डाटा सुरक्षा जरूरी

रिपोर्टों की मानें, तो फरवरी से भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के सर्वर नेटवर्क में सेंधमारी के छह हजार प्रयास हो चुके हैं.

अनेक देशों की तरह भारत में भी डाटा सेंधमारी और हैकिंग की घटनाएं बढ़ रही हैं. कुछ दिन पहले खबर आयी थी कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के पास संरक्षित 81.5 करोड़ लोगों के डाटा की हैकिंग हुई है. केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना तकनीक राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा है कि सेंधमारी हुई है और उसकी जांच की जा रही है. उन्होंने आश्वस्त किया है कि डाटा की चोरी नहीं हुई है. कोरोना महामारी के दौरान कई तरह के डिजिटल प्लेटफॉर्म उपयोग में लाये गये थे, जिनके माध्यम से जांच, टीकाकरण आदि का लेखा-जोखा रखा जाता था. केंद्र सरकार के अलावा राज्यों में भी डाटा जुटाये गये थे. चंद्रशेखर ने बताया है कि इसी प्रक्रिया में कहीं से डाटा निकला है. उम्मीद है कि जल्दी ही जांच पूरी होगी और उसके आधार पर डाटा सुरक्षा के बेहतर इंतजाम किये जायेंगे. उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले नयी दिल्ली स्थित प्रसिद्ध चिकित्सा संस्थान एम्स के सूचना नेटवर्क को हैक किया गया था.

विभिन्न मामलों में पाया गया है कि हैकिंग गिरोह दूसरे देशों ने ऐसे अपराध करते हैं. वे इतने शातिर होते हैं कि अपनी पहचान को एक जटिल प्रक्रिया से छुपा लेते हैं. ऐसे में असली दोषियों को पकड़ पाना बेहद मुश्किल होता है. स्वास्थ्य और वित्तीय व्यवहार से संबंधित डाटा की मांग अवैध अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती जा रही है. हैकर चोरी किये गये डाटा को बड़ी कीमत पर बेचते हैं. कोरोना से जुड़े भारतीय डाटा को खरीदने का दावा भी सोशल मीडिया पर किया गया था. कोरोना काल में आधार संख्या का भी खूब इस्तेमाल हुआ था. जिस अनाम व्यक्ति ने डाटा खरीद का दावा किया था, उसने यह भी कहा था कि लगभग दस प्रतिशत लोगों की आधार संख्या इसमें है.

रिपोर्टों की मानें, तो फरवरी से भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के सर्वर नेटवर्क में सेंधमारी के छह हजार प्रयास हो चुके हैं. ऐसे खतरों के बारे में सरकारी संस्थाओं को जानकारी थी. इससे यह माना जा सकता है कि डाटा सुरक्षित करने के अतिरिक्त प्रयास किये गये होंगे. चूंकि यह बेहद गंभीर मसला है, तो उम्मीद की जा सकती है कि इसकी जांच प्रमुख एजेंसियों द्वारा की जायेगी. यह इसलिए भी जरूरी है कि इसमें विदेशी अपराधियों के शामिल होने के संकेत मिले हैं. कुछ वर्षों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हैकिंग रोकने के लिए उपाय करने की कोशिशें की जा रही हैं, पर अभी उनके ठोस नतीजे आने बाकी हैं. डाटा की सुरक्षा व्यक्ति की निजता का मामला तो है ही, यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला भी है.

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