संजय कुमार, प्रोफेसर और राजनीतिक विश्लेषक
अरिंदम कबीर, सीएसडीएस और लोकनीति से जुड़े शोधार्थी
BJP: भाजपा ने गुजरात में न सिर्फ अपनी वोट हिस्सेदारी बरकरार रखी है, बल्कि 2014 के बाद राज्य में इसके वोट शेयर में वृद्धि भी हुई है. इसका एक कारण राज्य भाजपा को केंद्र सरकार और दूसरी सरकारी संस्थाओं से मिलता समर्थन है. लेकिन यह स्पष्ट है कि भाजपा ने बेहद सफलतापूर्वक अपने हित में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, कल्याणकारी कार्यों तथा लोकप्रियतावादी राजनीति को लागू किया है. भाजपा का चुनाव प्रबंधन तथा विमर्श निर्माण की क्षमता का कहीं कोई मुकाबला नहीं है, जो गुजरात के चुनावी नतीजे में दिखता है. यही नहीं, बहुसंख्यक मतदाताओं के रुख को भांप कर उसके अनुसार रणनीति बनाने की क्षमता ने भी तीन दशकों से अधिक समय तक राज्य में पार्टी की वोट हिस्सेदारी बनाये रखने में बड़ी भूमिका निभायी है.
जहां तक बिहार की बात है, तो 2025 में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए को यहां भारी सफलता मिली. यह नतीजा 2020 के विधानसभा चुनाव से अलग रहा, जब एनडीए को बहुत मामूली अंतर से जीत हासिल हुई थी. यह देखना दिलचस्प होगा कि एनडीए की इस जीत का आने वाले वर्षों में बिहार पर कैसा असर पड़ता है. लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि राजनीतिक पार्टियों ने इस पर ध्यान दिया है और वे उसी के अनुरूप चल रही हैं.
बिहार में जदयू गठबंधन
बिहार में 2010 के विधानसभा चुनाव में अपने कामकाज और विकासवादी विमर्श तथा नीतीश कुमार के प्रति समर्थन के बूते जदयू ने शानदार प्रदर्शन किया था. तब मतदाताओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था तथा मूलभूत ढांचा सुधारने के जदयू के वादे को अपना पूरा समर्थन दिया था. वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में जदयू और राजद के महागठबंधन ने भाजपा को हरा तो दिया था, लेकिन जदयू की सीटों की संख्या में गिरावट आयी थी. उस प्रसंग ने जताया था कि राजनीतिक गठबंधन, नेतृत्व के चयन और स्थानीय समीकरणों से मतदाताओं की आकांक्षा किस तरह बदल जाती है, और जब समर्थकों को लगता है कि पार्टी की पहचान और इसका प्रदर्शन बदल रहा है, तब उसके ब्रांड वैल्यू में गिरावट आती है.
बिहार और पश्चिम बंगाल में चीजें बदली हैं
इस साल पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस कैसा प्रदर्शन करती है, यह देखना दिलचस्प होगा. तृणमूल कांग्रेस पिछले 15 साल से राज्य की सत्ता में है और उसकी वोट हिस्सेदारी 49 प्रतिशत के आसपास है. क्या आगामी विधानसभा चुनाव में तृणमूल का जादू बरकरार रहेगा? पार्टी को चाहिए कि वह ऊपर बताये गये राज्यों पर, जिनमें पश्चिम बंगाल भी शामिल है, नजर रखे और यह देखे कि किस तरह जनाधार एक पार्टी से दूसरी पार्टी की तरफ खिसक रहा है.
