विदेश नीति की दिशा

जयशंकर ने बताया कि हमारी विदेश नीति के तीन स्तर हैं. यह सुरक्षा केंद्रित, विकास केंद्रित और लोक केंद्रित है.

कुछ समय पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी पत्रकारों से कहा था कि भारत की विदेश नीति उसके हितों एवं मूल्यों पर आधारित है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के माध्यम से वैश्विक मंच पर महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज करा चुका है. इस संदर्भ में विदेश मंत्री का एक और हालिया बयान बहुत अहम है. उन्होंने कहा है कि युवाओं को विदेशी मामलों में सक्रियता से दिलचस्पी रखनी चाहिए क्योंकि इसमें अवसर भी हैं और चुनौतियां भी.

उनका मानना है कि अगले दशक तक भारत एक बड़ी शक्ति के रूप में विश्व पटल पर उभरेगा. बढ़ती अर्थव्यवस्था तथा ठोस विदेश नीति से हम ऐसी स्थिति में हैं कि कोई भी शक्तिशाली देश या देशों का समूह भारत को सम्मान के साथ देखता है. रूस-यूक्रेन मामले में भारत की तटस्थ नीति से अमेरिका और अनेक यूरोपीय देश असंतुष्ट भले हों, पर हाल में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के दौरान जब प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को स्पष्ट शब्दों में युद्ध को अनावश्यक बताते हुए बातचीत से विवाद को सुलझाने का सुझाव दिया,

तो पश्चिमी देशों ने भी खुलकर उनकी प्रशंसा की. एक गोष्ठी में जयशंकर ने बताया कि हमारी विदेश नीति के तीन स्तर हैं. यह सुरक्षा केंद्रित, विकास केंद्रित और लोक केंद्रित है. नीति के तहत दस सप्ताह के लिए भी दृष्टि स्पष्ट है और दस साल के लिए भी. इससे अल्पकालिक और दीर्घकालिक निर्णय लेने तथा चुनौतियों का सामना करने में बड़ी मदद मिलती है. जिस प्रकार भू-राजनीतिक परिदृश्य तीव्र गति से परिवर्तित हो रही है,

ऐसे में अगर नीतिगत स्पष्टता नहीं होगी, तो राष्ट्रीय हितों का नुकसान निश्चित है. जैसा कि जयशंकर ने रेखांकित किया है, वैश्विक गांव बन चुकी दुनिया में अगर एक जगह कुछ होता है, तो उसका असर हर जगह होता है. उदाहरण के लिए हम कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभाव को देख सकते हैं. उनकी यह बात भी गौरतलब है कि बदलती दुनिया में दो अहम घटनाक्रम चल रहा है- चीन का उभार और अमेरिका का बदलाव.

पिछले कुछ समय से भारत को मैनुफैक्चरिंग हब बनाने तथा वैश्विक आपूर्ति शृंखला में हिस्सेदारी बढ़ाने पर पूरा जोर दिया जा रहा है. आर्थिक विकास के साथ कूटनीति और रणनीति को भी नये तेवर व कलेवर मिले हैं. आज आतंकवाद पर या सीमा से संबंधित गतिविधियों पर सरकार का जो रुख है, वह पहले से बिल्कुल भिन्न है. बांग्लादेश से सीमा समझौता करना सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचायक है. आतंक पर कड़े रुख के कारण हम आज अधिक सुरक्षित देश हैं. अपनी नीतियों पर भरोसा देश को निश्चित ही नयी ऊंचाइयों पर ले जायेगा.

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