काम और आराम

Time Use Survey : सर्वे बताता है कि कोविड-19 के बाद लोगों के काम के घंटे नौकरी में या नौकरी की खोज में बढ़े हैं. पांच साल पहले की तुलना में रोजगार में लोगों की भागीदारी भी बढ़ी है. इस दौरान स्त्रियों में काम का समय 2.3 फीसदी बढ़कर 20.7 प्रतिशत हो गया है.

Time Use Survey : पांच साल बाद आया राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय का टाइम यूज सर्वे, 2024 नौकरी, घरेलू कामकाज, आराम और मनोरंजन के क्षेत्र में आये कमोबेश बदलावों के बारे में बताता है. यह सर्वे जनवरी से दिसंबर, 2024 तक देशभर के कुल 1,39, 487 परिवारों पर किया गया था. इससे पहले 2019 में टाइम यूज सर्वे हुआ था, जो इस तरह का पहला सर्वे था. पता यह चलता है कि पांच साल बाद भारतीयों का ज्यादा समय नौकरी और मनोरंजन में खर्च हो रहा है.

हालांकि अपनी देखभाल और आराम आदि में उनका समय 2019 की तुलना में कम हुआ है. एक अच्छी बात यह है कि मुफ्त के घरेलू कामकाज में महिलाओं का समय पांच साल पहले की तुलना में कुछ कम हुआ है. वर्ष 2024 में महिलाएं इसमें रोजाना 236 मिनट खर्च कर रही थीं, जबकि 2019 में यह समय 243 मिनट था. हालांकि घरेलू कामकाज में पुरुषों का समय मात्र एक मिनट कम हुआ है. अलबत्ता नौकरी से जुड़े निष्कर्ष ज्यादा चौंकाने वाले हैं और जो सावधिक श्रमबल सर्वे से मिलते-जुलते हैं.

सर्वे बताता है कि कोविड-19 के बाद लोगों के काम के घंटे नौकरी में या नौकरी की खोज में बढ़े हैं. पांच साल पहले की तुलना में रोजगार में लोगों की भागीदारी भी बढ़ी है. इस दौरान स्त्रियों में काम का समय 2.3 फीसदी बढ़कर 20.7 प्रतिशत हो गया है. पुरुषों में यह 3.5 फीसदी बढ़कर 60.8 प्रतिशत हो गया है. इस दौरान ग्रामीण इलाकों में कामकाज का समय 13 मिनट और शहरी क्षेत्रों में पांच मिनट बढ़ा है. जिस एक और क्षेत्र में लोगों का समय 2019 की तुलना में बढ़ा है, वह है संस्कृति, आराम, मास मीडिया और खेलकूद. इसमें लोगों का समय 2019 की तुलना में 6.1 फीसदी बढ़ा है. पुरुषों में यह 6.8 फीसदी और स्त्रियों में 5.4 प्रतिशत बढ़ा है.

हालांकि इसमें महिलाओं का समय 2019 की तुलना में एक मिनट कम हुआ है. सर्वे यह भी बताता है कि पांच साल बाद शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में मनोरंजन में लोग ज्यादा समय बिता रहे हैं. इस सर्वे के निष्कर्ष जहां लोगों में काम के बढ़ते दबाव और श्रमबल की बढ़ती भागीदारी के बारे में बताते हैं, वहीं महिलाओं के लिए काम की अवधि में वृद्धि, घरेलू कामकाज की अवधि में मामूली कटौती और मनोरंजन की अवधि में कटौती से साफ है कि समाज में बेहतर बदलाव के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है.

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Published by: संपादकीय

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