मोटापे के विरुद्ध जन अभियान

Campaign Against Obesity : देश में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है, जिससे मधुमेह, उच्च रक्तचाप और दिल की बीमारियों का जोखिम बढ़ता है. अधिक वजन से फेफड़ों पर दबाव बढ़ता है, जिससे अस्थमा और नींद से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं, तो जोड़ों पर अधिक दबाव पड़ने से गठिया और ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी समस्याएं पैदा होती हैं.

Campaign Against Obesity : हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देहरादून में 38वें राष्ट्रीय खेलों के उद्घाटन समारोह में अपने संबोधन के दौरान कहा था कि देश में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जो चिंता का विषय है. प्रधानमंत्री की अपील को व्यापक समर्थन मिला है. विश्व स्वास्थ्य संगठन, दक्षिण पूर्व एशिया ने नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित, पौष्टिक आहार के प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान का खासतौर पर उल्लेख किया है. देश में मोटापे के खिलाफ जन अभियान भी शुरू हुआ है.

इसकी स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर लोगों को संदेश देने वाली हैं कि मोटापा समस्या नहीं, बीमारी है. मोटापे के खिलाफ जन अभियान में देश के 700 मेडिकल कॉलेज शामिल हो रहे हैं. गत रविवार को केंद्रीय मंत्री डॉ मनसुख मांडविया के नेतृत्व में 250 से अधिक साइकिल सवार मोटापे से लड़ने के प्रधानमंत्री की अपील के समर्थन में दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में एक साथ आये, तो मंगलवार को दिल्ली एम्स के 14 डॉक्टरों ने मोटापे के शरीर पर पड़ने वाले असर पर चर्चा की. जल्दी ही देश के सभी सरकारी अस्पतालों में मोटापे को लेकर विशेष ओपीडी संचालित होने वाली है, जहां आहार विशेषज्ञ पौष्टिक और संतुलित भोजन तथा व्यायाम आदि की जानकारी देंगे.

देश में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है, जिससे मधुमेह, उच्च रक्तचाप और दिल की बीमारियों का जोखिम बढ़ता है. अधिक वजन से फेफड़ों पर दबाव बढ़ता है, जिससे अस्थमा और नींद से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं, तो जोड़ों पर अधिक दबाव पड़ने से गठिया और ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी समस्याएं पैदा होती हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन और आइसीएमआर जैसे स्वास्थ्य संगठन मोटापे को वैश्विक बीमारी मानते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 1975 के बाद से मोटापा तीन गुना बढ़ चुका है, और 2016 में 1.9 अरब वयस्क अधिक वजन के थे.

विज्ञान जर्नल ‘द लांसेट’ के मुताबिक, 2022 में भारत में 5-19 वर्ष की आयु के 1.25 करोड़ बच्चे अधिक वजन के थे. देश में वयस्क महिलाओं में मोटापे की दर 1990 की 1.2 फीसदी से बढ़कर 2022 में 9.8 हो गयी. इसी अवधि में पुरुषों में मोटापे की दर 0.5 प्रतिशत से बढ़कर 5.4 फीसदी हो गयी. चूंकि इससे पहले स्वच्छता की प्रधानमंत्री की अपील को गंभीरता से लिया गया था, ऐसे में, उम्मीद बनती है कि मोटापे के खिलाफ उनकी अपील जन जागरूकता में बदलेगी.

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