टैरिफ के बावजूद ऊंचाई पर सेवा क्षेत्र

Service sector : तथ्य बताते हैं कि इनपुट लागत सबसे तेज गति से बढ़ी. कीमतों के मोर्चे पर मुद्रास्फीति की दर नौ महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गयी, तो इस बीच मांग में उछाल ने जुलाई, 2012 के बाद से उत्पादन शुल्क में सबसे तेज वृद्धि को संभव बनाया.

Service sector :एक निजी सर्वेक्षण के मुताबिक, मजबूत मांग के कारण अगस्त में सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 15 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गयी, जिससे कीमतों में भी एक दशक से भी ज्यादा समय में सबसे तेज वृद्धि हुई. यह मांग में पर्याप्त सुधार के बीच नये ऑर्डर एवं उत्पादन में तेज वृद्धि से प्रेरित रही. सेवा क्षेत्र विनिर्माण क्षेत्र की मजबूती को प्रतिबिंबित करता है, जो बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता और अमेरिका द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बावजूद अगस्त में तेज गति से बढ़ा. नये ऑर्डर में बढ़ोतरी के कारण एचएसबीसी इंडिया सेवा पीएमआइ जुलाई के 60.5 अंक से बढ़कर अगस्त में 62.9 पर पहुंच गया, जो जून, 2010 के बाद सबसे अधिक है, जबकि समग्र पीएमआइ 63.2 रहा, जो 17 साल में सबसे तेज विस्तार है.

पीएमआइ-यानी क्रय प्रबंधक सूचकांक की भाषा में 50 से ऊपर के अंक का मतलब गतिविधियों में विस्तार और 50 से कम का आशय संकुचन होता है. लगातार तीसरे महीने में सूचकांक 60 से ऊपर रहा, जो दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था में लचीली मांग को दर्शाता है. गौरतलब है कि इससे कुछ दिन पहले ही मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही की वृद्धि दर का आंकड़ा जारी हुआ, जो 7.8 फीसदी है, और जो पिछली पांच तिमाहियों में सर्वाधिक है. नया कारोबार, जो मांग का एक प्रमुख पैमाना है, जून, 2010 के बाद सबसे तेज गति से बढ़ा. इसे मजबूत होती अंतरराष्ट्रीय मांग से समर्थन मिला तथा निर्यात ऑर्डरों में 14 महीनों में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गयी. मजबूत मांग ने कंपनियों की बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर ज्यादा आक्रामक तरीके से डाला.

तथ्य बताते हैं कि इनपुट लागत सबसे तेज गति से बढ़ी. कीमतों के मोर्चे पर मुद्रास्फीति की दर नौ महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गयी, तो इस बीच मांग में उछाल ने जुलाई, 2012 के बाद से उत्पादन शुल्क में सबसे तेज वृद्धि को संभव बनाया. कीमतों पर बढ़ते दबाव का मतलब यह भी है कि जो मुद्रास्फीति जुलाई में आठ साल के निम्नतम स्तर पर चली गयी थी, आने वाले दिनों में उसमें तेजी आ सकती है. अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाये जाने के कारण अगली तिमाहियों में वृद्धि दर में कमी आने की आशंका तो है ही. इसके अलावा मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका के कारण भी भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर असर पड़ सकता है.

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