Digital opportunities : एक जुलाई, 2015 को आरंभ हुआ ‘डिजिटल इंडिया’ कार्यक्रम अपनी यात्रा के एक दशक पूरे कर चुका है. इस अवधि में भारत ने डिजिटल क्षेत्र में अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं. सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण, यूपीआइ आधारित भुगतान व्यवस्था, आधार, डिजिलॉकर, कोविन और भारतनेट जैसी पहलों ने भारत को विश्व की अग्रणी डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित किया है. डिजिटल इंडिया की सबसे बड़ी सफलता डिजिटल अवसंरचना का विस्तार है. वर्ष 2014 में जहां देश में सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या लगभग 25 करोड़ थी, आज वह 103 करोड़ से अधिक हो चुकी है. यूपीआइ ने भुगतान प्रणाली में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है. वर्ष 2025 में इसके माध्यम से 228 अरब से अधिक लेनदेन दर्ज किये गये. अकेले मई, 2026 में ही यूपीआइ के माध्यम से 29 लाख करोड़ से अधिक का लेनदेन हुआ है. डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर(डीबीटी) के माध्यम से सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंच रही है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है.
इन उपलब्धियों के बावजूद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच इंटरनेट की गुणवत्ता में अंतर, महिलाओं की अपेक्षाकृत कम डिजिटल भागीदारी, डिजिटल साक्षरता की कमी तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक सीमित पहुंच जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं. दूसरी ओर, बड़ी संख्या में नागरिक स्मार्टफोन और डिजिटल उपकरणों की लागत वहन करने में सक्षम नहीं हैं. डिजिटल इंडिया ने भारत को विश्व की अग्रणी डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में स्थान दिलाया है, किंतु देश के ग्रामीण बहुल राज्यों में इसकी सफलता का मूल्यांकन केवल इंटरनेट कनेक्शन, मोबाइल टावरों या यूपीआइ लेनदेन के आंकड़ों से नहीं किया जा सकता. जमीनी स्तर पर सबसे बड़ी चुनौती यह है कि डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद उनका लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंच रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी नेटवर्क की गुणवत्ता, निर्बाध बिजली आपूर्ति और डिजिटल उपकरणों की उपलब्धता बड़ी समस्या है.
पंचायतों में सरकारी सेवाएं ऑनलाइन हो चुकी हैं, लेकिन आम नागरिकों को आवेदन, प्रमाणपत्र, भूमि अभिलेख या अन्य सेवाओं के लिए साइबर कैफे और बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ता है. डिजिटल इंडिया की दूसरी बड़ी चुनौती डिजिटल साक्षरता का अभाव है. बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिक स्मार्टफोन का उपयोग तो करते हैं, पर यह उपयोग केवल सोशल मीडिया, ऑनलाइन शॉपिंग और वीडियो गेम्स तक ही सीमित होकर रह गया है. ग्रामीण ऑनलाइन आवेदन, इ-गवर्नेंस सेवाओं, साइबर सुरक्षा और डिजिटल बैंकिंग की पर्याप्त जानकारी के प्रति सजग नहीं हो पा रहे हैं.
शिक्षा के क्षेत्र में भी डिजिटल असमानता स्पष्ट दिखाई देती है. ग्रामीण विद्यालयों में कंप्यूटर, इंटरनेट और प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी के कारण डिजिटल शिक्षा का लाभ सभी विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है. जब तक गांवों, किसानों, छात्रों, महिलाओं और वंचित समुदायों को डिजिटल सुविधाओं के साथ-साथ डिजिटल कौशल और जागरूकता से सशक्त नहीं बनाया जायेगा, तब तक तकनीकी प्रगति सामाजिक परिवर्तन में पूरी तरह परिवर्तित नहीं हो सकेगी. डिजिटल इंडिया का अगला चरण ‘डिजिटल पहुंच’ से आगे बढ़कर ‘डिजिटल सशक्तीकरण’ का होना चाहिए. देश में इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी का अवश्य व्यापक विस्तार हुआ है, किंतु डिजिटल उपयोग की गुणवत्ता और क्षमता में अभी भी गंभीर अंतर मौजूद है. डिजिटल कौशल की कमी युवाओं को उभरते रोजगार अवसरों से वंचित कर सकती है. इस चुनौती के समाधान के लिए सबसे पहले, भारतनेट और 5जी परियोजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करनी होगी. दूसरा, डिजिटल साक्षरता को राष्ट्रीय अभियान का स्वरूप देना होगा. तीसरा, महिलाओं की डिजिटल भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष कार्यक्रम आवश्यक हैं. चौथा, कम आय वाले परिवारों के लिए सस्ती दरों पर स्मार्टफोन और डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराने की नीति पर विचार किया जाना चाहिए.
साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भी व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है. डिजिटल लेनदेन में वृद्धि के साथ साइबर अपराध भी बढ़े हैं. प्रत्येक नागरिक को साइबर ठगी, डाटा सुरक्षा और ऑनलाइन गोपनीयता के प्रति जागरूक बनाना उतना ही आवश्यक है, जितना इंटरनेट उपलब्ध कराना. आने वाले वर्षों में एआइ, सेमीकंडक्टर, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और डाटा अर्थव्यवस्था भारत की विकास यात्रा के प्रमुख आधार बनने वाले हैं. ऐसे में यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीकी विकास केवल चुनिंदा वर्गों तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे. डिजिटल इंडिया का अगला चरण ‘डिजिटल समावेशन’ का चरण होना चाहिए. आज आवश्यकता केवल डिजिटल भारत बनाने की नहीं, बल्कि समावेशी डिजिटल भारत के निर्माण की है. जब देश का प्रत्येक नागरिक डिजिटल अवसरों तक समान पहुंच प्राप्त करेगा, तभी डिजिटल इंडिया का सपना अपने पूर्ण अर्थों में साकार होगा. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)
