जन्मशती विशेष : परदे पर नाम बदलने के बाद ही सफलता मिली उत्तम कुमार को

महानायक उत्तम कुमार को भले ही दुनिया से विदा हुए 46 साल हो गए हों, लेकिन उनकी अभिनय कला आज भी मिसाल है. प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 'मन की बात' में उन्हें याद करने के बाद, जानिए उनकी सिनेमाई यात्रा और नाम बदलने से मिली सफलता की कहानी.

महानायक उत्तम कुमार को इस दुनिया से विदा हुए अब 46 वर्ष हो गये हैं. लेकिन उनके सर्वोत्तम अभिनय की मिसाल आज भी दी जाती है. यों आधुनिक पीढ़ी के अधिकांश सिनेप्रेमी उत्तम कुमार के नाम से परिचित नहीं होंगे. लेकिन जब 30 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में उत्तम कुमार को नमन किया, उनकी जन्म शताब्दी और सिनेमा में उनकी यात्रा और उत्तम अभिनय का सम्मान के साथ उल्लेख किया, तब सभी का ध्यान उनकी ओर आकर्षित हुआ. उत्तम कुमार का जन्म तीन सितंबर, 1926 को कोलकाता के अहिरीटोला में उनके ननिहाल में हुआ था. उनके पिता सातकड़ि चट्टोपाध्याय कोलकाता के मेट्रो सिनेमा में प्रोजेक्शनिस्ट थे.

इसलिए सिनेमा के प्रति उत्तम का आकर्षण बचपन से था. उधर इनके बड़े संयुक्त परिवार को रंगमंच से भी लगाव था. नाना ने अपने नाती का नाम उत्तम रखा था. लेकिन उत्तम की मां चपला देवी को यह नाम पसंद नहीं आया और उन्होंने बच्चे का नाम अरुण रख दिया. अरुण की शुरुआती पढ़ाई चक्रबेरिया हाई स्कूल से हुई. वहां अरुण ने सिर्फ पांच वर्ष की आयु में ‘गयासुर’ नाटक में गयासुर की बाल भूमिका अच्छे से निभाई, तो उसे सम्मानित किया गया. तभी से अरुण के मन में अभिनय का बीज अंकुरित हो गया. बीकॉम की पढ़ाई के लिए वह गोयनका कॉलेज गये. लेकिन तब उनका ध्यान पढ़ाई से हटकर पूरी तरह अभिनय में लग गया था. यों आजीविका के लिए उन्होंने कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट में क्लर्क की नौकरी भी की, लेकिन उनका नाट्य मंचन भी जारी रहा.

साथ ही वह तैराकी, फुटबॉल, बालीबॉल और क्रिकेट भी खेलते रहे. फिल्मों में पहला मौका उन्हें 1948 में बांग्ला फिल्म ‘दृष्टिदान’ से मिला. इस फिल्म में उनका नाम अरुण कुमार ही था. लेकिन 1949 में आयी ‘कामना’ में वह उत्तम चटर्जी और बाद में अरूप कुमार के नाम से भी आये. लेकिन उनकी शुरुआती फिल्में फ्लॉप होती रहीं और लोग उन्हें ‘फ्लॉप मास्टर जनरल’ कहने लगे. लेकिन जब अरुण ने 1952 में अपना नाम उत्तम कुमार रख ‘बसु परिवार’ फिल्म की, तो वह सफल हो गयी. उसके बाद 1952 में सुचित्रा सेन के साथ उनकी फिल्म ‘साढ़े 74’ आयी, तो धमाल मच गया. फिर उत्तम कुमार ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. सुचित्रा सेन के साथ तो उनकी जोड़ी इतनी पसंद की गयी कि दोनों ने साथ में 30 फिल्में कीं. इनमें 'अग्नि परीक्षा', 'सप्तपदी', 'हारानो सुर', 'शापमोचन' और 'सागरिका' जैसी फिल्में शामिल हैं. उत्तम कुमार ने कुल 200 से अधिक फिल्मों में काम किया.

सत्यजित राय की ‘नायक’ और ‘चिड़ियाघर’ में अपने शानदार अभिनय की बदौलत उत्तम कुमार बांग्ला फिल्मों के महानायक बन गये.अभिनय के साथ उत्तम कुमार फिल्म निर्माण, निर्देशन, लेखक, संगीतकार और गायक के रूप में भी सक्रिय रहे. उन्हें निर्माता-निर्देशक के रूप में तो राष्ट्रीय पुरस्कार मिले ही, साथ ही उन्हें 1958 में देश के पहले सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया. इधर उत्तम कुमार का मन हिंदी सिनेमा में काम करने के लिए भी मचलने लगा था. वर्ष 1967 में उत्तम कुमार ने खुद एक हिंदी फिल्म ‘छोटी-सी मुलाकात’ बनायी, जिसमें उनकी नायिका वैजयंतीमाला थीं. अफसोस यह कि फिल्म इस तरह असफल हुई कि वह कर्ज में डूब गये. लेकिन बाद में जब 1974 में शक्ति सामंत की फिल्म ‘अमानुष’ में वह आये, तो बांग्ला के साथ हिंदी में बनी यह फिल्म इतनी सफल हुई कि हिंदी सिनेमा में भी वह लोकप्रिय हो गये.

उत्तम कुमार ने हिंदी में करीब 15 फिल्में कीं, जिनमें 'बंदी', 'आनंद आश्रम' और 'किताब' जैसी फिल्में हैं. बांग्ला में उत्तम-सुचित्रा की जोड़ी सुपर हिट रही, तो हिंदी सिनेमा में उनकी जोड़ी शर्मिला टैगोर के साथ बेहद पसंद की गयी. उनके व्यक्तिगत जीवन में भी दो महिलाएं रहीं. वर्ष 1948 में उनका विवाह गौरी देवी से हुआ था. लेकिन 1963 में अलगाव के बाद वह अभिनेत्री सुप्रिया देवी के साथ रहने लगे थे. आज उत्तम कुमार को याद करता हूं, तो फिल्म ‘अमानुष’ की अपार सफलता पर उनके चेहरे की मोहक मुस्कान याद हो आती है. फिर 24 जुलाई, 1980 का वह दिन भी स्मृति में उमड़ता है, जब उनकी शवयात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा था, जो बताता था कि वह महानायक ही नहीं जननायक भी हैं. लेकिन उत्तम कुमार को लेकर मन में दो बड़े दुख भी हैं. एक यह कि वह सिर्फ 54 वर्ष की आयु में चले गये. दूसरा यह कि महानायक बनने के बाद भी उत्तम कुमार को न कभी कोई पद्म सम्मान मिला, न दादासाहब फालके सम्मान ही मिला. (ये लेखक के निजी विचार हैं)

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लेखक के बारे में

By प्रदीप सरदाना

वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म समीक्षक
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