दवा उद्योग की प्रगति

जानकारों का मत है कि 2030 तक भारतीय दवा उद्योग 130 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच जायेगा.

बड़े घरेलू बाजार में आपूर्ति के साथ भारतीय दवा उद्योग वैश्विक बाजार में भी बहुत अधिक योगदान देता है. जेनेरिक दवाओं की अफ्रीका की कुल मांग का 50 प्रतिशत और अमेरिका की मांग का 40 प्रतिशत तथा ब्रिटेन की कुल दवा मांग का 25 प्रतिशत हिस्सा भारत से ही जाता है. साथ ही, कई देश भारत से दवाओं का आयात करते हैं. दुनिया की 60 फीसदी वैक्सीन का उत्पादन भी हमारे यहां ही होता है. इसके अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनिवार्य टीकाकरण योजनाओं के लिए 70 प्रतिशत टीकों की आपूर्ति भारतीय निर्माता करते हैं.

इसीलिए भारत को दुनिया का दवाखाना कहा जाता है. सस्ती कीमत और उच्च गुणवत्ता के कारण भारतीय दवाओं पर भरोसा लगातार बढ़ता जा रहा है. दुनिया के 78 देशों से लगभग 20 लाख लोग हर साल उपचार के लिए भारत आते हैं. हमारे चिकित्सा पर्यटन का बाजार नौ अरब डॉलर हो चुका है. वैश्विक मेडिकल टूरिज्म सूचकांक में भारत वर्तमान में दसवें स्थान पर है.

इस वर्ष अनेक भू-राजनीतिक कारणों से विभिन्न वस्तुओं की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित रही, लेकिन भारत ने अपनी आपूर्ति प्रतिबद्धताओं को अच्छी तरह से निभाते हुए दवाओं का निर्यात बरकरार रखा. इससे हमारे उद्योग पर दुनिया का भरोसा बढ़ा है. जानकारों का मत है कि 2030 तक भारतीय दवा उद्योग 130 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच जायेगा. इस वर्ष भारतीय दवा बाजार की वृद्धि दर 12.5 प्रतिशत रही है.

इस निरंतर वृद्धि का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि अगले साल वैश्विक दवा बाजार के एक लाख करोड़ डॉलर पार कर जाने के आसार हैं. हमारी कंपनियां ऐसी विशेष दवाओं के विकास एवं निर्माण के लिए भी प्रयासरत हैं, जिन्हें अभी नहीं बनाया जा सका है, पर उनकी आवश्यकता है. ऐसी दवाओं को जल्दी रोगियों तक पहुंचाने की कोशिशें भी हो रही हैं.

उल्लेखनीय है कि कोविड महामारी के संक्रमण को रोकने के लिए टीके बनाने के लिए चीन समेत कई देश लगे हुए थे तथा उनके टीकों को भारतीय टीकों से बहुत पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्वीकृति भी मिल गयी थी,

परंतु हमारी कंपनियों ने न केवल बहुत बड़े घरेलू बाजार को समुचित मात्रा में टीकों की खुराक मुहैया करायी, बल्कि कई देशों को टीकों का निर्यात भी किया गया. व्यापक पैमाने पर वैक्सीन बनाने के अनुभवों का लाभ भी मिला. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे बहुत देशों को टीकों की खुराक मुफ्त में भी उपलब्ध कराया था, जो या तो उन्हें तुरंत खरीद नहीं सकते थे या अन्य देश उन्हें सहयोग नहीं कर रहे थे. आशा है कि जी-20 अध्यक्षता की अवधि में दवा उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा और इसका बाजार बढ़ेगा. सरकार ने भी इस ओर अपेक्षित ध्यान दिया है.

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