-डॉ सौरभ-
(एसोसिएट प्रोफेसर स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज जेएनयू)
बालेंद्र शाह के नेतृत्व में नेपाल का नया नेतृत्व वैचारिक राजनीति से हटकर आर्थिक व्यावहारिकता और कूटनीतिक जुड़ाव की ओर बढ़ रहा है, जिससे भारत-नेपाल के बीच अधिक संतुलित और भविष्योन्मुखी साझेदारी का अवसर बन रहा है. हाल ही में नेपाल ने एक रुपये के नये सिक्के को मंजूरी दी है, जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा वाले विवादित नक्शे को हटाकर उसकी जगह मुस्तांग जिले के मारंग गांव स्थित 'लो ग्याकर मठ' की तस्वीर होगी. यह भारत-नेपाल संबंधों में सुधार का संकेत है. नेपाल ने भारतीय करेंसी के लाने-ले जाने पर लगी पाबंदियों में भी ढील दी है.
अब भारतीय और नेपाली नागरिक 25,000 रुपये तक 200 और 500 रुपये के भारतीय नोट अपने साथ ले जा सकते हैं. पिछले सप्ताह भारत-नेपाल व्यापार और कनेक्टिविटी के लिए एक अहम उपलब्धि के तौर पर कोलकाता पोर्ट से पहली सीधी कमर्शियल मालगाड़ी नेपाल कस्टम्स यार्ड में पहुंची. यह भारत-नेपाल रेल ट्रांजिट फ्रेमवर्क में संशोधन करने वाले 'लेटर ऑफ एक्सचेंज' पर हस्ताक्षर के बाद, संशोधित व्यवस्था के शुरू होने का संकेत है. भारत की ग्रांट सहायता से शुरू हुई इस परियोजना का मकसद दोनों देशों के बीच माल की आवाजाही को आसान बनाना है. संशोधित प्रोटोकॉल कोलकाता और विशाखापत्तनम पोर्ट से नेपाल के तय रेल पॉइंट्स (जिनमें विराटनगर का नेपाल कस्टम्स यार्ड भी शामिल है) तक कंटेनर और बल्क कार्गो की सीधी रेल आवाजाही की इजाजत देता है.
नेपाल के विदेश मंत्री खनाल ने अपने चीन दौरे में नेपाल और चीन के बीच भी 'ट्रांस-हिमालयन मल्टी डायमेंशनल कनेक्टिविटी नेटवर्क' पर चर्चा की है, जिसमें सीमा पार ट्रांसमिशन लाइन और सीमा पार रेल जैसे मुख्य प्रोजेक्ट शामिल हैं. चीनी पक्ष ने रेलवे प्रोजेक्ट के लिए व्यवहार्यता अध्ययन पूरा कर लिया है. इस रिपोर्ट के आधार पर नेपाल में सीमा सुविधाओं, फ्रेट कॉरिडोर और क्षमता निर्माण जैसे मुद्दों पर काम किया जायेगा. लेकिन भारत-नेपाल सीधी रेल सेवा में चीन के मुकाबले लॉजिस्टिक्स की लागत कम होगी, नेपाल के लिए ट्रांजिट की क्षमता बेहतर होगी, भारतीय पोर्ट्स तक उसकी पहुंच मजबूत होगी और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही नेपाल के मुख्य ट्रांजिट पार्टनर के तौर पर भारत की भूमिका और मजबूत होगी. कुछ समय पहले डिजिटल फाइनेंशियल कनेक्टिविटी और आर्थिक एकीकरण को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए भारत ने यूपीआइ को नेपाल के एनपीआइ (नेशनल पेमेंट्स इंटरफेस) से जोड़कर एक क्रॉस बॉर्डर पीयर-टू-पीयर रेमिटेंस लिंक शुरू किया है.
इससे दोनों देशों के नागरिक जाने-पहचाने मोबाइल बैंकिंग एप्लिकेशन, यूपीआइ एप्स और डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल कर आसानी से, सुरक्षित रूप से और रियल टाइम में सीमा पार पैसे भेज सकेंगे और भुगतान कर सकेंगे. दोनों सरकारों को उम्मीद है कि इस पहल से, खासकर नेपाल के व्यापारियों को फायदा होगा. भारत और नेपाल ने 'आपराधिक मामलों में भारत-नेपाल आपसी कानूनी सहायता समझौते' के लागू होने के लिए जरूरी आंतरिक प्रक्रियाओं के पूरा होने का भी स्वागत किया. यह समझौता भारत और नेपाल के लोगों के लिए फायदेमंद होगा, क्योंकि यह सीमा पार अपराधों से जुड़ी जांच, मुकदमे और न्यायिक कार्यवाहियों को ज्यादा असरदार बनाने के लिए एक संस्थागत कानूनी ढांचा प्रदान करेगा.
भाषा तकनीक में सहयोग के लिए 'डिजिटल इंडिया भाषिणी' और काठमांडू यूनिवर्सिटी के बीच हुए एक सहमति पत्र के तहत नेपाल में 'वॉयस-फर्स्ट' डिजिटल भाषा अनुवाद प्लेटफॉर्म विकसित करेगी. हाल ही में, भारत ने नेपाल में 2015 के भूकंप के बाद पुनर्निर्माण सहायता कार्यक्रम के तहत पूरी की गयी 72 स्वास्थ्य सुविधाएं और 12 सांस्कृतिक विरासत परियोजनाएं सौंपी हैं. नेपाल के विदेश मंत्री ने अपनी भारत यात्रा के दौरान भारत-नेपाल संबंधों को नये सिरे से शुरू करने का संकेत दिया था. उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेतृत्व वाली नयी सरकार पर पारंपरिक पार्टियों का कोई 'बोझ' नहीं है. सत्ताधारी पार्टी के चेयरमैन रबी लामिछाने ने भी हाल में भारत का दौरा किया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से भी मुलाकात की थी.
पिछले दो दशकों में दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक माहौल काफी बदल गया है. प्रमुख ताकतों के बीच सैन्य और आर्थिक प्रतिस्पर्धा तेज हो गयी है, जबकि कनेक्टिविटी, सप्लाइ चेन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा सुरक्षा और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में मजबूती आधुनिक शासन कला के मुख्य तत्व बन गये हैं. पिछले साल के 'जेन जी' आंदोलन के बाद चीन को इस बात का डर पैदा हो गया है कि नेपाल भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का अखाड़ा बन सकता है और चीन को अपनी विस्तारवादी नीतियों को लागू करने में स्थानीय विरोध का सामना करना पड़ सकता है. अमेरिकी अधिकारियों के काठमांडू के लगातार दौरों और नेपाल में तिब्बती शरणार्थियों को पहचान पत्र जारी करने के लिए नेपाल सरकार को मनाने की वाशिंगटन की कोशिशों ने बीजिंग की चिंताएं और बढ़ा दी हैं. बालेंद्र शाह की सरकार के सत्ता में आने के बाद से वाशिंगटन ने काठमांडू में कई वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा है. इनमें दक्षिण और मध्य एशिया के लिए डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत सर्जियो गोर भी शामिल हैं.
हाल के इन अमेरिकी दौरों के दौरान हुई अहम बातचीत मुख्य रूप से नेपाल में अमेरिकी निवेश के लिए कानूनी बाधाएं दूर करने, टेक्नोलॉजी और आइसीटी सहयोग को आगे बढ़ाने, मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन नेपाल कॉम्पैक्ट को सुचारु रूप से लागू करने जैसे अहम मुद्दों पर केंद्रित रही. कई दशकों से, नेपाल में भारत को लेकर राजनीतिक चर्चा अक्सर संकीर्ण राष्ट्रवादी नजरिये से होती रही है, जिसमें संप्रभुता की चिंताएं, संधियों पर बहस और सीमा विवाद हावी रहे हैं. इन मुद्दों ने अक्सर आर्थिक बदलाव, जल विद्युत, कनेक्टिविटी, टेक्नोलॉजी, निवेश और क्षेत्रीय एकीकरण से जुड़ी महत्वपूर्ण चर्चाओं को पीछे छोड़ दिया है. भले ही नेपाल की बाहरी साझेदारियां कितनी भी विविध क्यों न हो जायें, भारत नेपाल के लिए मुख्य ट्रांजिट रूट, सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार, निवेश का प्रमुख स्रोत और ऊर्जा का अहम बाजार, सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक विशिष्टता का केंद्र बना रहेगा. भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत नेपाल एक अहम सहयोगी देश है और दोनों देशों के बीच नियमित उच्च स्तरीय बातचीत की परंपरा को और मजबूत करने की जरूरत है. उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी और बालेंद्र शाह के नेतृत्व में दोनों देशों के संबंध नयी ऊंचाइयों पर पहुंचेंगे. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)
