप की आशंका का क्षेत्र भी है. इस पृष्ठभूमि में हमें बहुत सावधानी के साथ निर्माण कार्य करना चाहिए तथा निर्देशों पर पूरी तरह अमल किया जाना चाहिए.

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Published by: संपादकीय

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