असम की बड़ी आबादी भीषणतम बाढ़ की झेल रही त्रासदी

असम की विनाशकारी बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. नेपालिखुती गांव के लोग भीषण बाढ़ से जूझ रहे हैं, जहां घरों में पानी घुस गया और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी. इस भीषण तबाही के बीच बचाव और राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी.

विगत 19 जुलाई को जब दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसक विश्व कप फाइनल देखने की तैयारी कर रहे थे, तब भारत में आधी रात को असम के नेपालिखुती गांव के लोग बाढ़ से बचने के लिए छतों और इमारतों पर शरण ले रहे थे. उस रात उनके घरों में पानी तेजी से घुस रहा था. अनेक परिवारों को आनन-फानन में गांव के लोअर प्राइमरी स्कूल की दो मंजिली इमारत में शरण लेनी पड़ी.

शिवसागर जिले का गांव नेपालिखुती राज्य में आयी इस बाढ़ से सबसे बुरी तरह प्रभावित गांवों में से एक है. इस गांव में बाढ़ से अब तक करीब दस लोगों की मौत हो चुकी है. मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि कई शव कीचड़ में फंसे हो सकते हैं. इसके अलावा लगभग 5,000 गायें बह गयी हैं, जो स्थानीय लोगों की आजीविका का मुख्य साधन थीं. गौरतलब है कि 19 जुलाई को नगालैंड के मोन, मोकोकचुंग और वोखा क्षेत्रों में ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में भारी बारिश के कारण दिखौ, दिसांग और धनसिरी जैसी दक्षिण-बैंकिंग सहायक नदियों में उफान आ गया था, जिससे असम में भीषण बाढ़ आ गयी. नगालैंड में भी बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही हुई है, जिसमें 13 लोगों की जान चली गयी.

नगालैंड के मोन जिले के सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों में नागिनिमोरा है, जो एक उप-मंडलीय शहर है. यह असम के शिवसागर जिले के बिहूबोर से 10 किलोमीटर से भी कम दूरी पर है. असम के नगांव, गोलाघाट, शिवसागर, कामरूप, होजाई, जोरहाट और लखीमपुर के 20 राजस्व मंडलों में फैले 313 गांवों में बाढ़ की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है. गोलाघाट में प्रभावित लोगों की संख्या सबसे अधिक 30,778 है, इसके बाद नगांव में 26,292 और शिवसागर में 12,480 लोग प्रभावित हैं. असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण कुल 31 राहत शिविर चला रहा है, जिनमें 5,000 से अधिक विस्थापित लोगों को आश्रय मिला हुआ है.

इसके अलावा 37 अन्य केंद्र बाढ़ प्रभावित निवासियों को राहत सामग्री वितरित कर रहे हैं. आंकड़े के मुताबिक, बाढ़ का पानी 8,268.71 हेक्टेयर कृषि भूमि में फैल गया है, जबकि 42,105 मवेशी भी प्रभावित हुए हैं. बाढ़ के कारण कई प्रभावित क्षेत्रों में घरों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचों को बड़ा नुकसान पहुंचा है. राज्य में बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा सौ से अधिक हो चुका है और 14 अगस्त तक बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या भी थोड़ी बढ़कर 78,000 से अधिक हो गयी. असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार बाढ़ से प्रभावित जिलों की संख्या सात है. बाढ़ पीड़ित अनेक लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में ऐसी बाढ़ नहीं देखी. जोरहाट जिले की मरियानी विधानसभा क्षेत्र से इस साल के विधानसभा चुनाव में रायजर दल पार्टी की उम्मीदवार ज्ञानश्री बोरा ने इस बाढ़ को जीवनकाल की सबसे भीषण बाढ़ बताया. उनके मुताबिक, मरियानी में स्थित सेलेंगाहाट गांव के 63 परिवार ऐसे हैं, जो बाढ़ में अपना सब कुछ खो चुके हैं.

इस बाढ़ ने किसी को तैयारी करने का समय तक नहीं दिया. जब पानी आंगन तक पहुंचा, तब लोग बहुत अधिक चिंतित नहीं हुए, लेकिन अगले 15 मिनट के भीतर बाढ़ का पानी छाती तक पहुंच गया और भागने के लिए कहीं जगह नहीं बची. वैसे में, आश्वस्त करने वाली बात यह थी कि निजी व्यक्तियों, एनजीओ और विभिन्न संगठनों की मदद सरकारी राहत से पहले पहुंच गयी थी. सांप और कीटों के काटने की घटनाएं भी चिंता का विषय है. बाढ़ के दौरान जब सांप के डंसे हुए मरीजों को अस्पताल नहीं ले जाया जा सका, तब डॉक्टरों ने फोन पर ही कुछ मरीजों का इलाज किया, जबकि कुछ ऐसे मरीजों को राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की मदद से बाहर निकाला गया और समय पर उनका इलाज संभव हुआ. पानी उतरने के बाद से अस्पतालों में कीड़े-मकोड़े के काटने के सौ से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं.

अब अनेक इलाकों में भले ही बाढ़ का पानी उतरने लगा है, लेकिन घुटने तक कीचड़ और गाद के कारण लोग अपने घरों में वापस नहीं लौट पा रहे हैं. वैसे इलाकों में महामारी फैलने की आशंका भी बनी हुई है. बाढ़ की वर्तमान लहर का अध्ययन कर रहे गुवाहाटी विश्वविद्यालय के भूगोल के प्रोफेसर ध्रुवज्योति सहरिया के मुताबिक, वास्तव में अत्यधिक वर्षा इस बाढ़ का एक कारण है.

उन्होंने कहा, 'हम अभी अध्ययन कर रहे हैं, इसमें वर्षा और मानवीय कारकों का मिश्रण है. बाढ़ के भीषण होने का एक कारण यह हो सकता है कि उपग्रह छवियों में हमने नदी घाटी के किनारों पर अत्यधिक खुदाई देखी है, जहां से नदियां नीचे आती हैं. यह संभवतः खनन के कारण है.' असम को अब हर साल बाढ़ की तबाही झेलनी पड़ती है और विडंबना यह है कि तबाही बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी जारी रहती है. जान-माल के नुकसान के अलावा संसाधनों की क्षति भी एक बड़ा मुद्दा है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़े के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में बाढ़ के कारण असम में 2.39 लाख हेक्टेयर से भी ज्यादा खेती की जमीन को नुकसान हुआ है. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By दिनकर कुमार

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >