सैन्य आधुनिकीकरण पर जोर

Military modernisation : हिंद महासागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहता है. भारत की मंशा है कि समुद्री आवागमन निर्बाध और शांतिपूर्ण होना चाहिए.

Military modernisation : कुछ वर्षों से रक्षा क्षेत्र के विस्तार के साथ-साथ सशस्त्र सेनाओं के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में उल्लेखनीय तेजी आयी है. इस क्रम में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए रक्षा मंत्रालय ने 10 परियोजनाओं को प्रारंभिक स्वीकृति दी है, जिनकी कुल लागत 1.4 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक है. इनमें थल सेना के लिए 1,770 भविष्योन्मुखी टैंक तथा नौसेना के लिए सात उन्नत बहुद्देशीय पोत उपलब्ध कराने की योजनाएं भी शामिल हैं. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 26 रफाल लड़ाकू विमानों की संभावित खरीद के बारे में चार संशोधनों को भी मंजूरी दी है. पचास हजार करोड़ रुपये से अधिक के इस सौदे को लेकर फ्रांस से बातचीत चल रही है.

आशा है कि सेना को तीन चरणों में 2030 तक उन्नत टैंकों को उपलब्ध करा दिया जायेगा. नौसैनिक पोत मुहैया कराने में भी सात-आठ साल लग जायेंगे. उल्लेखनीय है कि पहले से ही नौसेना के लिए सात पोतों का निर्माण चल रहा है, जो आगामी दो वर्षों में सेवारत हो सकते हैं. चीन और पाकिस्तान की निरंतर बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए सेना का आधुनिकीकरण आवश्यक हो गया है. थल सेना को जो नये टैंक मिलेंगे, उन्हें किसी भी इलाके में इस्तेमाल किया जा सकता है. पहले से भी हल्के और प्रभावी वाहनों और हथियारों को सेना को देने का सिलसिला चल रहा है. चीन और पाकिस्तान से लगती हमारी सीमा और नियंत्रण रेखाओं का विस्तार पहाड़ी इलाकों से लेकर घने जंगलों, खेतों और रेगिस्तानों तक है. इसलिए यह जरूरी है कि हमारे पास ऐसे तोप-टैंक हों, जिन्हें कहीं भी आसानी से तैनात किया जा सके. हमारी समुद्री सीमा भी बहुत लंबी है.

हिंद महासागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहता है. भारत की मंशा है कि समुद्री आवागमन निर्बाध और शांतिपूर्ण होना चाहिए. भारत की सीमा सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक हितों को सुरक्षित करने के लिए यह जरूरी है कि हमारी नौसेना मजबूत हो. हाल के वर्षों में भारतीय नौसेना ने अनेक जहाजों को समुद्री लुटेरों से बचाया है. रक्षा क्षेत्र में हम ऐतिहासिक रूप से आयात पर निर्भर रहे हैं, पर अब यह स्थिति बदल रही है. भारत सरकार ने सैकड़ों वस्तुओं की एक सूची तैयार की है, जिन्हें केवल घरेलू बाजार से ही खरीदा जा सकता है. यह सूची बढ़ती ही जा रही है. इस नीतिगत पहल तथा आर्थिक सुधारों के कारण देश का रक्षा क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है. एक ओर स्वदेशी कंपनियों को बढ़ावा दिया जा रहा है, तो दूसरी ओर विदेशी निवेश एवं सहभागिता को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है. ऐसे प्रयासों का उत्साहजनक पहलू यह है कि विदेशी मुद्रा की बचत भी हो रही है तथा रक्षा निर्यात भी बढ़ रहा है.

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Published by: संपादकीय

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