बढ़ती चीनी धौंस

भारत को विभिन्न देशों के साथ रणनीतिक गठबंधन बनाने के साथ चीन की धौंस को नियंत्रित करने की वैश्विक कूटनीतिक कोशिशों से जुड़ना चाहिए.

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पिछले कुछ हफ्तों से जारी तनातनी के जल्दी खत्म होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं. अनेक जगहों पर चीन का सैनिक जमावड़ा कायम है और चीनी विदेश मंत्रालय व सेना की ओर से आ रहे बयानों में उसकी आक्रामकता को देखा जा सकता है. भारत ने भी अपनी फौजों की तैनाती बढ़ा दी है ताकि जरूरत पड़ने पर चीन की धौंस का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके. जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है, हमारी सेना किसी भी हालत का सामना करने के लिए तैयार है और गलवान घाटी में जवानों की शहादत को बेकार नहीं होने दिया जायेगा.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चीन के खिलाफ आवाजें उठने लगी हैं. अमेरिकी विदेश सचिव माइक पॉम्पियो ने भारतीय सीमा पर चीन की कायराना हरकत की पुरजोर निंदा की है और यह भी रेखांकित किया है कि न केवल भारत, बल्कि अन्य पड़ोसियों के साथ भी चीन का रवैया गलत है. भारत और भूटान की सीमा पर 2017 में दोकलाम में उसने अतिक्रमण करने की कोशिश की थी.

वह विवाद 73 दिनों तक चला था और आखिरकार भारत के दबाव में चीन को पीछे हटना पड़ा था. अपनी सीमा के भीतर पशुओं को चराते भूटान के लोगों को चीन द्वारा धमकाने की घटनाएं आम हो गयी हैं. आज भले ही नेपाल की सरकार अपने निहित स्वार्थों की वजह से भारतीय क्षेत्रों को अपने नक्शे में दिखाने की कोशिश कर रही है, लेकिन यह भी सच है कि नेपाल को समर्थन देने की बात कहनेवाला चीन उसके अनेक उत्तरी जिलों में अतिक्रमण कर चुका है और नेपाल को शिकायत भी दर्ज करानी पड़ी है.

दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर भी चीनी गतिविधियां चल रही हैं. ताइवान के तो पूरे देश पर ही चीन अपना दावा करता रहा है. इसके जवाब में अमेरिका ने प्रशांत महासागर में बड़े पैमाने पर नौसैनिक तैनाती की है. साउथ चाइना सी और ईस्टर्न चाइना सी में कई सालों से चीन अपनी मौजूदगी को बढ़ा रहा है तथा नौसैनिक अड्डे स्थापित कर रहा है. वह प्राकृतिक द्वीपों पर अपने दावे तो कर ही रहा है, साथ ही कृत्रिम द्वीपों के निर्माण से उन क्षेत्रों के समुद्री आवागमन तथा पारिस्थितिकी को असर डाल रहा है.

इन हरकतों पर वियतनाम, फिलिपींस, मलयेशिया, ब्रुनेई, ताइवान, दक्षिण कोरिया, जापान आदि देशों ने आपत्ति जतायी है तथा कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों से भी विरोध किया गया है. फिर भी चीन ने अपनी ढिठाई में कमी नहीं की है. लद्दाख और सिक्किम के निकट वास्तविक नियंत्रण रेखा पर उसकी हालिया हरकतें एशिया में एकछत्र वर्चस्व बनाने की उसकी नीति का ही हिस्सा हैं. भारत को विभिन्न देशों के साथ रणनीतिक गठबंधन बनाने के साथ वैश्विक स्तर पर चीन की धौंस को नियंत्रित करने की कूटनीतिक कोशिशों से जुड़ना चाहिए ताकि अपनी सीमाओं की सुरक्षा के साथ क्षेत्रीय शांति भी बनी रहे.

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Published by: संपादकीय

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