निर्यात पर ध्यान

‘उभरते सितारे’ योजना के तहत उन छोटे एवं मझोले उद्यमों को सहायता उपलब्ध करायी जायेगी, भविष्य में जिनके उत्पादों के निर्यात की संभावना होगी.

अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा व्यापार घाटे में कमी लाने के लिए सरकार निर्यात बढ़ाने के प्रयासों में लगी हुई है. इन प्रयासों को सफल बनाने में सूक्ष्म, छोटे और मध्यम उद्यमों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है. इसे ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक महत्वाकांक्षी योजना ‘उभरते सितारे’ की घोषणा की है. इसके तहत उन छोटे एवं मझोले उद्यमों को सहायता उपलब्ध करायी जायेगी, भविष्य में जिनके उत्पादों के निर्यात की संभावना होगी.

इस योजना का उल्लेख फरवरी में लाये गये बजट में ही था, किंतु कोरोना महामारी की दूसरी लहर से पैदा हुई परिस्थितियों के कारण उसे पहले लागू नहीं किया जा सका था. बीते डेढ़ साल में कोरोना महामारी की मार सबसे अधिक छोटे और मझोले उद्यमों को ही सहनी पड़ी है, लेकिन इस क्षेत्र को राहत देने के लिए वित्त मुहैया कराने, कर्ज वसूली रोकने तथा नियमन में सुधार जैसी कोशिशें भी हुई हैं.

इन कोशिशों ने एक बार फिर इस क्षेत्र में गतिविधियां तेज होने लगी हैं. आत्मनिर्भर भारत के संकल्प में निर्यात बढ़ा कर वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत की ठोस उपस्थिति स्थापित करने का उद्देश्य भी शामिल है. कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश के उद्योग जगत और संबंधित प्रतिष्ठानों से निर्यात बढ़ाने का आह्वान किया था. इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए एक दीर्घकालिक नीतिगत पहल की आवश्यकता है.

‘उभरते सितारे’ योजना ऐसी ही पहल का एक हिस्सा है. कुछ विकसित देशों में बहुत पहले ऐसे उद्यमों को चिह्नित किया गया, जो भविष्य में निर्यात बढ़ाने में योगदान दे सकते थे. उन्हें आवश्यक वित्त उपलब्ध कराने के साथ उनकी तकनीकी क्षमता बढ़ाने में भी सरकारों ने मदद की. कुछ समय बाद इसका लाभ उन अर्थव्यवस्थाओं को निर्यात वृद्धि के रूप में मिला. भारत सरकार की योजना ऐसे ही कार्यक्रमों से प्रेरित है.

आम तौर पर यह देखा जाता है कि अनेक उद्यम अपनी संभावनाओं को पूरी तरह साकार नहीं कर पाते हैं, क्योंकि उनके पास आवश्यक निवेश के लिए धन नहीं होता तथा तकनीक तक उनकी पहुंच आसान नहीं होती है. ‘उभरते सितारे’ योजना से इस अवरोध को दूर करने में बड़ी मदद मिल सकती है. भारत के लघु उद्योग विकास बैंक ने भी छोटे एवं मझोले उद्यमों को घरेलू और वैश्विक आपूर्ति शृंखला से जोड़ने के लिए बहुआयामी सहायता देने की बड़ी योजना तैयार की है.

इन पहलों से उत्पादित वस्तुओं की गुणवत्ता बढ़ेगी और वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अन्य देशों के उत्पादों के साथ प्रतिस्पर्द्धा कर सकेंगे. इससे देश के भीतर रोजगार और आमदनी बढ़ाने में भी सहयोग मिलेगा. देश के सकल घरेलू उत्पादन में छोटे और मझोले उद्यम की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत है. ‘उभरते सितारे’ योजना इसे केंद्र सरकार के लक्ष्य 40 प्रतिशत तक ले जा सकती है. अभी इस क्षेत्र में 11 करोड़ से अधिक लोग काम करते हैं. उम्मीद करनी चाहिए कि विभिन्न उद्यम इस पहल का लाभ उठा कर निर्यात बढ़ाने में योगदान करेंगे.

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Published by: संपादकीय

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