महंगाई से राहत

पेट्रोल व डीजल पर शुल्क घटाने, खाद अनुदान बढ़ाने तथा आयात शुल्क कम करने के केंद्र सरकार के फैसलों से मुद्रास्फीति का दबाव कम होगा.

दुनिया के बड़े हिस्से की तरह भारत में भी थोक और खुदरा महंगाई ऐतिहासिक स्तर पर है. पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय शुल्क में कटौती से ग्राहकों को कुछ राहत मिली है. यह स्थापित तथ्य है कि पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर हर चीज के दाम पर होता है. शनिवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेट्रोल पर लगनेवाले शुल्क में आठ रुपये और डीजल पर छह रुपये प्रति लीटर कटौती की घोषणा की.

इससे पेट्रोल 9.5 रुपये और डीजल सात ��ुपये सस्ता हो जायेगा. विभिन्न राज्यों में स्थानीय करों के कारण राहत में अंतर आ सकता है. कुछ राज्यों ने भी अपने टैक्स घटाने के संकेत दिये हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में आगामी दिनों में कमी के आसार नहीं हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध, आपूर्ति शृंखला में अवरोध तथा तेल उत्पादक देशों के रवैये जैसे कारकों का असर आगे भी बना रहेगा. ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार का यह फैसला निश्चित ही सुकूनदेह है.

उल्लेखनीय है कि महंगाई की वजह से पेट्रोल व डीजल की खरीद घटी है, जो अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक है. शुल्क कटौती से मांग बढ़ने की उम्मीद भी है. निर्मला सीतारमण ने खाद अनुदान के रूप में 1.10 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त आवंटन की भी घोषणा की है. चालू वित्त वर्ष के बजट में इस मद में 1.05 लाख करोड़ रुपये आवंटित किये गये थे. खाद उद्योग पर भी घरेलू और वैश्विक अर्थव्यवस्था का दबाव है.

ऐसे में किसानों पर भी बोझ बढ़ा है. अनुदान राशि बढ़ाने से उद्योग और किसान दोनों लाभान्वित होंगे. माना जा रहा है कि आगामी फसल वर्ष में जलवायु संबंधी कारणों से उपज की मात्रा में कमी आ सकती है. इसका सीधा असर किसानों की आय और खाद्य मुद्रास्फीति पर पड़ेगा. लेकिन अगर खाद सस्ती दरों पर उपलब्ध होंगे, तो यह प्रभाव कुछ हद तक कम किया जा सकेगा.

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के नौ करोड़ से अधिक लाभार्थियों को रसोई गैस के सिलेंडर पर दो सौ रुपये के अनुदान देने से गरीब परिवारों को राहत मिलेगा. हालिया रिपोर्टों में बताया गया है कि महंगाई के कारण गरीब परिवार अपने जरूरी खर्चों में कटौती के लिए मजबूर हो रहे हैं. सस्ता सिलेंडर घरेलू बजट को संभालने में मददगार होगा. जिन उद्योगों की आयातित पदार्थों पर अधिक निर्भरता है, उन्हें भी सरकार से सहायता मुहैया कराने का प्रयास किया है.

लोहा, इस्पात, कोयला, प्लास्टिक आदि से जुड़ी चीजों के आयात शुल्क में कमी करने से इन उद्योगों की लागत खर्च में कमी आयेगी और उनके तैयार माल की कीमतें कम होंगी. ये क्षेत्र उद्योग और कारोबारी जगत के आधार हैं तथा परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से हर व्यक्ति इनका ग्राहक है. इन उपायों से निश्चित ही मुद्रास्फीति को कम करने में सहायता मिलेगी. रिजर्व बैंक ने पहले ही कुछ मौद्रिक कदम उठाया है. यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इन घोषणाओं का लाभ लोगों तक ठीक से और जल्दी पहुंचे.

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Published by: संपादकीय

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